
Few independents covering this yet — worth a closer look.
Summary
74 वर्षी सुसीला स्रीवास्तो आज भी बच्चों को सिच्छा देने के लिए लगातार काम कर रही है और उनका मानना है कि एक सिच्छक का काम सिर्फ कुरसी पर बैठ कर पढ़ाना नहीं बल्कि बच्चों के बीट जाकर उनके साथ बैठ कर और प्यार से उन्हें समझाना है।
From the report
कहते हैं सिच्छक कभी रिटायर नहीं होता अयोध्या की सुसीला स्रीवास्तो इसकी मिसाल है पेड़ी बजार की रहने वाली 74 वर्षी सुसीला स्रीवास्तो आज भी बच्चों को सिच्छा देने के लिए लगातार काम कर रही है खास बात यह है कि वो किसी कोचिंग सेंटर या बड़े संस्तान में नहीं बलकि जरूरत मंद बच्चों के घर जाकर उन्हें पढ़ाती है उनका मानना है कि एक सिच्छक का काम सिर्फ कुरसी पर बैठ कर पढ़ाना नहीं बल्कि बच्चों के बीट जाकर उनके साथ बैठ कर और प्यार से उन्हें समझाना है। 46 46 15 इसके अलावा सिक्षा और पुलिस विभाग से भी जूड़ी रही पारिवारिक परिस्थितियों के कारण सरकारी नौकरी छोड़नी पड़ी लेकिन बच्चों को पढ़ाने का उनका जुनून आज भी जारी है आज वो जरूरतमंद बच्चों को प्रतिदिन करीब दो घंटे समय देती हैं परिवार अपनी इच्छा से कुछ सुलक दे दे तो सविकार कर लेती है लेकिन पढ़ाने के बदले कोई तैपिस या मांग नहीं करती श्कूल ने अमल ने पढ़ाए जाला पसाद ने पढ़ाए वजना के भाई गुर्णानक पढ़ाए लेकिन एक बात यह थी कि घर के तरीयार से हम एकदम तथ होकर हमने छोड़ दिया आपकी क्या टाइमिंग होती है मतलब कितने वजह से कितने वजह तक का 6 10 10 खुले जो दूसरे नहीं लेते नहीं कहते चैनल सब्सक्राइब सब्सक्राइब अब आपको मैं प्रग्राइब समझ आता है आपको कब से पढ़ रहे हो ना है बच्चों को अच्छे से समझाती हैं पढ़ाती है अच्छा लगता है कि गुरु को पढ़ाना चाहिए उसी तरह पढ़ाती उसी तरह समझाते हैं कितने बच्चे यहां पर पढ़ते हैं अगर मैं की बात की जाए उनके द्वारा इनके यहां पर जब पढ़ाने आई थी तो एकी बच्चे को पढ़ा रही थी जिसे हमारे रूम पर तो इसे मारा भी इंट्रोडक्शन हुआ तो हुआ है तो उसने हम …
Lead take from Khabar Lahariya · always check the original on YouTube
1 independents covering this
Summary
74 वर्षी सुसीला स्रीवास्तो आज भी बच्चों को सिच्छा देने के लिए लगातार काम कर रही है और उनका मानना है कि एक सिच्छक का काम सिर्फ कुरसी पर बैठ कर पढ़ाना नहीं बल्कि बच्चों के बीट जाकर उनके साथ बैठ कर और प्यार से उन्हें समझाना है।
“एक सिच्छक का काम सिर्फ कुरसी पर बैठ कर पढ़ाना नहीं बल्कि बच्चों के बीट जाकर उनके साथ बैठ कर और प्यार से उन्हें समझाना है।”From the report
कहते हैं सिच्छक कभी रिटायर नहीं होता अयोध्या की सुसीला स्रीवास्तो इसकी मिसाल है पेड़ी बजार की रहने वाली 74 वर्षी सुसीला स्रीवास्तो आज भी बच्चों को सिच्छा देने के लिए लगातार काम कर रही है खास बात यह है कि वो किसी कोचिंग सेंटर या बड़े संस्तान में नहीं बलकि जरूरत मंद बच्चों के घर जाकर उन्हें पढ़ाती है उनका मानना है कि एक सिच्छक का काम सिर्फ कुरसी पर बैठ कर पढ़ाना नहीं बल्कि बच्चों के बीट जाकर उनके साथ बैठ कर और प्यार से उन्हें समझाना है। 46 46 15 इसके अलावा सिक्षा और पुलिस विभाग से भी जूड़ी रही पारिवारिक परिस्थितियों के कारण सरकारी नौकरी छोड़नी पड़ी लेकिन बच्चों को पढ़ाने का उनका जुनून आज भी जारी है आज वो जरूरतमंद बच्चों को प्रतिदिन करीब दो घंटे समय देती हैं परिवार अपनी इच्छा से कुछ सुलक दे दे तो सविकार कर लेती है लेकिन पढ़ाने के बदले कोई तैपिस या मांग नहीं करती श्कूल ने अमल ने पढ़ाए जाला पसाद ने पढ़ाए वजना के भाई गुर्णानक पढ़ाए लेकिन एक बात यह थी कि घर के तरीयार से हम एकदम तथ होकर हमने छोड़ दिया आपकी क्या टाइमिंग होती है मतलब कितने वजह से कितने वजह तक का 6 10 10 खुले जो दूसरे नहीं लेते नहीं कहते चैनल सब्सक्राइब सब्सक्राइब अब आपको मैं प्रग्राइब समझ आता है आपको कब से पढ़ रहे हो ना है बच्चों को अच्छे से समझाती हैं पढ़ाती है अच्छा लगता है कि गुरु को पढ़ाना चाहिए उसी तरह पढ़ाती उसी तरह समझाते हैं कितने बच्चे यहां पर पढ़ते हैं अगर मैं की बात की जाए उनके द्वारा इनके यहां पर जब पढ़ाने आई थी तो एकी बच्चे को पढ़ा रही थी जिसे हमारे रूम पर तो इसे मारा भी इंट्रोडक्शन हुआ तो हुआ है तो उसने हम …
Watch the original on YouTube — we don't rehost full video.