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Summary
मुंडे का तरीका बिलकुल अलग है उनकी पॉलिसी साफ है कि अगर गंभीर लापरवाही मिली तो बिना ढील किये लाइसेंच सस्पेंट कर दिया जाएगा इसी कड़े रुख ने पूरी इंडस्ट्री में हलचल पैदा कर दी है
“मुंडे का तरीका बिलकुल अलग है”From the report
एक अधिकारी की पहचान सिर्फ उसके पद से नहीं बलकि उस पद पर रहते हुए लिये गए फैसलों से बनती है तुकारा मुंडे का नाम महरास्ट्र में ऐसी ही सक्त और बेबाक प्रसासनिक कारवाई के लिए जाना जाता है अब महरास्ट्र FDA के कमिशनर के तौर पर उन्होंने फूट सेफटी के खिलाफ ऐसी कारवाई शुरू कर दी है जिसने बड़े होटेल्स, रेस्ट्रोंज और नामी संस्थानों तक को जाच के दाइरे में ला दिया है कुछी महीनों के भीतर हजारों ठिकानों की जाच, करोरों रुपे का असुरक्षित खाना जब्द और कई लाइसेंस सस्पेंड किये गए हैं सोचल मीडिया पर भी फोटोज ट्रेंड कर रही है जहां दावा किया जा रहा है कि होटल्स ने लाइसेंस सस्पेंड होने के डर से खाने में कलर मिलाना बंद कर दिया है तो ये मुंडे एफेक्ट क्या है और तोकाराम मुंडे के आने के बाद सिस्टम में ऐसा क्या बदल गया कि बदलाव अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है यही इस वीडियो में समझने की कोशिश करेंगे दमस्कार मेरा नाम वरुन है और आप देख रहे हैं जिस्ट महराश्ट FDA के कमिशनर का पद संभालने के बाद तुकारा मुंडे ने जिस तरह की कारवाई शुरू की उससे कुछी महिनों के भीतर पूरे राज का फूड सीफटी सिस्टम चर्चा का विशय बन गया मुंबई के मशूर नूर महमदी होटेल से लेकर दशको पुराने शालिमार रेस्ट्रॉ और मरीन लाइन्स के रुस्तम एंड कमपनी आईसक्रीन पालडर तक कई फेमस जगहों पर कारवाई हुई यहां तक कि क्रिकेट क्लब ओफ इंडिया, विलिंगडन स्पोर्ट्स क्लब और जुहू जिम खाने जैसे एलीट क्लब्स भी जाच के दाइरे में आ गए। फूड इस्टेबिलिश्मेंट की जांच हुई 165 लाइसेंस सस्पेंड किए गए और 55 करोड 72 लाख रुपए से जादा का अनसेफ फूड आइटम जब्द और नष्ट किया गया। लेकिन मुंडे का तरीका बिलकुल अलग है उनकी पॉलिसी साफ है कि अगर गंभीर लापरवाही मिली तो बिना ढील किये लाइसेंच सस्पेंट कर दिया जाएगा इसी कड़े रुख ने पूरी इंडस्ट्री में हलचल पैदा कर दी है दूसरा बड़ा बदलाव था बिना कोई सूचना दिये अचानक होने वाली छापे मारी रेस्ट्रोंट्स, होटेल्स, फूड मेनुफाक्चरर्स, होल सेलर्स और रीटेलर्स हर सेक्टर में टीमें अचानक पहुँचने रगी जहां साफ सफाई या फूड सेफटी में गंभीर खामी मिली वहां तुरंद कारवाई की गए 25 माई से 31 जुलाई के बीच के आंकडे भी इसी बदलाव की तस्वीर दिखाते हैं इस दोरान 3137 food establishments का inspection हुआ। इन में से 764 को सुधार के निर्देश दिये गए और 165 licenses suspend किये गए। करीब 28.66 लाग किलो ग्राम unsafe खाना जब्द किया गया जिसकी कीमत 55.72 लाग रुपए से जादा थी। सिर्फ होटेल और रेस्ट्रोंट सेक्टर में 890 यूनिट्स की जाच हुई, 329 को नोटिस दिये गए और 116 लाइसेंसे सस्पेंड किये गए। डेरी सेक्टर में 487 निरिक्षन हुए, 218 नोटिस जारी किये गए, 33 लाइसेंस सस्पेंड हुए और 11 मामलों में सीधे FIR दर्ज कर दी गए. इस कारवाई की जद में सिर्फ छोटे कारुबारी नहीं आए नोर महमदी, शालिमार, केरुस्तम, क्रिकेट क्लब ओफ इंडिया, वेलिंगडन और जूहू जिम खाने जैसे पुराने और पॉपिलर स्टाबलिश्मेंट्स पर भी कारवाई हुई संदेश साफ था कि फूट सेफटी के मामले में नाम या पॉपिलियारिटी के आधार पर कोई छूट नहीं मिलेगी इसका असर बाजार में दिखने लगा कई संस्थानों ने खुद को तयार रखने के लिए मौक ओडिट शुरू किये किचेन की हाईजीन सुधारने लगे और फसाई सर्टिफिकेट को दुकानों के बाहर लगाने लगे हला कि कुछ छोटे कारोबारियों ने ये चिंता भी जताई कि इतने कड़े स्टैंडर्ट का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल है वहीं मुंडे का रुक साफ है कि खाने की कॉलिटी और हाईजीन के साथ किसी तरह का समझोता नहीं किया जा सकता क्विक कॉमर्स सेक्टर में पहला बड़ा मामला 7 अगस्त को मुंबई के मलाड वेस्ट के ब्लिंकिट डाक स्टोर से सामने आया FDA की टीम को वहाँ फलो और सबजियों के स्टॉक पर कौकरोच रेंगते हुए मिले