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अतरहाट गांव के लोगों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि पुलिया बनाने की मांग करते हैं लेकिन वादा भी किया जाता है जीत जाने के बाद फिर ध्यान नहीं दिया जाता है।
From the report
कि अ कि अ अशाह वंशा कि बारों महिला यह लगड़ी का पुल बनाकर लोग निगनने के लिए मजबूर होते हैं लोगों का यह भी अरोप है कि जब गराम पंचायत का चुनाव आता है तब प्रदान ओट मांगने आते हैं तब हम लोग पुलिया बनाने की मांग करते हैं तब वादा भी किया जाता है जीत जाने के बाद फिर किसी तरह का ध्यान नहीं दिया जाता है इस बार लोग कह रहे हैं कि जब गरम पंचायत का चुनाव आएगा विचार के रुम हो आसुन है बड़ा जाती है तो बारों महीना से लोग निकलते हैं 12 महीना इसलिए खास करके कौन महिने में दिक्कत आती है? बते ही बारिस वाले मां बारिस वाले मां वाली ज़्यादा है, अब तो महमूलिया मानी कर जाता है अजय को अब बतात रहें कि मजबूरी है, ना तो पाइप डरा दे, पुलिया बनवा दे, खरंजा डरा दे तो नदिक्कताता यह मजबूरी है वो किसी तरह लकड़ी का पुल बना के अपना जो यहां निकलते हैं ढश्टा बनाकर किसी तरह अभी पैसानी को है खास करके कौन महीने में दिक्कताती है? बस ज़्यादा करके यह जो पुल बनाये हैं बस यह चार महीने जैसे छोटे बच्चे हैं उनको क्या डेर बना रहा है? कितने साल से निकर रहे हैं? अरेब करेब 15-20 साल हो गई घटना हो जाती जैसे ध्याव जुक गए यहां को वहां घुस गा पाँ तो वहीं मालूल हो जाती है खास कर के छोटे बच्चों को क्या दिक्कत आती है? बहुत दिक्कत आओ थी छोड़ु बच्चा निकल नहीं आओते. निकालते हैं उन्हें? उन्हें निकारे जाते हैं, चेरटी जैसे पाले हैं, उनका कान पकर कर बहल निकारे थें, लई जाते हैं. प्रदान में नहीं आगे लगते हैं। हाथ नहीं करते हैं मесьका भारत कहते दिया है की वक्त कि चिनाव की बात होगा मया Jetzt failed to vote, now they will vote for me She hasn't thought…
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Summary
अतरहाट गांव के लोगों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि पुलिया बनाने की मांग करते हैं लेकिन वादा भी किया जाता है जीत जाने के बाद फिर ध्यान नहीं दिया जाता है।
“मजबूरी है, ना तो पाइप डरा दे, पुलिया बनवा दे, खरंजा डरा दे तो नदिक्कताता यह मजबूरी है।”From the report
कि अ कि अ अशाह वंशा कि बारों महिला यह लगड़ी का पुल बनाकर लोग निगनने के लिए मजबूर होते हैं लोगों का यह भी अरोप है कि जब गराम पंचायत का चुनाव आता है तब प्रदान ओट मांगने आते हैं तब हम लोग पुलिया बनाने की मांग करते हैं तब वादा भी किया जाता है जीत जाने के बाद फिर किसी तरह का ध्यान नहीं दिया जाता है इस बार लोग कह रहे हैं कि जब गरम पंचायत का चुनाव आएगा विचार के रुम हो आसुन है बड़ा जाती है तो बारों महीना से लोग निकलते हैं 12 महीना इसलिए खास करके कौन महिने में दिक्कत आती है? बते ही बारिस वाले मां बारिस वाले मां वाली ज़्यादा है, अब तो महमूलिया मानी कर जाता है अजय को अब बतात रहें कि मजबूरी है, ना तो पाइप डरा दे, पुलिया बनवा दे, खरंजा डरा दे तो नदिक्कताता यह मजबूरी है वो किसी तरह लकड़ी का पुल बना के अपना जो यहां निकलते हैं ढश्टा बनाकर किसी तरह अभी पैसानी को है खास करके कौन महीने में दिक्कताती है? बस ज़्यादा करके यह जो पुल बनाये हैं बस यह चार महीने जैसे छोटे बच्चे हैं उनको क्या डेर बना रहा है? कितने साल से निकर रहे हैं? अरेब करेब 15-20 साल हो गई घटना हो जाती जैसे ध्याव जुक गए यहां को वहां घुस गा पाँ तो वहीं मालूल हो जाती है खास कर के छोटे बच्चों को क्या दिक्कत आती है? बहुत दिक्कत आओ थी छोड़ु बच्चा निकल नहीं आओते. निकालते हैं उन्हें? उन्हें निकारे जाते हैं, चेरटी जैसे पाले हैं, उनका कान पकर कर बहल निकारे थें, लई जाते हैं. प्रदान में नहीं आगे लगते हैं। हाथ नहीं करते हैं मесьका भारत कहते दिया है की वक्त कि चिनाव की बात होगा मया Jetzt failed to vote, now they will vote for me She hasn't thought…
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