Part of a cluster — open full story hub

Summary
कोलकाता में एक अंजान साया ने 13 दिनों में 10 लोगों की हत्या की, जिनमें से 9 के सिर को पत्थर से कुचल दिया गया था। पुलिस ने कई थियोरी पर काम किया, जिनमें नाइट टेक्सी ड्राइवर और तंत्र साधना शामिल थे।
From the report
पुलिस हेडक्वार्टर के पास बने हरे स्क्रीट पुलिस टेशन का फोन बजूता है। फोन उठाने वाले ओन ड्यूटी ओफिसर को दूसरी तरफ से घबराई हुई अवाज में खबर मिलती है। कि बीबीडी बाग के दक्षिन पस्चिमी कोने में फुटपात पर एक महिला की लाश पड़ी है। पुलिस की जीपे तुरंत मौके पर पहुँचती है। वहाँ का नजारा देख कर खुद पुलिस वाले भी सन रह जाते हैं। मृतक महिला की पहचान 30 साल की अलेया बीबी के रूप में होती है, जो 3 महिने की गर्भवती थी और फुटपात पर रहकर अपनी जिन्दगी गुजार रही थी. फोरेंसिक टीम जब लाश की जाच करती है तो पता चलता है कि उसके शरीर पर न तो कपड़े फटे थे न कोई हाथापाई का निशान था और नहीं कोई चोरी हुई थी हत्यारे ने सिर्फ एक काम किया था पास में पड़ा हुआ लगभग 9 किलो का भारी कंक्रीट का पत्थर उठाया और अलेया बीबी के गहरी नीद में सोते समय उसकी खोपडी पर दे मारा सिर का दाहिना हिस्सा पूरी तरह पिस चुका था और उसकी मौके पर ही मौत हो गई आखिर वो कौन था और उसने ये हत्या क्यूं की सब जानेंगे आज के इस एपिसोड में नमस्कार मेरा नाम है सलोनी और आप देख रहे हैं जिस्ट क्राइम सीन इस घटना के बाद चुरवात में तो हरी स्ट्रीट पुलिस ठाने की पुलिस ने इसे फुटपात पर रहने वालों की आपस की लड़ाई या कोई मामूली जगडा मान कर फाइल बंद करने की कोशिश की लेकिन जब लाल बजार के जासूसों ने इस वारदात के तरीके को ध्यान से देखा तो उन्हें चार साल पहले की कुछ भयानक यादे ताजा हो गई जासूसों ने CID के पुरानी रिकोर्ड्स खंगा ले तो सामने आई मुंबई पुलिस की कुछ पुरानी केस फाइले असल में 1985 से लेकर 1988 के बीच मुंबई की सडकों पर भी बिलकुल ऐसा ही खौफनाक खेल खेला गया था मुंबई के सायन, किंग सरकल, माटुंगा, वडाला और लालबाग जैसे भीडभार वाले इलाकों में एक अंजान साया घुनता था वह रात 11 बजे से तड़के 4 बजे के बीच, फुटपात, दुकानों के छजों या ओवर ब्रिज के नीचे अकेले सो रहे बेघर लोगों को चुनता था। उसके पास अपना कोई हतियार नहीं होता था। वह सडक किनारे पड़े 20 से 30 किलो ग्राम के भारी कंक्रीट या ग्रेनाइट के पत्रों को उठा था और सोए हुए बेकसूर लोगों के सिर पर पटक देता था। लेकिन ये सब कतल क्यों हुए और किसने किये? जिनके पास ना तो कोई पहचान पत्र था और नहीं कोई रिष्टेदार जो उनकी लाश का दावा करने आता जब छे हत्याएं हो गई तब जाकर मुंबई पुलिस का ध्यान इस तरफ गया कि यह किसी एक ही सिर्फरे सीरियल किलर का काम है मुंबई की तफतीश में पुलिस के हाथ सिर्फ एक ही गवा लगा था अंधेरे में जान बचा कर भाग निकला। लेकिन जब पुलिस ने उससे कातिल का हुलिया पूछा तो