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Summary
सरकार सस्ता चावल दे रही है ताकि एथनॉल बनाया जा सके, लेकिन इसके लिए खुले बजार से चावल खरीदना बहुत महंगा पड़ेगा।
From the report
अब सवाल उठता कि सरकार सस्ता चावल दे ही क्यों रही क्योंकि खुले बजार से MSP पर चावल खरीद कर एथनॉल बनाना बहुत महंगा पड़ेगा पेट्रोले मंतराले के आंकडों के मताबिक FCI के सर्पलस चावल से बना एथनॉल सबसे सस्ता है करीब 60 रुपए लीटर मक्के से बना एथनॉल करीब 72 रुपए और गन्ने से बना करीब 66 रुपए प्रती लीटर पढ़ता है इसके मुकाबले अगर सीधे कच्चे तेल से पेट्रोल बनाया जाये तो प्रोसिंग मिलाकर लागत करीब 55 रुपए लीटर आती है यानि सबसिडी वाले चावल के बावजूद एथनॉल इंपोर्ट किये पेट्रोल से महंगा पढ़ रहा है हाली में सरकार ने भी एथनॉल पर अपना पक्ष रखा था संसद में सरकार ने सतन में ये तरक दिया कि अगर एथनॉल ना मिलाये जाता तो पेटरोल की कीमत करीब 125 रुपर प्रती लीटर तक पहुँच गई होती यानि सरकार का पूरा निरेटिव यही है कि एथनॉल महंगा नहीं बलकि पेटरोल को सस्ता बनाय रखने का जरिया है अब देखिए एथनॉल बनाने के लिए गन्ने का भी बड़ी मातरा में इस्तमाल हो रहा है नतीजा ये हुआ कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी एकस्पोर्टर देश भारत को अब चीनी इंपोर्ट पर ड्यूटी हटानी पड़ी क्योंकि घरेलू सप्लाई पर असर पड़ने लगा था। इनेटोडिक रिपोर्ट में लिखा है कि इंडियन शुगर और बायो एनरजी मनिफेक्चर असोसिशन लगातार सरकार से एथनॉल की खरीद कीमत बढ़ाने की मांग कर रहा है ताकि गन्ना किसानों को ज़दा भुकतान हो सके। यानि एक तरफ गन्ना एथनॉल की तरफ मुढ रहा है, दूसरी तरफ घरेलू बजार में चीनी की कमी पूरी करने के लिए आयार्थ बढ़ रहा है, चीनी की रेट बढ़ रहा है, एक अजीब चक्र सबन गया है, जहां एनरजी सेक्योर्टी के नाम बर फूट सप्लाई चेन
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सरकार सस्ता चावल दे रही है ताकि एथनॉल बनाया जा सके, लेकिन इसके लिए खुले बजार से चावल खरीदना बहुत महंगा पड़ेगा।
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अब सवाल उठता कि सरकार सस्ता चावल दे ही क्यों रही क्योंकि खुले बजार से MSP पर चावल खरीद कर एथनॉल बनाना बहुत महंगा पड़ेगा पेट्रोले मंतराले के आंकडों के मताबिक FCI के सर्पलस चावल से बना एथनॉल सबसे सस्ता है करीब 60 रुपए लीटर मक्के से बना एथनॉल करीब 72 रुपए और गन्ने से बना करीब 66 रुपए प्रती लीटर पढ़ता है इसके मुकाबले अगर सीधे कच्चे तेल से पेट्रोल बनाया जाये तो प्रोसिंग मिलाकर लागत करीब 55 रुपए लीटर आती है यानि सबसिडी वाले चावल के बावजूद एथनॉल इंपोर्ट किये पेट्रोल से महंगा पढ़ रहा है हाली में सरकार ने भी एथनॉल पर अपना पक्ष रखा था संसद में सरकार ने सतन में ये तरक दिया कि अगर एथनॉल ना मिलाये जाता तो पेटरोल की कीमत करीब 125 रुपर प्रती लीटर तक पहुँच गई होती यानि सरकार का पूरा निरेटिव यही है कि एथनॉल महंगा नहीं बलकि पेटरोल को सस्ता बनाय रखने का जरिया है अब देखिए एथनॉल बनाने के लिए गन्ने का भी बड़ी मातरा में इस्तमाल हो रहा है नतीजा ये हुआ कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी एकस्पोर्टर देश भारत को अब चीनी इंपोर्ट पर ड्यूटी हटानी पड़ी क्योंकि घरेलू सप्लाई पर असर पड़ने लगा था। इनेटोडिक रिपोर्ट में लिखा है कि इंडियन शुगर और बायो एनरजी मनिफेक्चर असोसिशन लगातार सरकार से एथनॉल की खरीद कीमत बढ़ाने की मांग कर रहा है ताकि गन्ना किसानों को ज़दा भुकतान हो सके। यानि एक तरफ गन्ना एथनॉल की तरफ मुढ रहा है, दूसरी तरफ घरेलू बजार में चीनी की कमी पूरी करने के लिए आयार्थ बढ़ रहा है, चीनी की रेट बढ़ रहा है, एक अजीब चक्र सबन गया है, जहां एनरजी सेक्योर्टी के नाम बर फूट सप्लाई चेन
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