
Summary
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तो भर्ती प्रक्रिया बहुत देर से होती थी और कई बच्चों का पता नहीं चलता था। उन्होंने एक उदाहरण दिया कि जब वे हाई स्कूल में पढ़ते थे, तो बिहार एकजामनेक्शन बोर्ड बहुत देर से परिणाम घोषित करता था।
“बिहार के बच्चे बाहर में नियुक्त करते थे कुछ बच्चों का तो पता ही नहीं चलता”From the report
करना जब मैं यह वीडियो दिखाकर आपके लिए वह इस पेस्टली में सिख्षा के छेत्र में और भर्तियों के छेत्र में वहीं बात कर रहा हूं कि उसके बाद जो भर्तियों का जो परिक्रिया हुई वास्तव में आज हमें भी तकलीफ होता करके कि मैं एक उदाहरण बता दूं तो साथ समझ में और आ जाएगा आपको क्योंकि मैं तो बहुत दिनों तक मुख्यमंत्री रहा नहीं 28 मेनों तक थे मुख्यमंत्री मार्च में हमको याद नहीं है कौन तारीख हमको तरह सोलह सातरह इसी मार्च बढ़ गई फिर डोमिसाइल विवाद हो गया अब कोई विवाद हुआ विशय नहीं है लेकिन हम कह रहे कि उसमें आपके हैं तो मैं एक घटना बता रहा था जब भी हार एक साथ था तो आप लोग तो उसमें काफी बच्चे होंगे विभार में नहीं रहे होंगे यह भी हमको लगता है उससे में छोटे रहे होंगे हम लोग जब हाई स्कूल में पढ़ते थे यह 78-89 की में बात बता रहा हूं है तो उस समय बिहार एकजामनेक्शन बोर्ड एकजाम लेते थे तो बहुत लेट से होता थी बिहार के बच्चे बाहर में नियुक्त करते थे कुछ बच्चों का तो पता ही नहीं चलता तो रिजल्ट क्या है पास किया कि फेल्ट