Part of a cluster — open full story hub

Summary
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि SC केटेगरी को होमोजीनियस केटेगरी नहीं माना जा सकता अगर कोई राज ठोस आकडों से साबित कर दे कि कोई समुदाय दूसरे से ज़ादा वंचित है तो उसके लिए विशेश प्रावधान किया जा सकता है
From the report
क्या SC, ST वर्ग को मिलने वाले अरक्षण में भी क्रीमी लेयर का प्रावधान लागू होना चाहिए? अचानक से शुरू हुई ये बहस शायद आपने भी देखी सुनी हो रही है। बहस इसलिए हो रही क्योंकि मामला सुप्रीम कोट में है, जहां सरकार ने भी बाकायदा हलफ नामा लगाकर जवाब दिया है कि वो क्या चाहती है और इसी के साथ ये राजनीत का मुद्धा भी बन गया है पर कहानी सिर्फ आज की नहीं है ये बहस पहुत पुरानी है दविंदर सिंग बनाम पंजाब राज्य केस सहित कई मुकदमे हैं जिनको आपको जानना समझना चाहिए तब ही आप इस बहस को समझ पाएंगे और ये भी क्यों आरक्षन ऐसा मुद्धा है जिस पर कोई भी राजनीतिक पार्टी हाथ लगाने से बचने की भरपूर कोशिश करती है नमस्ते मेरा नाम है सौरफ त्रिपार्टी आप देख रहे हैं नीज पिंच सबसे पहले बात सुप्रीम कोर्ट में दिये सरकार के ताजा हलफ नामे की सुप्रीम कोर्ट में वकील अश्वनी उपाध्याय ने एक जनहित याचिका दायर की थी इसके लाभा 2025 में रमाशंकर प्रजापती ने भी एक रिट पेटीशन दाखिल की थी दोनों याचिका करताओं की तरफ से तरक दिया गया था कि SCST समुदाय में जिन परिवारों की सदस्य उच्छ सरकारी पदों पर पहुँच चुके हैं या जो आर्थिक रूप से संपन हैं उन्हें आरक्षन का लाब नहीं दिया जाना चाहिए इससे अरक्षन का लाब हाशिय पर रह रहे SC, ST समुदाय के लोगों तक भी पहुँच पाएगा केज सरकार ने सुप्रीम कोर्ड में दाखिल अपने जवाब में इन दोरों याचिकाओं को खारिश करने की मांगी सरकारी हलपनामे में कहा गया सुप्रीम कोर्ड ने कहीं भी साफतौर पर ये नहीं कहा है कि SC और ST पर क्रीमी लेयर लागू होगी फैसले में क्रीमिल एयर का जो जिक्र है वो सिर्फ एक सामान निटर पड़ी है और वो OBC तथा सामाजिक और सैक्शनिक रूप से पिछड़े वर्गों SCBC के संदर्ब में है SCST के लिए नहीं इसके लाव सरकार की तरफ से दायर हलफ राम में ये भी कहा गया कि किन वर्गों को SCST में रखना है किसे निकालना है ये अधिकार सिर्फ संसत के पास है। गति भर भी बदलाव नहीं करने वाली है लेकिन यह सवाल यह है कि सीएसटी वर्ग में क्रीमी लेयर के बाद आखिर उठ क्यों रही है आइए इस पूरे मामले को थोड़ा सिलसिलेवर तरीके से समझते हैं कहाने की शुरुआत पंजाब से होती है पुनिसोपिशित्तर में पंजाब सरकार ने अपने राज में लागू SC आरक्षन की विवेशना में पाया कि वालमीक और मजहभी जैसे समुदाय आरक्षन का लाब लेने में पिछड़ रहे हैं। 2004 SCST 1975 से चल रही कोटी के भीतर कोटी की विवस्था भी आवैधानिक हो गई। लेकिन पंजाब में 30% आबादी दलित समुदाय से आती हैं। उसमें सिवालमीकी और मजहवी सिख समुदाय राजनीतिक समीगरण में एहम कड़ी हैं। ऐसे पर पंजाब सरकार ने राजीव गांधी के आजमाए हुए फॉर्मुले से तोड़ निकालने कोशिश की, शाह बानो केस्ट में राजीव गांधी सरकार ने संसत के जरिये सुप्रीम कोड के फैसले को परड़ दिया था. पंजाब में ततकालिन अमरिंदर सिंग सरकार ने भी यही कारणामा विधान सभा के जरी करने की कोशिश की। उन्होंने विधान सभा में पंजाब Schedule Cast and Backward Classes Reservation in Services Act 2006 पेश किया। इसके अनुच्छे चार की धारा पांच में मजबी और वालमीक समुदाय