उसने खौफ जदा होकर सिर्फ इतना बताया कि रात के घंगोर अंधेरे में उसे सिर्फ एक मजबूत कद काठी की परचाई दिखाई दी थी। चहरा देखना मुमकिन न बिखारी बनकर लेटने का ढूंढ भी किया लेकिन कातिल इतना शातर निकला कि वह पुलिस के हर जाल को माद देता रहा फिर अचानक 1988 के मध्या में मुंबई में ये कतल बंध हो गए पुलिस समझ ही नहीं पाए कि कातिल पकड़ा गया, मर गया या कहीं चला गया और अब ठीक एक साल बाद जून 1989 में वही खौफनाक तरीका कॉलकता की सडकों पर दोहराया जा रहा था अलया बीबी के कतल के बाद कॉलकता पुलिस अभी मामले को समझ ही रही थी कि ठीक डेड महीने बाद 19 जिलाई 1989 की रात को कातिल ने एक ही रात में दो वार करके पूरे शहर को थर्रा दिया पहला फोन तालतला पुलिस स्टेशन में बजा पार्क स्ट्रीट मेट्रो स्टेशन के गेट और जियोलॉजिक सर्वे अफ इंडिया के पास फुटपात पर एक 40 साल के अंजान आदमी की लाश मिली उसकी खोपडी पूरी तरह कुछली हुई थी अभी पुलिस उस जगह को सील कर ही रही थी कि मुची पाड़ा थाने से दूसरा मैसेज आया सियालदा रेलवे स्टेशन के सबवे के पास एक बेघर लड़के की लाश मिली थी उसका सिर भी पास पड़े एक भारी पत्थर से कुछला गया था अब किसी के पास कोई शक की गुणजाईश नहीं बची थी कॉलकता के अकबारों में रोज खौफनाक खबरे चपने लगी और मीडिया ने इस अंजान साये को नाम दिया दे स्टोन मैन जून से सितंबर 1989 के बीच महस सो दिनों के अंदर स्टोन मैन ने साथ संसनी खेज हत्याई कर डाली पार्क स्ट्रीट, कामाक स्ट्रीट मैदान और हावडा ब्रिज के आसपास का पूरा इलाका खौफ के साये में डूब गया 10 10 लाल बाजार पुलिस हेड़कॉर्टर में बैठकों का दोर शुरू हुआ कालीन पुलिस कमिशनर प्रसून मुखरजी और डिप्टी कमिशनर रचपाल सिंग के बीच चांच के तरीकों को लेकर मदभेद गहराने लगे डिप्टी कमिशनर रचपाल सिंग ने तो प्रेस कॉनफरेंस में लाचारी जताते हुए यहां तक कह दिया कि हमारे पास इसका कोई सुराग नहीं है। खुर्दरे और मिट्टी से सने पत्थरों के फिंगरप्रिंट्स निकालना उस दौर की टेकनॉलोजी के हिसाब से नामुनकिन थे जासुसों ने कतल की गुथ्थी सुलजाने के लिए अलग-अलग थियोरी पर काम करना शुरू कर दिया सबसे पहली थियोरी बनी नाइट टेक्सी ड्राइवर पुलिस को लगा कि कातिल इतनी तेजी से सेंटरल कॉलकता के अलग-अलग इलाकों में कैसे पहुंच जाता था सरूर वह खुद कोई टेक्सी चलाता है या किसी टेक्सी में सफर खरता है मुखबिरों ने खबर दी कि एक काली पीली टैकसी देर रात सुनसान इलाकों में मढराती दिखती है लाल बजार के अफसरों ने शेहर भर में नाके बंदी करके सैकडो टैकसीयों की तालाशी ली ड्राइवरों के रिकोर्ड खंगा ले और उनसे घंटो पूछताच की परीम सीन के आसपास संदिग्ध हालत में खूमता हुआ पाया गया था। लाल बजार के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट ने कली पाड़ा को हिरासत में ले लिया। लाल बजार के इंटेरोगेशन रूम में उससे दिन रात कड़ी पूछताच की गई। लेकिन कलीपडा