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Summary
छत्तीसगढ़ में अपराध बढ़ रहा है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि बेरोजगारी, नशा या राजनीतिक संरक्षण। सरकार को नशे पर कार्रवाई बढ़ानी चाहिए और युवाओं के लिए रोजगार, खेल और स्किल ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं बढ़ानी चाहिए।
From the report
पुलीज समय-समय पर आरोपियों के खिलाफ कारबाही भी करती है, जुलूस निकालती है, चेतावनी भी दी जाती है, और गिरफ्तारी भी होती है, लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ जुलूस निकालने से अपराद रुख जाएगा? कुछ लोगों का आरोप है कि कई अपराधियों को राजनेतिक सररक्षन भी मिला हुआ है जिसकी वज़ा से कई बार पुलीस के हाथ बंधे दिखाई देते हैं वहीं विशेशग्य मानते हैं कि बेरोजगारी भी अपराध को बढ़ाने में सबसे बड़ी वज़ा है आज छतिसगड के कई युवा रोजगार की तलास में दूसरे राज्यों तक पलायन करते हैं जब युवाओं के पास काम नहीं होता, जब खेल के मैदान खाली होने लगते हैं जब बाचीत की जग़ा गुस्सा सामने आता है, तब कई युवा गलत संगत और अपराद की दुनिया की उर बढ़ जाते हैं अब सवाल सिर्फ अपराद रोखने का नहीं सवाल युवाओं को सही दिसा देने का भी है क्या सरकार को नशे पर और सक्ती बढ़ानी चाहिए क्या युवाओं के लिए रोजगार, खेल और स्किल ट्रेनिंग जैसे सुविधाएं बढ़ाने की जरुवत है क्या अब परिवार और समाज को भी इस मुद्दे पर खुलकर बात करने की जरुवत है
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Summary
छत्तीसगढ़ में अपराध बढ़ रहा है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि बेरोजगारी, नशा या राजनीतिक संरक्षण। सरकार को नशे पर कार्रवाई बढ़ानी चाहिए और युवाओं के लिए रोजगार, खेल और स्किल ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं बढ़ानी चाहिए।
“क्या सिर्फ जुलूस निकालने से अपराद रुख जाएगा?”From the report
पुलीज समय-समय पर आरोपियों के खिलाफ कारबाही भी करती है, जुलूस निकालती है, चेतावनी भी दी जाती है, और गिरफ्तारी भी होती है, लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ जुलूस निकालने से अपराद रुख जाएगा? कुछ लोगों का आरोप है कि कई अपराधियों को राजनेतिक सररक्षन भी मिला हुआ है जिसकी वज़ा से कई बार पुलीस के हाथ बंधे दिखाई देते हैं वहीं विशेशग्य मानते हैं कि बेरोजगारी भी अपराध को बढ़ाने में सबसे बड़ी वज़ा है आज छतिसगड के कई युवा रोजगार की तलास में दूसरे राज्यों तक पलायन करते हैं जब युवाओं के पास काम नहीं होता, जब खेल के मैदान खाली होने लगते हैं जब बाचीत की जग़ा गुस्सा सामने आता है, तब कई युवा गलत संगत और अपराद की दुनिया की उर बढ़ जाते हैं अब सवाल सिर्फ अपराद रोखने का नहीं सवाल युवाओं को सही दिसा देने का भी है क्या सरकार को नशे पर और सक्ती बढ़ानी चाहिए क्या युवाओं के लिए रोजगार, खेल और स्किल ट्रेनिंग जैसे सुविधाएं बढ़ाने की जरुवत है क्या अब परिवार और समाज को भी इस मुद्दे पर खुलकर बात करने की जरुवत है
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