के आरक्षण में विशेश प्रावधान रखे गये थे। पंजाब सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ड में अपील की, इस मामले में 2020 में सुप्रीम कोर्ड की पाँच जजों की बेंच बैठी. इस बेंच ने 2004 में दिये गए ईवी चनहिया बनाम स्टेट आफ आंधप्रदेश के फैसले को पलट दिया. कोड का कहना था कि अगर OBC में क्रीमी लेर का प्रावधान हो सकता है तो SC कोटे में क्यों नहीं हो सकता इसके बाद यह मामला साथ जज़ों वाली सम्मिधान पीठ को भेज दिया गया एक अगस्ट 2024 की रोज ततकाली चीज जस्टिस डीवाई चंदरचून के नेतरत में बैठी समिधान पीठ ने इस मामले में छे बनाम एक के बहुमत से फैसला सुनाया सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि SC केटेगरी को होमोजीनियस केटेगरी नहीं माना जा सकता अगर कोई राज ठोस आकडों से साबित कर दे कि कोई समुदाय दूसरे से ज़ादा वंचित है तो उसके लिए विशेश प्रावधान किया जा सकता है इस तरह 20 साल बाद सुप्रीम कोड की सम्मेधानिक पीठ ने इवी चिनहिया बनाम स्टेट औफ आन प्रदेश के मामले में दियेगे फैसले को पलट दिया इसे मेडिया के तमाम विशलेशनों में SCST के टेगरी में क्रीमी लेयर के तौर पर बताया गया हला कि यहां गौर करने वाली बात है कि सुप्रीम कोड ने कहीं भी क्रीमी लेयर शब्द का इस्तमाल नहीं किया था अब यहां सवाल उठता है कि SCST में क्रीमी लेयर का शिवूपा आया कहां से फिर इसके लिए हमें दो कारूनी फैसले समझने पड़ेंगे पहला 1992 का इंद्रा साहनी केस और दूसरा सुप्रीम कोर्ट की आरक्षण के मामले में की गई हालियां टिपड़ी से पहले चलते हैं इंद्रा साहनी केस की तरफ 13 गस्ट 1990 केंद्र की विश्वनात प्रताप सिंह की जंतदल सरकार بڑی راجنیتک بحث بن گیا تھا دوسری طرف کچھ لوگوں نے کوٹ کا سہارا لیا پترکار اندرہ سانی اور ان کے کچھ ساتھیوں نے سپریم کوٹ میں ارجی ڈالی کہ او بی سی آرکشن لاغو کرنا سمویدھان کے آرٹیکل سولہ کے تحت دیئے گئے سمتہ کے ادھکار کا علنگن ہے کیونکہ معاملہ مولک ادھکاروں کے حنان کتھا لہٰذا اس کی سنوائی سپریم کورٹ کی سمیدھان پیٹھ میں ہوئی نو ججو کی پیٹھ نے سولہ نومبر انیس سو بانوے کو اس معاملے میں اتحاسک فیصلہ سنایا سپریم کورٹ نے کہا او بی سی کے لیے ستائیس فیزدی آرکشن وید ہے یہ مولک ادھکار کا حنان نہیں ہے او بی سی میں کریمی لیئر کو آرکشن سے باہر کیا جائے سامانے پرستیتیوں میں کل آرکشن پچاس فیزدی سے اتھک نہیں ہونا چاہیے آرکشن نیوکتی یعنی انیشل اپوائنمنٹ تک سیمیت رہے گا پدونتی پرموشن میں یہ نہیں ہوگا یہ فیصلہ آج بھی لینڈ مارک مانا جاتا ہے کیونکہ اس فیصلے میں کوٹ نے آرکشن کی پاتتہ سنشچت کی کوڈ نے کہا کہ صرف آرثی کا آدھار پر پچھڑا پن ہی آرکشن کے لیے کافی نہیں ہے ساماجیک اور سیکشنک پچھڑا پن بھی ضروری شرط ہے ساتھی کوڈ نے او بی سی آرکشن میں کریمی لیئر کی آدھارنا دی تاکہ آرکشن کا لاب ضرورت مند لوگوں تک پہنچ سکے اب آتے ہیں دوسرے کیس پر 22 ماہ کو سپریم کورٹ میں کریمی لیئر پر ایک معاملے پر سنوائی کرتے ہوئے جسٹس بیوی رتنا اور جسٹس اجول گھویاں کی بینچ نے ایک اورل آبزرویشن رکھا کورڈ نے سوال کیا اگر ماتا پتا دونوں آئی ایس ہیں تو بچے کو آرکشن کیوں چاہیے سپریم کورڈ کی ٹرپڑی حالانکہ او بی سی آرکشن میں کریمی لیئر لے کر تھی لیکن اس ٹرپڑی کے بعد سوشل میڈیا پر ایسی ایسٹی کوٹے میں کریمی لیئر کو لے کر بحث شروع ہو گئے اس مدد پر سپریم کورٹ میں یادشکائیں لگیں جس کے بارے میں ہم نے ویڈیو کی شروعات