Part of a cluster — open full story hub

Summary
हरिद्वार में कावड यात्रा के बाद 7000-8000 टन वेस्ट की समस्या, जिसमें प्लास्टिक शीट्स, डिसकार्डिड कपड़े, प्लास्टिक बॉटल्स, स्लीपर्स और अन्य कच्रा शामिल है।
From the report
सावन के महीने में हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखो करोडो शद्धालू हरिद्वार पहुँचते हैं वज़े है कावड यात्रा लेकिन इतनी बड़ी धार्मिक यात्रा का असर सिर्फ घाटो और सडको पर दिखने वाली भीर तक सीमित नहीं रहता कुछी दिनों के लिए किसी भी शहर की पॉपिलेशन अचानक कई गुना बढ़ जाए तो उसके रोड्स, पार्किंग, टॉयलेट, सेनिटेशन और वेस्ट मानेजमेंट सिस्टम हर चीज की केपासिटी टेस्ट होती है 30 जुलाई 2026 से शुरू हुई इस साल की कावड यात्रा 11 अगस्त को खत्म हुई करीब 14 दिनों तक हरिदवार में करोडों कावड यात्री पहुँचे और उनके लोटने के बाद शहर के सामने अब एक नई चुनौती हजारों टन वेस्ट को साफ करना है मीडिया रिपोर्ट के मताबिक इस साल करीब 4.8 करोड कावड यात्री हरिदवार पहुँचे वही यात्रा खत्म होने के बाद करीब 7000 से 8000 मेट्रिक टन वेस्ट होने की बाद सामने आई है अब सवाल यह है कि आखिर इतना कच्रा आया कहां से क्या इसका एक बड़ा कारण किसी शहर की कपासिटी से कहीं गुना जादा लोगों का कुछी दिनों में वहाँ पहुँचना है या फिर इसमें लोगों के सिविक सेंस की भी भूमी का है और सबसे जरूरी इतने बड़े क्राउड को संभालने के लिए एड्मिनिस्ट्रेशन की कितनी तयारी थी इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से समझते हैं हाई मैं हूँ प्रगती और आप देख रहे हैं जिस्ट अगर पिछले कुछ सालों का डेटा देखे तो हरिदवार में कावड यातरियों की संख्या लगतार बढ़ी है 2023 में करीब 4.07 करोड, 2024 में 4.14 करोड और 2025 में करीब 4.52 करोड कावड यातरी यहां पहुंचे थे इस साल ये संख्या बढ़ कर करीब 4.8 करोड बताई जा रही है यानि फूटफॉल लगातार बढ़ रहा है और जैसे जैसे फूटफॉल बढ़ता है वैसे वैसे शेहर के इंफरस्ट्रक्चर पर प्रेशर भी बढ़ता है इस साल के वेस्ट आकडे को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग नंबर्स मिलते हैं India Today ने Municipal Official के हवाले से करीब 7,000 metric ton waste collect होनी की बात कही है वहीं Times of India ने Haridwar Municipal Corporation के Nandan Kumar के हवाले से करीब 8,000 metric ton waste collect होनी की report की है 8,000 metric ton कच्रा यानी करीब 80,000,000 किलो कच्रा National Mission for Clean Ganga यानी NMCG के Waste Management Framework में भी Source Segregation Collection Transportation Designated Disposable 7000 8000 7000 इसका डीटेल ब्रेकअप फिलाल पबलिक नहीं किया गया है तो आखिर ये कच्रा आया कहां से और 7000-8000 टन वेस्ट में क्या था मीडिया रिपोर्ट्स के मताबी क्लीनप के दोरान बड़ी मात्रा में प्लास्टिक शीट्स, डिसकार्डिड और गंदे कपड़े, प्लास्टिक बॉटल्स, स्लीपर्स और कुछ दूसरे तरह का कच्रा मिला कुछ reports में food waste और roten food का भी जिक्र है वही कुछ changing rooms में ऐसी bottles मिलने की बात सामने आई जिनने reports में urine containing bottles बताया गिया है यानि यहां सिर्फ plastic का कच्रा नहीं था लोगों के इस्तमाल के बाद छोड़े गए कपड़े, footwear, bottles, खाने पीने से जुड़ा waste और दूसरी डिसकार्डिड चीजे भी क्लीन अप का हिस्सा थी कुछ जगाओं पर ये कच्रा सिर्फ रोड्स या मार्किट तक सीमित नहीं था यानि