के खिलाफ नहीं तो कोई चश्मदीद मिला, नहीं कोई खून सिसना कपडा और नहीं कोई फॉरेंसिक सबूत. कानून के मुताबिक महशक के अधार पर किसी को गरफतार रखना मुंकिन नहीं था इसलिए आखिरकार पुलिस को कलीपाडा को छोड़ना पड़ा जब कलीपाडा से भी कुछ नहीं निकला तो एक और डरावनी थ्योरी सामने आई तंत्र साधना और नरबली पुलिस ने जब कतल की तारिकों का पैटन निकाला तो देखा कि जादातर कतल मंगलवार या शनिवार की रात को हुए थे बंगाल के लोक रिवाजों में ये दोनों दिन देवी काली की पूजा और तांतरिक अनुष्ठानों के लिए बेहत खास माने जाते हैं शहर में अफ़वा फैल गई कि कोई सिर्फ रात तांतरिक सिध्धी पाने या अपनी किसी पुरानी बिमारी का इलाज करने के लिए बेघर लोगों की बली जड़ा रहा है कहा जाने लगा कि वह 13 या 21 लोगों की बली पूरी करके ही रुकेगा बीबीटी बाग जैसे हाई सेक्यॉरिटी प्रशासनिक इलाके में जहां पुलिस हेड क्वार्टर बिलकुल करीब था कोई आम इंसान इतनी सफाई से कतल करके कैसे गायब हो सकता था कातिल को पुलिस गश्ट की टाइमिंग, दो सिपाहियों की ड्यूटी बदलने का 10 मिनट का गैप और बिना बत्ती वाली अंधेरी गलियों का सटीक रास्ता पता था। कॉलकटा आया था कातल को किसी भी कीमत पर रंगे हाथो पकड़ने के लिए कॉलकटा पुलिस ने अपना सबसे बड़ा अंडर कवर ओपरेशन शुरू किया लाल बजार के जाबाज जासुसों के गंदे मैले कपड़े पहने, चेहरों पर राक और धूलमली और बिखारी और कबाड बीनने वाले बन कर मैदान, पाक स्ट्रीट और सियालदा के फुटपातों पर खुद लेट गए उनके फटे कमबलों के नीचे वॉकी टोकी और लोडिट हतियार छिपे होते थे लेकिन स्टोन मैन इतना शातर निकला कि जिस इलाके में पुलिस का भेस बदल कर बिछाया गया जाल होता वह उस इलाके में भटकता भी नहीं था वह हमेशा किसी दूसरे अंधेरे कोने को अपना निशाना बना लेता था दो महीने के सननाटे के बाद 29 जनवरी 1990 को स्टोन मैन ने अपना दस्वा शिकार किया और फिर आई 20 वरवरी 1990 की वह खौफनाक रात जब उसने अपने 11 कतल को अंजाम दिया लेकिन इस ग्यारवे कतल की जगह पर कातिल से एक बहुत बड़ी कलती हो गई कतल करने के बाद जब वह भाग रहा था तो उसका पैर शिकार के बहे हुए खून के पोखरे में पढ़ गया सुभा जब फोरेंसिक टीम मौके पर पहुची तो उन्हें जमीन पर लाल रंग में छपे 12 साफ पदचीन मिले बाएं पैर के 3 और दाहिने पैर के 9 निशान फोरेंसिक और एंथ्रोपोमेट्रिक विज्ञानिकों ने तुरंत निशानों का नाप लिया इस जान्च से दो बेहद एहम बाते साबित हुई पहली बात कातिल कोई बहुत लंबा चोड़ा आदमी नहीं था जैसा कि शहर की अफ़वाओ में कहा जा रहा था बलकि वह मध्यकद काठी का एक आम इंसान था और दूसरी सबसे बड़ी खोज यह थी कि उसके दाहीने पैर का अंगूठा सामान्य इंसान के अंगूठे से काफी ज्यादा लंबा था अब लाल बजार के पास कातिल की एक पक्की शारेरिक पहचान थी पुलिस ने पूरे शहर में संदिक्दों, रिक्षा चालकों और जेल में बंद अपराधियों के पैर नापने का अभियान चला दिया।