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Summary
बाढ़ में देवदूत बने गाँव के लोग, 1,500 लोगों की जान बचाई, नागा नदी में तबाही, नेपाल कुटी के गाउं के बगल में गुवारी गाउं, लकड़ी पकड़ने आया था, नाव लेकर गए, 15 से 20 लोगों को लेकर आ पाते हैं, घर के अंदर पानी हो रहा है, परिवार को नाव पर उठा के रख दिये, सामान इकठा करो जल्दी हो जाएगा, प्रभुक से एक दो लोग होंगे और उनको उठा कि आप
From the report
तरदनाक मंजर तो वो है जो एक परिवार के 25 लोग थे जो हमारे यह हमारे भगना लगते हैं तो इनके साथ और भी हमारे दो-चार लोग थे उन्होंने जाकर उस 25 परिवार को एक ही साथ बचाया जो घर के अंदर पड़े फंसे हुए थे उनके पर के इतना इतना पानी हो गया था वह ऊपर का जो छठ होता है उस छठ पकड़ लड़ पकड़ कर लटके हुए थे बोल रहे भाइया जल्दी आइए तो यह लोग जाकर उस दरवाजे को तोड़कर उसके अंदर घूश कर वहां से सभी लोगों को निकाल नाम में उठाए और छट के ऊपर ले जाकर लग दिये चौफट होता है इतना ही दरवाजा बाकी था डूबने का अगर वह डूब जाता तो हम भी नहीं निकल पाते हैं यह जो हमारे पीछे नदी है दिहो नदी है जो नागा लाइन से आती है और ने असाम में तबाही मचाई है अब इसके तबाही को कैसे हो ये यहाँ पे तो आप सब ने देखा है लेकिन कुछ ऐसे लोग जो देवधूत बनके निकले एक पूरी टीम यहाँ पे जो नेपाल कुटी के गाउं के बगल में ये दो नंबर गुवारी है गाउं इसके में सार सब्सक्राइब करें और लंबी होती आपका पूरा नाम क्या हुआ था श्रवन परसाद श्रवन जी आप बताइए कि उस दिन जब अचानक से बार है आप कहां पर थे और कैसे फिर नाव लेकर गए थोड़ी घटना को हमें पूरा बताइएगा और तो इसके पहले आपके साथ कितने लोग हमारे साथ 25 से 30 लोग थे और ना हमारे पास थी छह उसके बाद सुबह का बात है मालिए नौ 10 बजे उससे पहले हम लोग इसी नदी में लकड़ी पकड़ने आया था थारा बॉड क्योंकि हमारा यहां लकड़ी का परियोग करते हैं खाना बनाने के लिए गेस्ट का परियोग नहीं करते हैं तो आप बताईएगा उस समय कुछ दहसत लग रही थी कि किस तरीके से खुद तो भागने का मन कर रहा होगा भागने के मन जैसे हम भी तो नावी में था। जब लोगों को ले जा रहा था तो हम उन्हें पर ख़बर मिल जाता था फोन वहाँ से। यहाँ पर हम लोग उन्हों को छोड़ते थे। उसी जगह जो आदमी फ़सा हुआ है उन्हों लोग फोन कर रहा था कि लोगों को बच्चे लोग उन्होंने निकाल करो रखने में वपस घाओ कर नहीं शक्षी है, सब चिल रहे हैं, उने न का बुल रहा है, मुझे बात करने के लिए और हमारे गाउं के लोग भी और पांच नार भी हो लोगों को बचाने के लिए गए और जो हमारे भी नाओ है, हम अपनी नाओ से जितने सके कोशिश कियें, सब को बचाये, और जहां तक हम लोग पहुँच सके, हमारे टीम, हुआ हुआ लोगों को, सब को लिख लाये हम लोग. क्या नाओ है आपका? मरायन चोडी है. जी तो आप बताइए कि वह था तो कितने लोग एक बार नाव में बैठ रहे थे और क्या समझी नहीं आ रहा होगा कि किसको पहले बचाएं किसको बाद में बचाएं सबसे पहले बात तो एक बार जब हम लोग नाव लेकर जाते उसमें 15 से 20 लोगों को ही लेकर आ पाते हैं। क्योंकि उस नाव में ज्यादा लोगों को लेकर आएंगे तो नाव भी पानी में उलट पलट जाएगी। इसके डर से हम लोग 15 से ज्यादा 15 या 20। उसके बाद हम जब लोटकर आये घर पर, तो देखे कि घर के अंदर पानी हो रहा है, तो हम लोगों ने अपने परिवार को नाव पर उठा के उठा इस्थान में जाके रख दिये, उसके बाद सोचे हम लोग की आ करके अपने घर के जितने भी जरूरी सामान है, उसे लेकर के हम चले जाएंगे तो वहां से लोटते समय में मैं तो अपना भाई को भी अपने घर पर रखा था कि तुम सामान इकठा करो जल्दी हो जाएगा आखिर तो मामी पापा लोगों को वहां पर उचास्थान में जब रोख लोटकर आ रहे थे तो पास के गाउ वाले लोग चिल रहे थे कि बचाओ बचाओ नहीं तो हम लोग जाएंगे प्रभुक से एक दो लोग होंगे और उनको हम उठा कि आप फिर अपने सामान लेकर जाएंगे तो यह देखे जा करके कि कोई भी निकला ही नहीं है अपने घर से सब लोग घर अंदर है कोई चिन के ऊपर है कोई पेड़ के ऊपर है ऐसा करके परिस्थिति बहुत बुरा हो वाता हुआ था उस दिन तो ऐसे करके हम लोग देखेंगे पांच 6 गाओं है सब तरफ हल्ला हो रहा है फोन भी आ रहा है कि इतना बुरा इस्तिति है 6 1500 2000 कि भाईया हम जो सामान इकठा करके रखे थे वह भी चला गया अभी मेरे सर के ऊपर से पानी जा रहा है घर के अंदर बहुत पानी भर गया तो उसे मैंने बोला आप एक काम करो घर के आगे फॉकलेन मशीन है वहां जाकर आप चढ़ जाओ हम लोग अगर यहां से आपको बचाने जाएंगे तो मान लीजिए यहां दो-तीन सुन लोग मर जाएंगे तो ऐसे करके उसे ओहोसला दिया और बाद में आ करके देखा कि हां वह आप फोकलेन के ऊपर ही बैठा हुआ है वह यह भी कह रहा कि मैं यहां से जाने नहीं पाऊंगा फुकलिन के पास क्योंकि पानी का बहाव बहुत ज्यादा है वह बात सुनकर के मुझे वहां लोगों को तो बचा रहे हम लोग बता मेरा माइंड और मेरा यह पुरा डर से मतलब कैसे बोलें आपको अशा था तो उसके बाद हम रात बारा बज़े तक हम लोग स्किन करने में आया भाई को लिया और उसके बाद रात बारा बज़े तक हम लोग रेस्क्यू करते रहे हैं करते रहे हैं उसके बाद हेलों ने कोटिस्ट बोल रहे हैं और वह जाने का परियास के दिन में तो जितना जा सके गए आसपास के लोगों को लेकिन तो यह जो पहाड़ से जो लकड़ीयां आए हैं लकड़ी आया है तो वहां पर सारा लकड़ी उसी गांव के अंदर गुज गया था उस बजे से हमारा बोर्ट नहीं जा वहां पर वह जो आपका भाई था वह कितनी देर तक उसको मशीन के ऊपर बैठा रहा कितनी देर में आप आए हम आए था लगा होगा कि जब इस तरह से पानी आ रहा है लकड़ियां भी आ रही है दर की बात तुम अब बोलिए हम इतना सहमे हुए इतने डरे हुए थे कि मैंने अब अपनी जान को परवार न करते हुए हम लोगों का जान बचाया पहले अपने परिवार को ऊचे आस्थान पर ले गए उसके बाद यहां के जितने अगल-अगल के गांव थे उस गांव से कम से कम 1500 से 2000 लोगों को हमने शुक्रिया हर जगह और गली पर गए पानी का इतना तेज बहाव था कि उस बहाव में अपने जान को भी जोखिम में डालकर हम लोगों उस जगह तक पहुंचा जहां पर लोग फंसे हुए कोई घर के ऊपर बैठा हुआ कोई पेड़ के ऊपर लटका हुआ कोई बोल रहा है, आईए भाईया हमें बचा लीजिए, नीतो हम मर जाएंगे। ऐसे बोल रहे हैं, कोई धर के ऊपर से बोल रहा है, की भाईया जल्दी आईए, नीतो हमारा घर अभी बह जाएगा। कीवी भू नाओं की बगल में बिलकुल हेलो भूचाओ ने पैसा कोम में के्वीी जानती गयी थी। फोन तो कर रहे हैं लेकिन हम उस जगह तक पहुंचने के लिए सक्षम नहीं थे कि जाएं तो कि पानी का इतना ज़्यादा बहाव था कि मने हमें उहाँ तक पहुंचना बहुत कठी है तरदनाक मंजर तो वो है जो एक परिवार के 25 लोग थे जो हमारे यह हमारे भगना लगते हैं तो इनके साथ और भी हमारे दो-चार लोग थे उन्होंने जाकर उस 25 परिवार को एक ही साथ बचाया जो घर के अंदर पड़े फंसे हुए थे उनके सर के इतना इतना पानी हो गया था वह ऊपर का जो छथ होता है छथ पकड़ लड़ पकड़ कर लटके हुए थे बोल रहे भाईया जल्दी आइए तो यह लोग जाकर उस दरवाजे को तोड़कर उसके अंदर घुसकर वहां से सभी लोगों को निकाल कर नाव में उठाए और छथ के ऊपर ले जाकर लग दीजिए अगर दस मिनट और देर करते तो सायद उन लोगों को नहीं निकाल पाते चौखट होता है इतना ही दरवाजा बाकी था डूबने का अगर वह डूब जाता तो हम भी नहीं निकाल पाते उनको उसके बाद एक परिवार ऐसा था जो कि उसका घर डूब गया है का उपर तो वह देख रहा है अंदर से लोग चिला रहे हैं कि बचाओ बचाओ तो उसका एक टीना ऊपर आ ऊपर का हिस्सा का एक टीना निकाल करके बच्चियां दो ठीक तो थी अब उनकी मम्मी पापा और दो लोग थे उनको निकालें और निकालते समय में लास्ट जब दो उसे बच्ची के पिता और माता जब बच गए थे तो घर उनका गिरने वाला था मतलब तामूल के पेड़ भी साइड में था वह सब गिर रहा था तो जब घर गिरने वाला था मैं भी भयब्रित हो गया क्योंकि नाव के साइड में भी घर गिरने वाला था तो जो बच्ची लोग को बचाए है जो हम लोग भी है हम लोग हम लोग भी शायद नहीं बचेंगे ऐसा करके मैं दो कदम पीछे कर लिया था कि हम लोग भाग चलें फिर उनका जो फेस है वह देखा मैं तो कुछ बोलना लगा, मैंने बोला की जल्दी निकल जाये, नहीं बचेंगे ऐसे करके बहुत जान जोखिम में ढाल करके उन्हें निकाल के आया। नागा लेंड में जो लेंड चेयर हुआ है ना कर सहित भी ये पेर और सब पानी के साथ आ गया।