जिस इलाके में इतनी बड़ी संख्या में लोग कुछ जिनों तक लगतार आते जाते रहे वहां हर तरफ सेनिटेशन सिस्टम पर प्रेशर पड़ा हरिदवार मुनिसिपल कॉर्पोरेशन के मताबिक इस वेस्ट में प्लास्टिक शीट्स, डिसकार्डिड कपड़े और दूसरे मटीरियल शामिल थे और सफाई पूरे कावड मेला एरिया में की गई थी गंगा के घाट और आसपास के एरिया भी सफाई अभियान का हिस्सा थे इसलिए नदी और उसके आसपास वेस्ट मानेजमेंट को लेकर कंसर्न जरूर है लेकिन अवेलेबल रिपोर्ट्स के आधार पर ये दावा नहीं किया जा सकता कि 8000 टन में से इतना हिस्सा सीधे गंगा में पहुँचा लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि गंगा को लेकर कोई concern नहीं है क्योंकि जब इतनी बड़ी मातरा में waste घाट और river के आसपास generate होता है तो उसका कुछ हिस्सा पानी या रिवर बैंक तक पहुँचने का रिस्क जरूर रहता है और हरिद्वार में एक concern इसलिए भी जादा महतपूर है क्योंकि यहां आने वाले करोडों लोग गंगा से जल लेने आते हैं अब सवाल है कि आखिर इतना waste generate हुआ कैसे इसका पहला कारण है लोगों का इतनी बड़ी संख्या में एक साथ पहुँचना इस साल 14 दिनों में करीब 4.8 करोड कावडियाज हरिद्वार पहुँचे यानि ये कोई एक दिन का इवेंड नहीं था लगतार दो हफ्तों तक लोगों की आवजाई बनी रही सिर्फ 10 आउगस्ट को ही करीब तरे 60.6 लाग कावडिया के हर इद्वार पहुँचने की बात सामने आई ये लोग सिर्फ आते जाते नहीं हैं इन्हें खाना चाहिए, पानी चाहिए, टॉयलेट चाहिए, रेस्टिंग स्पेसेज चाहिए, पार्किंग चाहिए यानि जितनी जादा human activity होगी उतना ही जादा waste भी generate होगा waste pressure 2000 metric ton waste collect capacity 2000 जब हम कहते हैं कि किसी शहर में capacity से ज़ादा लोग आ गए, तो इसका मतलब यह नहीं होता कि शहर की कोई fixed limit है, और उसके बाद वहाँ लोगों का आना officially possible नहीं है. यहाँ capacity से मतलब है कि शहर का existing infrastructure कितने बड़े pressure को efficiently संभाल सकता है. जैसे किसी शहर में सामाने दिनों में जितने लोग रहते हैं उसे हिसाब से रोड्स बनी होती है पार्किंग की जरूरत होती है, पबलीक टॉयलेट्स होते हैं, गारबिज कलेक्शन का सिस्टम होता है और सैनिटेशन वरकर्स की संख्या तै होती है लेकिन जब कुछी दिनों में करोडों लोग पहुँच जाए तो इन सभी सिस्टम्स पर एक्स्टर प्रेशर आता है और यही हरिदवार में भी हुआ अब यह भी समझना ज़रूरी है कि एडमिनिस्ट्रेशन को इस क्राउड का अंदाजा पहले से था कावड यात्रा कोई अचानक होने वाला इवन नहीं है हर साल इसके लिए पहले से प्लानिंग होती है इस साल भी अथॉरिटीज ने क्राउड मैनेज्मेंट, ट्राफिक मैनेज्मेंट, सिक्योरिटी और सैनिटेशन के लिए अलग-अलग अरेंज्मेंट्स किये थे एक्स्ट्रा सैनिटेशन वरकर्स लगाए गए थे गारबिज कलेक्शन के लिए वीकल डिपलॉय किये गए अलग-अलग एरियाज में क्लीनिंग टीम्स लगाए गए और यात्रा के दोरान सफाई को मॉनिटर करने के लिए टेकनोलॉजी का भी इस्तेमाल किया गया. लेकिन क्या तैयारी क्राउड के स्केल के हिसाब से परियाब थी? क्योंकि अगर किसी जगा पर लाखों लोग एक साथ मौजूद है और एक डस्ट बिन कुछ ही मिन्टों में भर जाता है तो सिर्फ dust bin लगाना काफी नहीं है अगर toilets बनाए गए हैं तो उनकी लगातार cleaning और maintenance भी करनी होगी अगर food stalls और temporary markets हैं तो उनके waste की अलग व्यवस्था करनी होगी और अगर गंगा के आसपास इतनी बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं तो वहाँ waste