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Summary
तमसा नदी सूखी है, जिससे खेतों में धान की रोपाई नहीं हो पा रही है। किसान परेशान हैं क्योंकि उन्हें पानी के लिए पैसे देने होते हैं।
“पानी कोई सुधा नहीं है, कौन सुधा बाचारिवार?”From the report
दोस्तों यह है गौरा घाग, जिसकी हम बात कर रहे हैं कि मड़ा विशुली है। इसका पानी जब आता है, तब ही जाके किसानों के खेतों में पानी होता है, यानि सिखाई होती है। धान के फ़सल में अधिकांस पानी लगता है। और यहाँ पर पानी नहीं पहुच गाता। इन लोगो इन किसान जो करीब तपके के किसान है जैसे यसी व्यासाद गृदधि के है। या पिछली जाती निसाद व्यासाद गृदधि के के लोगों की खेती किसानी यहां पर अधिकांस है और ऐसे किसान जो है अपने खेती के लिए परेशान है क्योंकि वह एक ही फ़सल अपना उपजा आते हैं। वह जो गेहुं का बाकी जो है ऐसे मौसम में यानि वन्ना और धान के फशल उनके स्कूल कहते हैं तो क्या यहां पर धन और गरह नहीं बेठा जाए जाता कि यह पोर्टी पड़ा रहता है आपने धनवान ना बैठाओ बाचि? क्यों करें ना, गुरु बच्छरू मारा नहीं छुक्टा, मारा कहां बैठाओ है, अब पाणी वाली का सुभधा है? पानी कोई सुधा नहीं है, कौन सुधा बाचारिवार, क्योंकि इस भल्या भल्या, लेकिन इस भल्या मनाई तो इंजल ले जा, तेल खरीदा, भराओ यह परिशानी है। नदी में पानी आएगा कि बारीश हुआ या नहर का पानी खोला गया तभी आएगा। नदी के सहारे बहुत सारे किसानाई से हैं कि जो पानी के लिए तरह रहे हैं। इतनी बार सीचाई करेंगे इतनी बार हमको 400 रुपे पेमेंट करना पाएगा। आज राले ऐसे दिवसीए