
Summary
जो भर हैं जो दुकाने थी ये पूरा बाजार हुआ करता था मलवे में ढूंढ रहे हैं कि कुछ शायद जरूरत भर का मिल जाए
From the report
जो भर हैं जो दुकाने थी ये पूरा बाजार हुआ करता था मलवे में ढूंढ रहे हैं कि कुछ शायद जरूरत भर का मिल जाए ये जो पूरा है ये अभी भी लूज बना हुआ है जिस दिन हम पहले दिन यहाँ नोवाकोट पहुँचे थे तब यहाँ पर आया नहीं जा सकता था अब जब पानी जो है वो नीचे पहुचा है और ये देखिए तो यहाँ थोड़ा चलने लायक हुआ है और लोग जो है वो अपने जो भर हैं, जो दुकाने थी, ये पूरा बाजार हुआ करता था, मलवे में ढूंढ रहे हैं कि कुछ शायद जरूरत भर का मिल जाए, और आप देखो कि दीवारों पर कितने बड़े बड़े पत्थर जो हैं, वो चिपके ये पथर एक एक पथर हटा के वो उस मलवे में कुछ सलाश करने की कोशिश बच्ची जो है वो कर रही है दूसरी तीसरी मंगल तक यहाँ पर देखिए क्या सबाही सैलाव ने मचाई हुआ इस वक्त जो है जो सेलाब छोड़कर गया है पीछे जो तबाही के निशान है यह सामान्य कब तक होंगे यह ठीक कब तक होंगे नोमाकोट की रसुआ की जो शक्ल है वो पहले जासी हो भी पाएगी या नहीं क्योंकि नदी अपना रास्ता बदल चुकी है बेसन बदल चुकी है बहुत करीब बह रही है सब कुछ सामान्य होने में कितना वक्त लगेगा ये कहना अभी मुश्किल है
Lead take from Jist · always check the original on YouTube
1 independents covering this
Summary
जो भर हैं जो दुकाने थी ये पूरा बाजार हुआ करता था मलवे में ढूंढ रहे हैं कि कुछ शायद जरूरत भर का मिल जाए
“जो भर हैं जो दुकाने थी ये पूरा बाजार हुआ करता था”From the report
जो भर हैं जो दुकाने थी ये पूरा बाजार हुआ करता था मलवे में ढूंढ रहे हैं कि कुछ शायद जरूरत भर का मिल जाए ये जो पूरा है ये अभी भी लूज बना हुआ है जिस दिन हम पहले दिन यहाँ नोवाकोट पहुँचे थे तब यहाँ पर आया नहीं जा सकता था अब जब पानी जो है वो नीचे पहुचा है और ये देखिए तो यहाँ थोड़ा चलने लायक हुआ है और लोग जो है वो अपने जो भर हैं, जो दुकाने थी, ये पूरा बाजार हुआ करता था, मलवे में ढूंढ रहे हैं कि कुछ शायद जरूरत भर का मिल जाए, और आप देखो कि दीवारों पर कितने बड़े बड़े पत्थर जो हैं, वो चिपके ये पथर एक एक पथर हटा के वो उस मलवे में कुछ सलाश करने की कोशिश बच्ची जो है वो कर रही है दूसरी तीसरी मंगल तक यहाँ पर देखिए क्या सबाही सैलाव ने मचाई हुआ इस वक्त जो है जो सेलाब छोड़कर गया है पीछे जो तबाही के निशान है यह सामान्य कब तक होंगे यह ठीक कब तक होंगे नोमाकोट की रसुआ की जो शक्ल है वो पहले जासी हो भी पाएगी या नहीं क्योंकि नदी अपना रास्ता बदल चुकी है बेसन बदल चुकी है बहुत करीब बह रही है सब कुछ सामान्य होने में कितना वक्त लगेगा ये कहना अभी मुश्किल है
Watch the original on YouTube — we don't rehost full video.