
Summary
बाबाओं के फरजी दावों पर भारतीय लोगों का भरोसा, उम्मीद की भूमिका, साइंस का प्रभाव, प्लेसीबो इफेक्ट, भारतीय लोगों की मिराकल्स पर विश्वास
From the report
कुछ दिन पहले मैंने ये सब देखा हथाडों और मुक्कों से हरनिया की बीमारी ठीक की जा रही है एक फूक में गले की खुजली गायाब हो रही है थपड मार कर गुंगे को बोलना सिखाया जा रहा है कुछ स्वयंभू और पीर बाबा तो चंद सेकंड में कैंसर ठीक करने तक का दावा कर रहे हैं कुछ तो गले लगा कर लाइलाज बीमारियां भगा दे रहे हैं और सबसे अजीब बात लोग कैमरे पर कह रहे हैं कि उन्हें आराम मिल गया और उससे भी ज्यादा चौकाने वाली बात ये कि इन बाबाओं के दरबार में हजारों की भीड उमड रही है अंधविश्वास इस चरम पर है कि लोग भगदड में जिंदा बच जाने का अफसोस मना रहे हैं बैट के बाद के पिछले एपिसोड में हमने कॉंपेटिटिव एक्जैम सिस्टम और पेपर लीक पर बात की थी आज हम एक अजीब लेकिन उतने ही जरूरी मुद्दे गॉडमेन यानी फर्जी बाबाओं पर बात करेंगे वीडियो में समझेंगे कि आखिर ये चल क्या रहा है लोग स्वयंभू चमतकारी बाबाओं पर आख मून कर क्यों भरोसा करते हैं और क्या इस अंधविश्वास के जाल से बाहर निकला जा सकता है? तो चलिए सभी धर्मों में चल रहे इस पूरे खेल पर बैठ के बात करते हैं, क्योंकि सभी ज़रूरी मुद्धों और उनके समाधान पर बैठ कर ही बात होती है. बीते दिनों जैन्जी की वास्तगुना हुईया और तेरी गलियों में मुहबबत होगी रील्स के बीच मेरी फीड पर ये वीडियो आया इसमें एक बूरी मा बता रही है कि उनको गले का कैंसर है यह सब कुछ सामने बैठा एक शक्स सुन रहा है बूढी मा की बात खत्म होने के बाद पत्ते के दोने में कुछ पीने को देता है बूढी मा उसे पीती है इसके बाद मुस्कुराते हुए वह शक्स कहता है यह सब कुछ कितना अजीब और हास्यासपद है न 21 AI सोशल मीडिया पर अपने अजीव और गरीब दावों को लेकर ये खासा वाइरल हैं. खुद को मा बगला मुखी का भक्त बताते हैं. इनका मा बगला मुखी गुप्त दर्बार नाम से एक यूट्यूब चैनल भी है. मैंने इस चैनल के कई वीडियोज देखे सभी में पैटर्न लगभग एक सा था लोग दावा कर रहे हैं कि उन्होंने इलाज पर लाखों रुपे खर्च कर दिये लेकिन आराम नहीं मिला फिर वो बाबा के पास आये और कुछ ही मिनिटों में तंदरुस्त हो गए एक वीडियो में 50-60 साल का एक आदमी दरबार में आया है कहता है मेरी बाई आख में मोतिया बिंध है बाबा बोलते हैं आखें बंद करो फिर हाथों में पानी लेकर उस पर फेंकते हैं कुछ सेकिन्ड में वो आदमी माईक पर एलान करता है बाबा मुस्कुराते हैं और पूरा दरबार जैकारों से गूंज उठता है बाबा इसी तरह से सिरदर्ध, टीबी, एस्मा यहां तक की एड्स और कैंसर जैसी बिमारियों को भी ठीक कर रहे हैं दिल्चस्ट बात ये है कि इस पूरे इलाज में एक भी दवाई इस्तिमाल नहीं होती, कभी पानी छिड़क कर तो कभी फूक मार कर मरीज को ठीक किया जाता है, और हैरानी की बात ये है कि बाबा के पूछते ही मरीज फ़ौरन बोल देता है मैं ठीक हो गया हूँ, अब सोशल बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज दो तरह से करते हैं पहले वो दरबार में आई पीड़ित के कान में फूख मारते हैं और फिर हतौडे से उसके शरीर पर वार करते हैं एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि बाबा एक महिला पर आये प्रेत से बात कर रहे हैं महिला चिला रही है, अजीब हरकते कर रही है बाबा कहते हैं, तेरे को बोतल में बंद करता हूँ साथ में महिला के पती से भी बात करते हैं वो बताता है कि अब तक इलाज पर 15 लाक रुपए खर्च हो गए हैं. वडोधरा के हर बड़े हॉस्पिटल में दिखा चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ. बाबा महिला के कान में फूक मारते हैं, पीट पर मुक के जडते हैं, फिर हथोडा उठा लेते हैं. कहते हैं अब सब ठीक हो जाएगा। ऐसे 10,000 से जादा विडियोज बाबा के चैनल पर हैं। दरबार में इलाज के लिए लंबी कतारें लगी रहती हैं। बाबा खुद कहते हैं मैं 99% रिजल्ट दे रहा हूं। लिखित में देता हूं। दुनिया में ऐसा कोई नहीं कर रहा हुआ है वह अपने चमतकारों से किसी भी तरह की बीमारी खत्म करने का दावा करता है यह बच्चा बिल्कुल डेड था जब यहां पर आया है आलेलुया लोग कह रहे हैं कि उन्होंने मरे हुए लोगों तक को जिंदा किया है फिल्हाल प्रोफिट बजिन्दर सिंग जी बलातकार मामले में आजीवन कारवास की सजा काठ रहे हैं 40 40 कि आपको भी कैंसर अंदर मुख्यां अच्छा अच्छा अब कमी हो गया थोड़ा थोड़ा थोड़ा बच्के रहा है पीर बाबा 300 से ज्यादा बीमारी ठीक करने का दावा कर रहे हैं खैर अब मेरी सोशल मीडिया फीड ऐसे बाबाओं के वीडियोस बढ़ गई थी मुझे इन वीडियो को देखकर समझ आया कि ऐसे बाबाओं की एक पूरी दुनिया है जहां कोई दो सेकेंड में गूंगे की आवाज खोल देता है तो कोई लोहे की जंजीरों से मार कर भूत भगा रहा है और अब ये सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है म सीधा सा सवाल आया आखिर भारत के लोग इन बाबाओं और उनके फरजी दावों पर आँख मून कर भरोसा क्यों कर लेते हैं इसकी सबसे पहली और बड़ी वशा होप यानी उम्मीद है यहां मैं दो तरह की होप की बात कर रही हूँ एक होप फॉर मिराकल्स और दूसरी बि लोगों को बाबा के पास एक चमतकार की उम्मीद दिखती है। इसी भीर में एक बड़ा हिस्सा उन लोगों का भी होता है जो कैंसर, ट्यूमर या लकवे जैसी गंभीर बीमारियों से जूज रहे हैं। जिनकी जमा पूझी इलाज में खत्म हो गई है और आगे इलाज के लि दावा करते हैं कि वो सिर्फ भभूत मंत्र या तीसरी आग की ताकत से लाई लाज बिमारियां ठीक कर देंगे ये खताश इनसान के लिए डूबते को तिनके का सहारा जैसा होता है बाबा लोगों को उमीद देते हैं कि उनकी बड़ी बड़ी समस्याएं बिना किसी मेहनत और खर्च के हल हो जाएंगी यही बाबा कभी केला खाने से तो कभी गोमूतर से कैंसर के इलाज का दावा करते हैं लोग इन पर विश्वास भी कर रहे हैं जुलाई 2024 की हातरस भगदर शायद आपको याद होगी, इसमें 121 लोगों की जान चली गई थी, हादसा तब हुआ जब लोग सूरजपाल उर्फ भोले बाबा के चरणों की धूल एखटा करने के लिए एक साथ दौड पड़े थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि इसमें बीमारियों को ठीक करने की शक्ती है इसे घर ले जाने पर परिवार में सुख समर्धी आती है और संकटल जाते हैं जबकि कोई scientific और medical evidence नहीं है कि किसी व्यक्ति के पैरों की धूल में रोग ठीक करने की शक्ति होती है Science and Rationalists Association of India के founder Prabir Ghosh का मानना था We Indians are great believers in miracles and feel