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आज आपकी फीड पर भी ये विजुअल्स तो आही गए होंगे जिस बस्तर का नाम आते ही अब भी नकसलवाद शब्द पहले दिमाग में आता है वहाँ एक ऐसा फैशन शो हुआ जहां रैम पर सिर्फ कॉस्ट्यूम नहीं बलकि एक पूरी जिन्दगी का transformation नजर आया
“इन महिलाओं के लिए फैशन शो एक public statement था कि उनका past उनकी पूरी identity नहीं है”From the report
आज आपकी फीड पर भी ये विजुअल्स तो आही गए होंगे जिस बस्तर का नाम आते ही अब भी नकसलवाद शब्द पहले दिमाग में आता है वहाँ एक ऐसा फैशन शो हुआ जहां रैम पर सिर्फ कॉस्ट्यूम नहीं बलकि एक पूरी जिन्दगी का transformation नजर आया 7 अगस्त को National Handloom Day पर former women Maoist ने combat uniform और हथियारों की जगह local, kosha, silk और traditional handloom outfits पहने और ramp पर confidence के साथ walk किया ये वही महिलाएं हैं जिन्होंने अपनी जिन्दगी के कई साल Maoist movement के बीच गुजारे कभी jungle, encounter और और आम स्ट्रगल उनकी रियालिटी थी जो अब बदल गई है यह महिलाएं बसतर के रिहाबिलिटेशन सेंटर से आई थी इवेंट से पहले पार्टिसिपेंट्स ने रायपुर में एक हफ्ते के ट्रेनिंग और ग्रूमिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया पुमबई से आये एक प्रोफेशनल ट्रेनर ने उन्हें रैम्प वाकिंग, बॉडी लैंग्वेज और प्रेजेंटेशन की ट्रेनिंग दी इन मेंसे कई महिलाओं के लिए राइपूर का सफर भी पहली बार था इस fashion show का मकसद सिर्फ उन्हें ramp पर लाना नहीं था, ये एक symbolic step था ये दिखाने के लिए कि rehabilitation का मतलब सिर्फ surrender करना नहीं है, बलकि skills सीखना, livelihood बनाना, अपने पैरों पर खड़े होना और society में एक नई identity बनाना भी है. इन महिलाओं के लिए फैशन शो एक public statement था कि उनका past उनकी पूरी identity नहीं है जिन हाथों ने कभी बंदूकें उठाई थी आज वही हाथ अपने future को shape कर रही है