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Summary
सरकार ने Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026 पेश किया है, जिसमें Payment and Settlement Systems Act 2007 में बदलाव किया गया है। UPI पर शुल्क लगाने का कानूनी रास्ता खोला गया है, लेकिन अभी तक कोई चार्ज नहीं लगेगा।
From the report
जिस UPI से आप दस रुपए से लेकर हजारों रुपए तक का पेमेंट कुछ सेकेंट्स पर कर देते हैं ना कार्ड निकालने के जरूरत, ना कैश रखने का जहंजट बस QR कोड सकैन किया और पेमेंट हो गया क्या आप इसी UPI की सुविधा वाली आदत का खामियाजा पैसा देकर चुकाना पड़ेगा सरकार ने संसद में एक ऐसा बिल पेश किया है जिसने UPI और रुपे डेबिट कार्ट से होने वाले कुछ पेमेंट्स पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है हला कि अभी जरूर UPI पेमेंट्स पर कोई चार्ज लगने नहीं जा रहा है तुरंद लेकिन सोशल मीडिया पर इस पर बहस जरूर शुरू हो गई और तो और मामला सिर्फ इतना भी नहीं है क्योंकि विवाद में अमेरिका का एंगल भी जुड़ गया है सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या सरकार डोनाल्ड ट्रम के प्रशासन के दबाव में आकर आपके उस यूपियाई पर शुरु लगाने जा रही है जिसका इस्तिमाल अब आपकी रोजमर्वरा के जिन्दगी का हिस्सा बन चुका है तो आखिर सरकार ने कानून में क्या बदला है, UPI पर शुरु लगाने की ज़रूरत क्यों पड़ी और अमेरिका इस पूरी कहानी में कहां से आ गया सब समझाएंगे आपको इस वीडियो में नमस्ते मेरा नाम सौरप चिरपाठी है आप नीज़ पिंच देख रहे हैं तो सबसे पहले समझते हैं कि सरकार ने आखिर किया क्या है? सरकार संसत में लेकर आई है Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026. इस बिल के जरिये Payment and Settlement Systems Act 2007 में बदलाव किया गया है. सवाल है कि इस कानून का UPI से क्या लेना देना है तो समझ ये UPI सिर्फ आपके मवाइल और QR Code का नाम नहीं है इसके पीछे बैंक, पेमेंट प्रोसेसर, सर्वर, नेटवर्क और पूरा डिजिजिटल पेमेंट इंफरस्ट्रक्चर काम करता है इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए कानून और नियम भी हैं अभी तक Payment and Settlement Systems Act और Income Tax Act की कुछ धाराओं के वज़े से UPI और रूपी डेबिट कार्ट से होने वाले पेमेंट्स पर MDR यानि Merchant Discount Rate लगाने की विवस्था नहीं थी सरकार अब इसमें बदलाव कर रही है Payment and Settlement Systems Act की धारा 10A में बदलाव के बाद सरकार ये तै कर सके कि किस तरह के Electronic Payments पर शुरुक लगाया जा सकता है सरकार ने हलाकि ये नहीं कहा है कि अब हर UPI Payment पर चार्ज लगेगा अभी हुआ ये है कि शुरुक लगाने का कानूनी रास्ता खोला गया है किस पेमेंट पर शुरुक लगेगा, कितना लगेगा, किस से लिया जाएगा और किन मर्चेंट्स पर लागू होगा ये आगे तै किया जाना हला कि मीडिया रिपोर्ट्स में सरकार से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि संभावित विवस्था में बड़े मर्चेंट्स और 2000 रुपए से जादा के कुछ UPI पेमेंट्स को इसके दायरे में लाया जा सकता है यानि अभी 50 रुपए के चाय नाश्ते की UPI पेमिंट करते ही आपके खाते से अलग से कोई चार्ज कटना शुरू नहीं हो रहा है। MDR MDR साइबर सेक्यूर्टी और दूसरी सिस्टम्स को चलाने में खर्चा होता है फिर हाल इस लागत का बोच अलग-अलग हिस्सों में बैंक, पेमिंट कंपनिया और सरकार उठा रहे हैं सरकार ने 2021 में छोटे मर्चन्ट के UPI पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव स्कीम भी शुरू किये थी इसके तहट पेमेंट सिस्टम से जुड़े खिलाडियों को भुकतान किया गया ताकि चोटे मूल के UPI transactions की लागत का कुछ हिस्सा पूरा किया जा सके यानि UPI आप के लिए फ्री है लेकिन उसके पीछे का system फ्री नहीं है और यहीं से असली बहस शुरू होते है UPI का इस्तमाल लगातार बढ़ रहा है ऐसे में सवाल है कि इतने बड़े पेविमेंट सिस्टम को लंबे समय तक चलाने की लागत आखिर कौन उठाएगा। इसी बहस के बीच UPI पर MDR लगाने की समभावना की बात सामने आ रही है। लेकिन अगर MDR लगाया गया तो एक एहम सवाल होगा इसका बोज आखिर उठाएगा कौन? अगर शुल्क दुकानदार से लिये जाता है तो क्या दुकानदार इसे अपनी जेब से भरेगा? या फिर वो किसी ना किसी तरीके से इसे अपने सामान या सेवा की कीमत में जोड़ देगा यानि सरकार ग्राहक से सीधे UPI चार्ज ना ले फिर भी उसका अपरत्रिक्ष असर ग्राहक तक पहुंच सकता है राकी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने साफ कहा है कि अगर पविश्च में UPI पर MDR लागू किया भी जाता है तो ये शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाएगा इसे मर्चन यानि दुकानदार से लिया जाएगा सरकार का तरक है कि इससे मिलने वाले पैसे का इस्तमाल बैंक और फिंटेक कमपनिया यूपियाई के इंफ्रास्ट्रक्चर, टेकनॉलजी और साइबर सेक्योर्टी में निवेश करने के लिए कर सकेंगे यानि ग्राहाक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और इस निवेश का फाइदा लंबे समय में यूपियाई इस्तमाल करने वाली लोगों को मिलेगा। लेकिन सवाल फिर भी बना रहता है, अगर दुकानदार पर लागताएगी, तो क्या वो हमेशा इसे खुद ही उठाएगा? कॉंगरिस नेता जैराम नमेश ने भी इसकी आशंका को जताया है और बोला है कि उनका कहना है कि शुल्ग सीधे ग्राहक से नहीं लिया गया तब भी इसका बोज आखिरकार आम आदमी पर पड़ सकता है अब तक कहानी भारत की घरेलू पेमेंट विवस्था की है, लेकिन इसके साथ अमेरिका का एंगल क्यों जुड़ रहा है? तो इसके लिए आपको UPI और Visa Mastercard के बीच का फर्क समझना होगा. एक समय भारत में कार्ट से पेमेंट करने के लिए वीजा और मास्टर कार्ट जैसे नेटवर्क की बड़ी भूमिकर थी। UPI payments card cash phone QR code scan payment UPI MDR payment system जो आसान भी था और आम तौर पर अतरिक्ष शुल्क से मुक्त भी यही वज़य है कि UPI तेजे से लोगों की जिन्दिगी का हिस्सा बन गया लेकिन इसका दूसरा असर यह हुआ कि कार्ड आधारिक पेमेंट नेटवर्क के लिए भारत का बाजार बदल ले लगा अमेरिका लंबे समय से ये सवाल उठाता रहा है कि भारत की डिजिजिटल पेमेंट नीतियां घरेलू कंपनियों को फाइदा पहुँचाती हैं और विदेशी पेमेंट के कंपनियां उनके लिए बराबरी का मुकाबला मुश्किल बनाती हैं मार्च 2026 में USTR यानि कि United States Trade Representative ने भी भारत की Digital Payment नितियों को लेकर आपत्ती जताई और उन्हें विदेशी कंपनियों के लिए Trade Barrier के संदर्भ में देखा. यानि अमेरका की चिंता यह है कि भारत का डिजिजिटल पेमेंट सिस्टम घरेलू कंपनियों को ऐसा फायदा दे रहा है जिससे अमेरकी कंपनियों के लिए मुकाबला मुश्किल हो रहा है यहीं से UPI और भारत अमेरका ट्रेड बातचीत का कनेक्शन सामने आता है भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बात चीज चल रही है आप जानते हैं ऐसे में डिजिजिटल पेमेंट भी उन मुद्धों में शामिल है जिन पर दोनों देशों के हित अलग-अलग हो सकते हैं अब अमेरिका और UPI की कहानी को एक और धारन समझी ब्राजील में भी एक घरेलू डिजिजिटल पेविमेंट सिस्टम