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Summary
आदिवासी बस्ती में लोग बारिश से पहले डरते हैं क्योंकि यहां सड़क नहीं, नाली नहीं, कई परिवारों के पास पक्का घर तक नहीं है। सरकारी योजनाएं यहां नहीं पहुंची हैं।
From the report
कहते हैं गाउं तक विकास पहुँच चुका है लेकिन परियागराज की इस आदिवासी बस्ती में आज भी लोग बारिश से पहले डरते हैं क्योंकि यहां सडक नहीं, नाली नहीं, कई परिवारों के पास पक्का घर तक नहीं अकिल सरकारी योजनाई यहां क्यों नहीं पहुंची प्रियागराज जिले के बेनिपुर ग्राम पंचायत के मजरा नमबर चार में करीब 500 लोगों की आवादी रहती है ग्रामीडों का कहना है कि पंचायत का 5 साल का कारिकाल पूरा हो गया लेकिन उनके मुहले की तस्वीर नहीं बदली आप हमारे पीछे देख सकते हैं कि जिन लोगों को आबास नहीं मिला है तो किस तरह से गुजारा कर रहे हैं इस तरह से पन्नी हर वर्ष तान लेते हैं और इसी में रहते हैं जब आंधी तुफान आता है तो ये पन्नी भी फट जाती हैं फिर घर के अंदर जो भी सामान होता है आटा, पिसान, चाबल, कपड़ा सारा खराप हो जाता है बारिश के सीजन में किसी न किसी तरह गुजारा करते हैं लेकिन इस तरह की स्थिति है कि ये रोज के कमाने, रोज के खाने वाले हैं, कहां से घर बनबा पाएंगे? कितनी बार पन्नी बदलना होता है? अब जैवेर बर्शात आवा था, जैवेर बदलना होता है. एक दर्किम कितने कावा था? 10 ओं रोड रोड नहीं है दोवरे दोवरे पुम चीट दुवरे पुम चीट दुवरे अधिकत है में नाली वुजिक दिखीर यह छास थे नाली नहीं बनी था घरन के अंदर पाने था कडेला छट छट गिर जाएगा नहीं बनाया है कुछ अगर गिर जाता है मनेभी स्कूल आउजार करात मनेभी लेथर जाता है मनेभी कहां तक का देख है कडेला ही निकल परता है बारिश की सीजन में का दिक्कत हो था? पानी भर जाने से सोच के लिए बाहर निकलना भी उनके लिए जोखिम भरा हो जाता है। नहीं रहा है कि मां गए क्या करें पढ़कर लेकर तौर अरे समकत बहुत तकलीब भी है …
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Summary
आदिवासी बस्ती में लोग बारिश से पहले डरते हैं क्योंकि यहां सड़क नहीं, नाली नहीं, कई परिवारों के पास पक्का घर तक नहीं है। सरकारी योजनाएं यहां नहीं पहुंची हैं।
“सरकारी योजनाएं यहां नहीं पहुंची हैं।”From the report
कहते हैं गाउं तक विकास पहुँच चुका है लेकिन परियागराज की इस आदिवासी बस्ती में आज भी लोग बारिश से पहले डरते हैं क्योंकि यहां सडक नहीं, नाली नहीं, कई परिवारों के पास पक्का घर तक नहीं अकिल सरकारी योजनाई यहां क्यों नहीं पहुंची प्रियागराज जिले के बेनिपुर ग्राम पंचायत के मजरा नमबर चार में करीब 500 लोगों की आवादी रहती है ग्रामीडों का कहना है कि पंचायत का 5 साल का कारिकाल पूरा हो गया लेकिन उनके मुहले की तस्वीर नहीं बदली आप हमारे पीछे देख सकते हैं कि जिन लोगों को आबास नहीं मिला है तो किस तरह से गुजारा कर रहे हैं इस तरह से पन्नी हर वर्ष तान लेते हैं और इसी में रहते हैं जब आंधी तुफान आता है तो ये पन्नी भी फट जाती हैं फिर घर के अंदर जो भी सामान होता है आटा, पिसान, चाबल, कपड़ा सारा खराप हो जाता है बारिश के सीजन में किसी न किसी तरह गुजारा करते हैं लेकिन इस तरह की स्थिति है कि ये रोज के कमाने, रोज के खाने वाले हैं, कहां से घर बनबा पाएंगे? कितनी बार पन्नी बदलना होता है? अब जैवेर बर्शात आवा था, जैवेर बदलना होता है. एक दर्किम कितने कावा था? 10 ओं रोड रोड नहीं है दोवरे दोवरे पुम चीट दुवरे पुम चीट दुवरे अधिकत है में नाली वुजिक दिखीर यह छास थे नाली नहीं बनी था घरन के अंदर पाने था कडेला छट छट गिर जाएगा नहीं बनाया है कुछ अगर गिर जाता है मनेभी स्कूल आउजार करात मनेभी लेथर जाता है मनेभी कहां तक का देख है कडेला ही निकल परता है बारिश की सीजन में का दिक्कत हो था? पानी भर जाने से सोच के लिए बाहर निकलना भी उनके लिए जोखिम भरा हो जाता है। नहीं रहा है कि मां गए क्या करें पढ़कर लेकर तौर अरे समकत बहुत तकलीब भी है …
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