that somebody can get us out of our miseries This is the prime reason we fall for these God writer famous rationalist इन ही विशेयों पर उन्होंने बंगाली में 30 से ज्यादा किताबें लिखी खेर यहां आपको यह भी लग सकता है कि क्या लोग इतने भोले हैं कि बाबाओं के Unrealistic Solutions पर भरोसा कर लेते हैं असल में लोग इन पर इसलिए भरोसा करते हैं क्योंकि उन्हें सच में राहत महसूस होती है दर असल इसके पीछे साइंस काम करता है जिसे Placebo Effect कहा जाता है American anesthesiologist Henry Beecher ने 1955 में famous research paper The Powerful Placebo publish किया था उसमें बताया गया कि एक तरह का जूटा इलाज भी मरीज में सच में सुधार ला सकता है क्योंकि इंसान का विश्वास और उम्मीद भी शरीर को ठीक करने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है जब किसी को गहरा यकीन हो जाता है कि बाबा का मंतर उसे ठीक कर देगा तो इसका दिमाग कुछ ऐसे हॉमोंस छोड़ता है जो शरीर को राहत देते हैं लोग इसे बाबा का चमतकार मान लेते हैं जबकि असल में ये उनकी अपनी उमीद का कमाल है इसकी एक दूसरी वजह ब्रिटिश साइकॉलोजिस्ट स्टीव टेलर बताते हैं उनका कहना है कि ऐसे लोगों पर अब्डिकेशन सिंडरोम काम करता है यानि अपनी जिम्मेदारी किसी और के कंधे पर डाल देने की चाहत जरा अपने बच्चपन के दिनों को याद कीजिए जहां हम हर चोटी बड़ी परेशानी को माता पिता पर छोड़ देते हैं वही सब कुछ ठीक करेंगे बाबा के भक्त भी अपनी जिन्दगी के फैसलों और परेशानियों की जम्मेदारी बाबा को सौप देते हैं इससे उन्हें चिंता से मुक्ती और मान से खलकापन महसूस होता है क्योंकि उन्हें लगता है अब बाबा समहान लेंगे सब कुछ यहां उम्मीद तो असली होती है बस उसे भुनाने वाला हाथ नकली होता है हरियाना पंजाब का डेरा कल्चर हो या यूपी बेहार MP के चमतकारी बाबाओं के दरबार सभी जगह भीर जमकर देखने को मिल रही है आखिर इन दरबारों में भीड बढ़ती क्यों जा रही है इसके पीछे सबसे पहली वजह social acceptance and equality है भारत में बाबाओं के उदै की एक बड़ी वजह समाज में गहराई तक जमी जातिगत व्यवस्था है समाज के हाशी और पिछडी जातियों के लोग अकसर धार्मे के स्थलों में भेदभाव महसूस करते हैं बाबाओं के डेरे और आश्रम उन्हें एक ऐसी जगह देते हैं जहां न जाती पूशी जाती है न प्रवेश से रोका जाता है देरा सच्चा सौदा के अनुयाई अपने नाम के आगे इंसान उपनाम लगाते हैं सब को एक साथ बैठने, एक साथ खाना खाने का मौका मिलता है जो समानता और सम्मान इन्हें बरसों से मुख्यधारा में नहीं मिली वो यहां एक जटके में मिल जाती है साथ ही डेरों में स्कूल, हॉस्पिटल और दूसरी मूल भुत सुविधाएं मिल रही हैं जो शायद स्टेट या सरकार देने में फेल हो रही है दूसरी वजह मेंटल हेल्प सपोर्ट की कमी है भारत में मानसिक स्वास्थ को लेकर जागरूकता बेहत कम है इसी का फाइदा ये बाबा उठाते हैं डेवेलब्ड कंट्रीज में लोग मेंटल स्ट्रेस के लिए थेरेपिस्ट के पास जाते हैं लेकिन भारत में अभी भी दिमाग के डॉक्टर के पास जाने में जहज़क होती है ऐसे में बाबा साइकॉलोजिस्ट और लाइफ कोच दोनों की भूमिका निभाते हैं यही चमतकार का दावा करने वाले बाबा धर्म को एक लॉस प्रूफ बिजनस बना देते हैं