
Summary
अगर आपका बच्चा भी लाल, पीली, हरी और नीली कैंटी देखकर के खुश होता है तो रुखिये उसे खरीदने से पहले एक बार उसके पीछे का लेबल पढ़के जरूर देखियेगा सवाल यह है कि आपकी डाइट में ये फूट कलर्स कितनी मात्रा में और किस क्वालिटी में होते हैं
“अगर आपका बच्चा भी लाल, पीली, हरी और नीली कैंटी देखकर के खुश होता है तो रुखिये उसे खरीदने से पहले एक बार उसके पीछे का लेबल पढ़के जरूर देखियेगा”From the report
अगर आपका बच्चा भी लाल, पीली, हरी और नीली कैंटी देखकर के खुश होता है तो रुखिये उसे खरीदने से पहले एक बार उसके पीछे का लेबल पढ़के जरूर देखियेगा सवाल यह है कि आपकी डाइट में ये फूट कलर्स कितनी मात्रा में और किस क्वालिटी में होते हैं हमने इस पर बात किया मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर सौम्या से उन्होंने बताया कि artificial food colors का इस्तमाल खाने को सिर्फ attractive बनाने के लिए किलिया जाता है कुछ बच्चों में hyperactivity और ध्यान केंद्रित करने की परिशानियां हो सकती है FSSAI भी सीमिक मात्रा में food colors को इस्तमाल करने की permission देता है लेकिन यहाँ पर समस्या सिब artificial food colors की नहीं है कई ultra processed food में चीनी, नमक और अस्वस्थ वासा की मात्रा अधिक पाई जाती है जिसका जादा सेवन मोटापा, diabetes और heart related issues को भी बढ़ावा दे सकता है तो अगली बार जब आपके बच्ची की नज़र किसी चमक्ती हुई चीज पर जाये, तो आपकी नज़र उसके पीछे लिखी हुए लेबल्स पर जानी चाहिए.