फूड प्राड़क्स सीधे गंदे फर्स पर परे हुए थे और रैक्स में जंग लग चुका था medical records pest control FDNA Blink Commerce Private Limited ये मामला इसलिए भी एहम है क्योंकि 10 मिनिट में सामान पहुचाने वाले इन डार्क स्टोर्स को आम कस्टमर कभी देख नहीं पाता शहरों में ऐसे हजारों स्टोर्स हैं लेकिन उनकी हाईजीन और फूड सीफटी की जाच कितनी होती है ये बड़ा सा बाल है इसके बाद कारवाई उन जगहों तक पहुंची जिन पर आमतोर पर कोई शक नहीं करता FD अधिकारियों ने बॉंबे हाई कोट की कैंटीन को भी जाच के दारे में ला दिया IIT बॉंबे की कैंटीन बिना वैध फूड लाइसेंस के चलती हुई मिली मुंबई के फेमस पारसी डेरी फार्म में भी फंगल ग्रोत और फर्स पर रखे कच्चे माल जैसी प्रॉबल्म्स मिली जिसके बाद उनका लाइसेंस भी रद कर दिया गया 12 अगस्त को ये अभ्यान आयूरवेदिक दबा उद्ध्योग तक पहुँच गया राजभर में 434 लाइसेंस आयूरवेदिक मेंफाक्चेरिंग यूनिट्स का इंस्पेक्शन हुआ इन में 135 को शो कॉज नोटिस दिये गए और 10 के लाइसेंस थाई रूप से रद कर दिये गए कई यूनिट्स में टेकनिकल स्टाफ, कॉलिटी कंट्रोल और टेस्टिंग की परियाप्त व्यवस्था नहीं थी यानि तुकारा मुंडे की अगवाई में शुरू किया गया क्रैकडाउन अब सिर्फ रेस्टोर्न्स और होटेल्स तक सीमित नहीं रहा इसका दायरा क्विक कॉमर्स बड़े संस्थानों और आयूरवेदिक दवाओं तक पहुँच गया है अब ये समझते हैं कि महराश्टर से शुरू हुआ दमुंडे एफेक्ट किस तरह पूरे देश में फूल सीफटी को लेकर चर्चा का विशय बन गया है और इस पूरे अभियान के केंदर में खड़े आई-एस ओफिसर तुकारा मुंडे आखेर कौन है महराश्ट में बड़े पैमाने पर हुई छापे मारी और गंभीर समस्याएं मिलने पर तुरंट कारवाई ने दूसरे राज्यों का भी ध्यान खीच लिया है इसका असर कई जगहों पर दिखाई देने लगा है करनाटक में बेंगलूरू के 26 थ्री स्टार और फाइव स्टार होटेल्स पर अचानक छापे मारी हुई यूबी सिटी के मशूर स्काई लाउंज को सड़े हुए मांस मिलने के मामले में बंद कर दिया गया फूड सीफ्टी डिपार्टमेंट की 30 टीमों ने एक साथ कारवाई की और सप्लायर समेध कूल 132 कीलो खराब आइटम्स जब्द किये गुजरात में भी अनलोग यानी नकली पनीर, चीज और बटर की बिकरी पर रोक लगा दी गई है तैलंगाना में एच फास्ट मॉडल के तहह छापे मारी और एफायार हुई। मिलावटी सामान को जब्द कर लिया गया। हाला कि एक चुनौती ये भी बनी हुई है कि कई मामलों में मुकद में लंबे खिचते हैं और सजा का दर कम रहता है। और 2005 बैच के महराश्ट कैडर के आईएस अधिकारी बने। चवाल ये है कि उनके अगवाई में शुरू हुआ ये फूट सेफटी क्रैक डाउन आखिर किस बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है। अभिनेता परेश रावल ने भी सरकार्थ से अपील करते वे कहा कि इन्हें अब ट्रांसफर मत करो। सोशल मीडिया पर लोग उनकी तुलना फिल्म नायक के अनील कपूर से करने लगे। लेकिन ये समर्थन सिर्फ मुंडे की लोगप्रियता की वज़े से नहीं है। असल वज़य है कि जब एक अधिकारी ने फूट सेफ्टी के नियमों को सक्ती से लागू करना शुरू किया, तो लोगों को पहली बार ये लगा कि सिस्टम में वाकई बदलाव लाया जा सकता है। कानूनी तोर पर लाइसेंस सस्पेंड करना भी अंतिम सामाधान नहीं है। 165 सस्पेंडेड लाइसेंस में से 103 मामलों में कारोबारियों ने अपील की है और कुछ मामलों में इंटिरिम रिलीफ मिल भी गई है। यानि असली परिक्षा ये है कि क्या ये सक्ती लंबे समय तक कारोबारियों के विभार को बदल पाएगी। यही असली समस्या सामने आती है। अगर फसाई और स्टेट एफडिये के पास लाखो फूट बिजनेसेस की जिम्मेदारी है, लेकिन inspection के लिए inspectors और resources limited है तो सिर्फ छापे मारी से food safety सुनिश्चित नहीं हो सकती जरूरत ऐसी विवस्था की है जहां नियमित जाच हो नियमों का पालन लगातार monitor किया जाए और नियम तोड़ने पर कारवाई तेज हो क्योंकि सुरक्षित खाना किसी एक अधिकारी की सक्ती पर नहीं बलकि एक मजबूत फूट सेफटी सिस्टम पर निर्भर होना चाहिए ये थी तुकारा मुंडे और उनकी क्राकडाउन की पूरी कहानी अब आप दमुंडे इफेक्ट पर क्या सोचते हैं अपनी राय कॉमेंट्स में जरूर बताएं देश और दुनिया की बड़ी खबरों के लिए देखते रहें चिस्ट शुक्रिया