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वाराणसी में पहला पसु सवधागरे बनाया गया है लेकिन अभी तक वो चालू नहीं हुआ है क्योंकि पसु सवधागरे 2022 का बनाया गया 2026 आ गया पर अभी तक एक भी सव नहीं जले है
From the report
वाराणसी में पहला पसु सवधागरे बनाया गया है लेकिन अभी तक वो चालू नहीं हुआ है क्योंकि पसु सवधागरे 2022 का बनाया गया 2026 आ गया पर अभी तक एक भी सव नहीं जले है जिसको कब्रेज के लिए मैं गाउं पहुची हूँ और काफी दूर भी है सड़क से और यहां की जो तस्पीर है आप देख सकते हैं कि पूरी तरह से सिर्फ सननाटा ही सननाटा है चारो तरप जंगली जंगल के बीच बनाया गया है और मैं यहाँ पे अब इस रोड से चल रही हूँ क्योंकि आगे पसू सौधागरी है और वहाँ पे चलते है देखते हैं कि आफिर स्थिति क्या है पिर आस पास के जिस मिन उद्देश चे बनाया गया है हम यहाँ के लोगों से भी जानते हैं क्योंकि अगर ये बनाया गया है तो इसलिए कि ग्रामिडों जो खुले में पसू को फेकते थे, महकते थे, बिमारी फैलते थी उस बिमारी को खत्रा को रोकने के लिए लेकिन वाराडशी में पहला एक ऐसा सोधाग्रह बनाया किया है तो क्या इस्तिति है कि उन्हें फिकाने से मादान में ही तक ले ले जाने के लिए कैसे ले जाते हैं ट्रक टक और थे यह वह आप आप यह करें नहीं जाएगा लुटे थी अजय को अजय को अजय को अजय को कि अधिक तरह देख रहें मैदान पर यहां वह सब बद्बू देते रहते हैं उसी तरह चल कर जाते हैं सब कुट्टे हैं नदी लाले बंध हो गया है ना अब तो आप सब्सक्राइब सब्सक्राइब और दोजार बाइस में इसका धांचा और मसीने भी स्थापित गई थी इस इलेक्ट्रानिक पसूर सोधागरी पर लगभग 2.24 करूण रूपए की लागत आई थी और यह 0.01 180 सबसे जदी किस मौसम में दिक्कत होती है देदी? जैसे गर्मी में बर्शात मिल गया थंडी में तो नहीं समझने आता है गर्मी में अगल पकल के पूरा कड़का भी महतरा है वो तो सड़ जाते तो अगल महतरा है मकसद है कि मृत्यक पसुओं का वैध…
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वाराणसी में पहला पसु सवधागरे बनाया गया है लेकिन अभी तक वो चालू नहीं हुआ है क्योंकि पसु सवधागरे 2022 का बनाया गया 2026 आ गया पर अभी तक एक भी सव नहीं जले है
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वाराणसी में पहला पसु सवधागरे बनाया गया है लेकिन अभी तक वो चालू नहीं हुआ है क्योंकि पसु सवधागरे 2022 का बनाया गया 2026 आ गया पर अभी तक एक भी सव नहीं जले है जिसको कब्रेज के लिए मैं गाउं पहुची हूँ और काफी दूर भी है सड़क से और यहां की जो तस्पीर है आप देख सकते हैं कि पूरी तरह से सिर्फ सननाटा ही सननाटा है चारो तरप जंगली जंगल के बीच बनाया गया है और मैं यहाँ पे अब इस रोड से चल रही हूँ क्योंकि आगे पसू सौधागरी है और वहाँ पे चलते है देखते हैं कि आफिर स्थिति क्या है पिर आस पास के जिस मिन उद्देश चे बनाया गया है हम यहाँ के लोगों से भी जानते हैं क्योंकि अगर ये बनाया गया है तो इसलिए कि ग्रामिडों जो खुले में पसू को फेकते थे, महकते थे, बिमारी फैलते थी उस बिमारी को खत्रा को रोकने के लिए लेकिन वाराडशी में पहला एक ऐसा सोधाग्रह बनाया किया है तो क्या इस्तिति है कि उन्हें फिकाने से मादान में ही तक ले ले जाने के लिए कैसे ले जाते हैं ट्रक टक और थे यह वह आप आप यह करें नहीं जाएगा लुटे थी अजय को अजय को अजय को अजय को कि अधिक तरह देख रहें मैदान पर यहां वह सब बद्बू देते रहते हैं उसी तरह चल कर जाते हैं सब कुट्टे हैं नदी लाले बंध हो गया है ना अब तो आप सब्सक्राइब सब्सक्राइब और दोजार बाइस में इसका धांचा और मसीने भी स्थापित गई थी इस इलेक्ट्रानिक पसूर सोधागरी पर लगभग 2.24 करूण रूपए की लागत आई थी और यह 0.01 180 सबसे जदी किस मौसम में दिक्कत होती है देदी? जैसे गर्मी में बर्शात मिल गया थंडी में तो नहीं समझने आता है गर्मी में अगल पकल के पूरा कड़का भी महतरा है वो तो सड़ जाते तो अगल महतरा है मकसद है कि मृत्यक पसुओं का वैध…
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