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Summary
महाराष्ट्र में चुनाव आयोग के स्तीफे की मांग को लेकर रोज सडगों पर हैं। दोनों भाईयों ने मिल कर दिया है और इसका नाम रखा गया है गर्जना।
From the report
70 लाख लोगों का नाम काट कर विधान सभा चुनाव को प्रभावित किया गया। मतलब साइएआर से पहले उसका पहला प्रयोग महाराष्ट में किया गया था लोकसभा चुनाव में महाविकास घाड़ी ने 48 में से 30 सीटें जीते थी मगर 5 महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में वही गठबंदन आंधे मोगिर कर 288 में से सिर्फ 50 सीटें ही जीत पाए जबरन चुनाव जीतने का आरोप लगाया। तो हम मौजूद हैं कथित वोट चोरी की उस पहली प्रयोगशाला में। हम मौजूद हैं मुंबई में महाराष्ट्र में चीफ एलिक्शन कमिशनर ग्यानेश कुमार के स्तीफे की मांग को लेकर रोज सडगों पर हैं। मगर आज का कॉल दोनों भाईयों ने मिल कर दिया है और इसका नाम रखा गया है गर्जना। दूसरा कि क्या आप दोनों भाई साथ मिलकर गठवंदन करके चुनाव लड़ सकते हैं तो यहां समर्थकों से हम बातचीत करेंगे और समझेंगे कि वो इस प्रदर्शन में क्यों शामिल हुए हैं और SIR का मुद्दा उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है। और उसमें आम पब्लिक के भी शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है क्योंकि विपक्ष में ये सबसे बड़े पॉलिटिकल फोर्स है महराश्ट के भीतर
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महाराष्ट्र में चुनाव आयोग के स्तीफे की मांग को लेकर रोज सडगों पर हैं। दोनों भाईयों ने मिल कर दिया है और इसका नाम रखा गया है गर्जना।
“हम मौजूद हैं कथित वोट चोरी की उस पहली प्रयोगशाला में।”From the report
70 लाख लोगों का नाम काट कर विधान सभा चुनाव को प्रभावित किया गया। मतलब साइएआर से पहले उसका पहला प्रयोग महाराष्ट में किया गया था लोकसभा चुनाव में महाविकास घाड़ी ने 48 में से 30 सीटें जीते थी मगर 5 महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में वही गठबंदन आंधे मोगिर कर 288 में से सिर्फ 50 सीटें ही जीत पाए जबरन चुनाव जीतने का आरोप लगाया। तो हम मौजूद हैं कथित वोट चोरी की उस पहली प्रयोगशाला में। हम मौजूद हैं मुंबई में महाराष्ट्र में चीफ एलिक्शन कमिशनर ग्यानेश कुमार के स्तीफे की मांग को लेकर रोज सडगों पर हैं। मगर आज का कॉल दोनों भाईयों ने मिल कर दिया है और इसका नाम रखा गया है गर्जना। दूसरा कि क्या आप दोनों भाई साथ मिलकर गठवंदन करके चुनाव लड़ सकते हैं तो यहां समर्थकों से हम बातचीत करेंगे और समझेंगे कि वो इस प्रदर्शन में क्यों शामिल हुए हैं और SIR का मुद्दा उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है। और उसमें आम पब्लिक के भी शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है क्योंकि विपक्ष में ये सबसे बड़े पॉलिटिकल फोर्स है महराश्ट के भीतर
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