
Summary
वाराणसी में पहला पसू सवदागरी बनाया गया है, लेकिन इसका निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
From the report
वाराणसी में पहला पसू सवदागरी बनाया गया है। साल 2022 में एनोसी मिलने के बाद इसका निर्माण कारे तेजी से शुरू हुआ था। और 2022 में ही इसका धांचा और मसीने भी स्थापित हो गई थी। थी इस इलेक्ट्रानिक पसूर सोधागरी पर लगभग 2.24 करोण रुपई की लागत आई थी और यह 0.01 जाएगा यह पर तैयार किया गया है मौरानी तो यह मैदान है वह रखेता है तो यह जाने के लिए कैसे ले जाते हैं यहां वह सब बदबू देते रहते हैं उसी तरह सड़कर गल जाते हैं सब कुट्टे हैं सिया रखा जाते हैं कि मकसद है कि मृत्यक पसुओं का वैधानिक तरीके से निस्तारण हो सके जिससे गाउ में गंदकी और बीमारी ना आई जाएं लेकिन निर्माण काय में कई साल बाद भी यहां पसु सवधाग्रही अभी तक शुरुआत ही नहीं हुई कि अच्छा हो जाएगा बन जाएगा तो जो गोरु सुरु महक रहे हैं हड्डी मड्डी जा रहे हो सुत जान बचेगा खाना पिना नहीं खी फा जाता है लोग लगे पज़ेल फेक देते हैं
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Summary
वाराणसी में पहला पसू सवदागरी बनाया गया है, लेकिन इसका निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
“मृत्यक पसुओं का वैधानिक तरीके से निस्तारण हो सके जिससे गाउ में गंदकी और बीमारी ना आई जाएं।”From the report
वाराणसी में पहला पसू सवदागरी बनाया गया है। साल 2022 में एनोसी मिलने के बाद इसका निर्माण कारे तेजी से शुरू हुआ था। और 2022 में ही इसका धांचा और मसीने भी स्थापित हो गई थी। थी इस इलेक्ट्रानिक पसूर सोधागरी पर लगभग 2.24 करोण रुपई की लागत आई थी और यह 0.01 जाएगा यह पर तैयार किया गया है मौरानी तो यह मैदान है वह रखेता है तो यह जाने के लिए कैसे ले जाते हैं यहां वह सब बदबू देते रहते हैं उसी तरह सड़कर गल जाते हैं सब कुट्टे हैं सिया रखा जाते हैं कि मकसद है कि मृत्यक पसुओं का वैधानिक तरीके से निस्तारण हो सके जिससे गाउ में गंदकी और बीमारी ना आई जाएं लेकिन निर्माण काय में कई साल बाद भी यहां पसु सवधाग्रही अभी तक शुरुआत ही नहीं हुई कि अच्छा हो जाएगा बन जाएगा तो जो गोरु सुरु महक रहे हैं हड्डी मड्डी जा रहे हो सुत जान बचेगा खाना पिना नहीं खी फा जाता है लोग लगे पज़ेल फेक देते हैं
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