میں بستار سے آپ کو بتایا تھا اسی اسٹی کوٹے میں سب کیٹیگری کی مانگ کرنے والے پکش کا کہنا ہے کہ انسوچی جاتی جنجاتی برگ میں آنے والے کئی سمودائے سمائے کے ساتھ ساتھ آرتھک اور سیکشنک ادھار پر مضبوط ہوئے ہیں اور وہ اس کوٹے کا زیادہ تر حصہ لے جاتے ہیں جبکہ کئی سمودائے پیشتر سال کے عرقشن کے باوجود کالج، یونیورسٹیز اور نوکری تک نہیں پہنچ پا رہے ہیں جنرل کٹیگری ایکٹیویسٹ ڈاکٹر نیہا داس اپنے ایک ایکس پوسٹ میں راجستان کے میڑا سمودائے کی اوور رپریزنٹیشن کا ادھارن دیتی ہیں نیہا کے مطابق بھارت میں 744 سمودائے انو سوچیت جنجاتی ورگ میں لسٹڈ ہیں میڑا سمودائے کل آدیباسی جنسنکھیا کا ساڑھے چار فیض دی ہے لیکن دوزار سولہ سے دوزار پچیس کے بیچ ہونے والی یو پی ایس سی سیویل سرویس پریشانوں میں ایسٹی کوٹے کا آرٹاریس فیض دی حصہ اکیلے میڑا سمودائے کے پاس گئے یعنی میڑا سمودائے کو ملنے والا لات ان کی جنسنکھیا سے دس گناہ زیادہ ہے جیسا کہ یہ دعویٰ ہے یہ ڈیٹا آراکشن ویوسطہ کی وسنگتی کو دکھاتا ہے ایسے میں بار بار مانگ اڑتی ہے کہ آراکشن ویوسطہ کا مولیانکن کیا جانا چاہیے لیکن بھارت جیسے دیش میں جہاں راجنیت میں جاتیگت پہچار اتنی اہم ہے وہاں کوئی بھی راجنیتک دل ہی جوکیم اٹھائے گا اس میں سندے ہیں راجنیتک دلوں کا یہ بھئی بے بنیاد بھی نہیں ہے प्रशास्टी का अधिकारों का इस्तेमाल किया था इस मामले में फैसला सुनाते हुए जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूजू ललित के बेंज ने SCST एक्ट के दुर्बयोग को गंभीरता से लेते हुए कुछ निर्देश शारी किये कोड ने SCST एक्ट के तहट होने वाले मुकदमों में तुरंद गिरफतारी पर रोक लगा दी कोड ने निर्देश दिया कि अगर कोई मुकदमा आता है तो उसकी जाच DSP इस तर का दिकारी करे और गिरफतारी के लिए SSP के अनुमती होनी जरूरी है साथ में अगर प्रधम द्रिश्ट्या मुकदमा नहीं बनता तो आरोपी को अगरिम जमानत दी जाए कोड ने इस मामले में टिपड़ी करते हुए कहा SCST एक्ट निर्दोष लोगों को ब्लैकमेल करने का साधन नहीं बन सकता केवल आरोप लगा देना किसी व्यक्ति की स्वचंतरता छीनने के लिए परियाप नहीं है लेकिन अदालत के इस वैसले को लेकर अनुसूचित जाती वर्ग की तरफ से कड़ी प्रतीकरिया आई इसे जातिकत उत्पीडन के खिलाफ मिली कानूनी सुरक्षा को कमजोर किये जाने के तौर पर लिया गया इस वैसले के खिलाफ अनुसूचित वर्क के संगठनों की तरफ से पूरे भारत में बंद का एलान किया गया भारत में कई जगहों पर हिंसा हुई सरकार दबाव में आये और सुप्रीम कोर्ड में रिव्यू पेटीशन दायर की गई 2018 के मौनसून सेशन में सरकार की तरफ से SCST Prevention of Atrocities Amendment Act 2018 पेश किया गया इस विल में नई धारा 18A जोड़ी गई और सुप्रीम कोर्ड के फैसले को उलट दिया गया इसी तरह से साल 2024 में हुए लोगसुबा चुनाओं में सत्ता धारी भारती जिन्ता पार्टी की तरफ से अब की बार 400 पार का नारा दिया गया। आरक्षण पर एक बयान चुनावी नतीजे बदल सकता है। कोई भी पार्टी इतना बड़ा राजनीतिक रिस्क नहीं लेना चाहती। दूसरी तरफ, रेजरवेशन सिस्टम में कई ऐसी खामिया हैं, जिनने दूर करके और प्रभावी बनाया जा सकता है। आज भी एक पूरी आबादी है जो हाशिये पर है, SCST को लेकर देश और राज्यों में सामाजिक नियाय मंतराले हैं, आयोग हैं, आरक्षण की व्यवस्ता है, वजीफे हैं फिर भी एक बड़ा हिस्सा स्कूल और कॉलेज का मुँ नहीं देख पा रहा है, इस वर्ग तक आरक राज नेक्तरी न्यूस पेंच शुक्रिया