है इसका नाम है PIX PIX को ब्राजील के केंदरी बैंक ने बनाया और वहां भी ये तेज और कम लागत वाले डिजिजिटल पेविमेंट का बड़ा माध्यम बन चुका है अमेरिका की तरफ से ब्राजील के digital payment system को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं यानि दुनिया में ये पहली बार नहीं है जब किसी देश के घरेल्यू digital payment system और अमेरिकी payment company के हितों के भी श्टकराओ की बात सामने आई हो अब सवाल उठता है कि क्या भारत सरकार ने UPI पर शुरुक लगाने का रास्ता अमेरिकी दबाव में खोला है? इसका सीधा जवाब अभी मौजूद नहीं है. सरकार का अपना तरक है कि UPI के बढ़ते इस्तिमाल के साथ इसके इंफरास्ट्रक्चर को चलाने की लागत भी बढ़ रही है और पेमेंट सिस्टम में निवेश, सुरक्षा और तकनीकी शमता बनाय रखने के लिए एक टिकाओ आर्थिक मॉडल चाहिए. दूसरी तरफ सवाल यह उठा है कि अगर भारत ने दुनिया के सामने अपना सफल डिजिजिटल पेमेंट मॉडल खड़ा किया है तो क्या उसकी लागत निकालने के लिए अब उसी सिस्टम पर शुल्क लगाना जरूरी है और क्या इस फैसले पर अमेरिका की व्यापारिक चिंताओं का भी असर है अब आते हैं उस आंकड़े पर जिसकी सबसे ज़ादा चर्चा हो रही है अगर 2000 रुपए से ज़ादा वाले UPI पेमेंट को संभावित शुल्क के दारे में लाया जाता है तो उपलब्द आंकडों के मताविक ऐसे पेमेंट कुल UPI ट्रांजेक्शन दिये संख्या का करीब 4 प्रतीशत है यानि संख्या के हिसाब से देखें तो UPI के करीब 96 प्रतीशत ट्रांजेक्शन इस संभावित शुल्क के दायरे से बाहर रह सकते हैं 4 4 2000 transaction payments transaction इसलिए सिर्फ transaction की गिंटी देखकर ये मान लेना कि इसका असर बहुत छोटा होगा, सही तस्वीर नहीं देता. यही वज़े है कि असली सवाल सिर्फ ये नहीं है कि कितने UPI payments पर MDI लगाया जाएगा. असली सवाल यह है कि अगर शुल्क लगाया गया तो उसका बोज कौन उठाएगा दुकानदार, बैंक, पेमेंट कमपनी, सरकार या आखिरकारक रहा गया नहीं आप और हम क्योंकि UPI अब सिर्फ पैसे भेजने की सुविधा बर नहीं है यह आपके रोजबरला की अर्थविवस्ता का हिस्सा बन चुका है चाय से लेकर किराने तक, सबजी से लेकर अस्पताल तक, ओनलाइन शौपिंग से लेकर बड़े पेमेंट्स तक हर जगे इसका इस्तमाल हो रहा है इसलिए अगर UPI की कुछ पेमेंट पर शुल्क आता है तो सरकार को साफ साफ बताना होगा कि शुल्क कितना होगा किस पर लगेगा किस से वसूला जाएगा और क्या उसका आसर ग्राहक के जेप पर पड़ेगा अब अमेरिका वाले सवाल पर भी यही बात लागू होती, यह कहना अभी जल्दवाजी होगा कि भारत ने अमेरिकी दबाव में आकर UPI पर शुरुक लगाने का फैसला या उसका रास्ता खोला है। कि दर अभी तै नहीं हुई, अब देखना होगा कि सरकार किन पेमेंट्स पर MDR लगाती है, कितनी दर रखती है, किन मर्चेंट्स को इसके दायरे में लाती है, और सबसे ज़रूरी बात, इसका बोज आखिर किस पर पड़ता है, क्योंकि सवाल सिर्फ UPI के फ्री रहने या चार्ज लगाने का नहीं है, सवाल उस डिजिजिटल पेमेंट सिस्टम का है जिसे भारत ने अपने दम पर खड़ा किया और जिसे करोडों लोग हर दिन इस्तेमाल करते हैं इसलिए अगर इसमें बदलाव होता है तो सरकार को सिर्फ ये बताना नहीं होगा कि पैसा कौन देगा ये भी बताना होगा कि ये पैसा क्यों लिया जा रहा है और क्या इस वैसले में भारत की अपनी जरूरत बड़ी है या शुल्क लगाया जा सकता है और अब असरी नजर इसी पर रहेगी कि उस रास्ते पर सरकार आगे कितना कदम बढ़ाती है कब बढ़ाती है हमारी नजर विश्व पर बनी रहेगी आपको यह पूरा जो हमने एक्स्पेनर बताया संधाय है यूपीआई का मसला कैसा लगा कॉमे