को पानी तक पहुँचने से रोकने के लिए additional monitoring भी जरूरी होगी अब यहां responsibility का दूसरा हिस्सा आता है public की responsibility क्योंकि हम ये मान ले कि करोड़ों लोगों के आने से कच्रा होना unavoidable होगा तो भी ये सवाल रहेगा कि उस कच्रे का क्या किया जाएगा एक plastic bottle सिमाल करने के बाद उसे सड़क पर छोड़ देना और फिर ये कहना कि सफाई के लिए municipality है ये civic sense नहीं है इसी तरह खाने का packet, कपड़े, slippers या कोई दूसरा सामान सिमाल के बाद भी उसे वही छोड़ देना भी public space के प्रती जिम्मेदारी नहीं है और यही छोटी-छोटी चीजें जब लाखों लोग करते हैं तो final waste figure हजारों tons तक पहुँच जाता है civic sense cleanliness responsibility dustbin dustbin proper disposable जरूर है तो वेस्ट को वहां तक लेकर जाना और सबसे जरूरी नदी घाटीय सड़क को डंपिंग राउंड ना समझना लेकिन यह एडमिनिस्ट्रेशन की भी रिस्पॉन्सिबिलिटी उतनी ही जरूरी है अगर करोड़ों लोग आने वाले हैं तो परियाप्त थे उन्हें चाहिए उन डसट विंस को समय पर एमटी करने की व्यवस्था होनी चाहिए वेस्ट कलेक्शन वीहाट आसानी से पहुंच सके इसके लिए रूट्स प्लान होने चाहिए और सबसे जरूरी कलेक्टेड वेस्ट को सिर्फ एक जगह जमा करने की जाए उसे सेग्रीगेशन और प्रोसेसिंग भी उतनी ही जरूरी है अब बात करते हैं गंग के इंवायमेंटल इंपैक्ट की हरिदवार में कावड यात्र का सबसे बड़ा कनेक्शन ही गंगा से है करोड़ों शद्धालू यहां गंगा जल लेने आते ऐसे में यात्रा के दोरान घार्ट्स और रिवर्स के आसपास कच्रा बढ़ता है तो बात सिर्फ शहर के सफाई तक सीमित नहीं रहती इसका असर नदी और आसपास के इन्वायमेंट पर भी पढ़ सकता है इसके साथ एक और बड़ा सवाल सामने आता है कि क्या हमारे शहर ऐसी temporary population को संभालने के लिए तैयार है क्योंकि किसी भी शहर की planning सिर्फ उसकी permanent population को देखकर नहीं हो सकती भारत में हर साल ऐसे religious और cultural events होते हैं जिनके दोरान कुछी दिनों में किसी भी शहर में आने वाले लोगों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है इसलिए temporary population को भी urban planning का हिस्सा मानना होगा यानि पहले से calculate करना होगा कि कितने लोग peak days में पहुँच सकते हैं उनसे कितना waste generate होगा, कितने toilets और dust bins चाहिए, कितनी sanitation teams और garbage vehicles की जरुवत होगी और event खत्म होने के बाद उस waste को process करने की capacity कितनी है अगर इन चीजों की planning पहले से है और ground पर भी ठीक से implement होती है तब ही कहा जा सकता है कि इतने बड़े crowd को genuinely manage किया गया और इसमें पब्लिक की भूमी का भी उतनी ही जरूरी है जस गंगा से करोडो लोग आस्था के साथ जल लेने आते हैं उसके किनारे कच्रा ना छोड़ना भी उसी आस्था और जिम्मेदारी का हिस्सा होना चाहिए क्योंकि इतनी बड़ी gatherings को संभालने के लिए सिर्फ जादा roads, जादा toilets या जादा sanitation workers नहीं चाहिए एक तरफ मजबूत planning और infrastructure चाहिए तो दूसरी तरफ responsible public behavior आपको क्या लगता है कि इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चुनौती क्या है शहर का infrastructure, administration की planning या public का civic sense इस मुद्दे पर आप अपनी राय हमें कॉमेंट करके जरूर बताए देश जुनियर आपसे जुड़ी हर खबर के लिए देखते रहें जस्ट