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Summary
काधेछा ने बताया कि वे लखणों किष्ठ विद्ढियाला के विद्यार्थी हैं और वे अपना नाम छिपाने के लिए कॉकरोज का पोशाक पहनते हैं। उन्होंने कहा कि उनका मुद्दा यह है कि Education Ministry निकम्मा है और Education System को दुरुस्त बनाने के लिए वे प्रदर्शन कर रहे हैं।
From the report
काधेछा अपना नाम बता सकते हैं क्या करते हैं? मेरा नाम कौकरोच है, मैं लखणों किष्ठ विद्ढियाला का विद्ढियार्थी हूँ मैं अपना नाम अपना छहरा न देखाते हूँ क्या आपको ने लगा जाता है? अपनी सोच दिखाना चाहता हूं कि सोच से यहां पर हूं और अपना मुद्दा तो वह तीनों बिना फेस को दिखाई हम दिखा सकते हैं और सबसे इंपोर्टेंट यही है आइडेंटिटी छुपाने का कई रीजन है जिसमें से एक रीजन मैं आपको से बताऊंगा है परिवार के छोड़ी में आयूं यहां पर भाजों को मताले घरवालों को नहीं पाता है इस साथ तरीके में हमारा गरह है यही हमारा वल्टैंक है हमारा लाइब्रायरी भिक्षम लही हम रात में बढ़ते भी हैं जब शांत हो जाता है महुल एक दो गरीब तो सब कुछ यही रोड है जंतरमंत्र का हमारे लिए पर यह ऑफिट कब से पहना है अपने कॉकरोज का यह मैंने दो दिन से पिछले दो दिन से पहना हूं आप अगर इसको देखेंगे टेस्ट करके तो बहुत मोटा कपड़ा है यह अपने इंडिया मिलेगा, होंग कॉंग से मैंने order करके मंगाया है, गर्मी बहुत ज़्यादा मैं महसूस करता हूँ, जब से पहनता हूँ, तब से, जब तक निकालता नहीं हूँ, तब तक, और दूसरी चीज, गर्मी महसूस करने के साथ-साथ, जो मास्क लगाया हूँ, मैं बोलता हूँ तो उसमें मुझे सांस रहने में भी दिक्कत होती है। लेकिन मैं प्रयास करता हूँ चलो ठीक है जब तक हम बोल पाएं बिल्कुल तब तक हम बोलेंगे तब तक नहीं निकालेंगे। यहाँ पे आने का और लोग जो आ रहे हैं, उनके सबसे मेन वज़ा यह है, कि हमारे बेच 30 मासूम बच्चे नहीं हैं, जो सपना देख रहे थे कि हम डॉक्टर बने, देश की शेवा करें, अपने फैमिली का नाम रोशन करें, जिले का, प्रदेश का, देश का. सिर्फ एक वज़ा से निकम्मी ये मिन…
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काधेछा ने बताया कि वे लखणों किष्ठ विद्ढियाला के विद्यार्थी हैं और वे अपना नाम छिपाने के लिए कॉकरोज का पोशाक पहनते हैं। उन्होंने कहा कि उनका मुद्दा यह है कि Education Ministry निकम्मा है और Education System को दुरुस्त बनाने के लिए वे प्रदर्शन कर रहे हैं।
“हमारे बेच 30 मासूम बच्चे नहीं हैं, जो सपना देख रहे थे कि हम डॉक्टर बनें, देश की शेवा करें, अपने फैमिली का नाम रोशन करें, जिले का, प्रदेश का, देश का.”From the report
काधेछा अपना नाम बता सकते हैं क्या करते हैं? मेरा नाम कौकरोच है, मैं लखणों किष्ठ विद्ढियाला का विद्ढियार्थी हूँ मैं अपना नाम अपना छहरा न देखाते हूँ क्या आपको ने लगा जाता है? अपनी सोच दिखाना चाहता हूं कि सोच से यहां पर हूं और अपना मुद्दा तो वह तीनों बिना फेस को दिखाई हम दिखा सकते हैं और सबसे इंपोर्टेंट यही है आइडेंटिटी छुपाने का कई रीजन है जिसमें से एक रीजन मैं आपको से बताऊंगा है परिवार के छोड़ी में आयूं यहां पर भाजों को मताले घरवालों को नहीं पाता है इस साथ तरीके में हमारा गरह है यही हमारा वल्टैंक है हमारा लाइब्रायरी भिक्षम लही हम रात में बढ़ते भी हैं जब शांत हो जाता है महुल एक दो गरीब तो सब कुछ यही रोड है जंतरमंत्र का हमारे लिए पर यह ऑफिट कब से पहना है अपने कॉकरोज का यह मैंने दो दिन से पिछले दो दिन से पहना हूं आप अगर इसको देखेंगे टेस्ट करके तो बहुत मोटा कपड़ा है यह अपने इंडिया मिलेगा, होंग कॉंग से मैंने order करके मंगाया है, गर्मी बहुत ज़्यादा मैं महसूस करता हूँ, जब से पहनता हूँ, तब से, जब तक निकालता नहीं हूँ, तब तक, और दूसरी चीज, गर्मी महसूस करने के साथ-साथ, जो मास्क लगाया हूँ, मैं बोलता हूँ तो उसमें मुझे सांस रहने में भी दिक्कत होती है। लेकिन मैं प्रयास करता हूँ चलो ठीक है जब तक हम बोल पाएं बिल्कुल तब तक हम बोलेंगे तब तक नहीं निकालेंगे। यहाँ पे आने का और लोग जो आ रहे हैं, उनके सबसे मेन वज़ा यह है, कि हमारे बेच 30 मासूम बच्चे नहीं हैं, जो सपना देख रहे थे कि हम डॉक्टर बने, देश की शेवा करें, अपने फैमिली का नाम रोशन करें, जिले का, प्रदेश का, देश का. सिर्फ एक वज़ा से निकम्मी ये मिन…
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