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Summary
किसानों को गौसाला नहीं होने के कारण खेती करने में परेशानी हो रही है।
“गौसाला नहीं है तो खेती कैसे करें?”From the report
कि हमारे गांव में गौरु के दोसाला नहीं है तो बॉयर दुनवर हम आपके हैं रात बर आपके हैं जिनकी हम भी आपके रात के आपके भी जब बारी सुहंदे बाद खसल तैयार होने लगी कि गौरु परतार्ण किसाने बाखेंगे और इधर भटकेंगे गुरुमारमर पहाड़ भेजते हैं साथ यार की कोई सुनने वाला नहीं है सरकार ऐसा नहीं वाकि गरीम मनाई कि कुछ दय नहीं रहा वा तो इस समय में प्रयागराज क्षेत्र में हूं गांव सेंवड़ा है कि बिला्कजस्रा है जिलागराज है वह गवसाला नहीं बना है इसकारथ से किशान बहुत ज्यादा परेशान हैे हर सीजन में खेती उनकी उज़ड़ जाती है क्योंकि गवसाला नहीं होने के कारथ में इतना ता अन्ना जानवर है कि उनकी खेती नहीं तैयार हो पाती है इस समय किसान धान के बीज बोए हुए हैं बेड़ लगाने के लिए रात दिन धान की रखवाली करते हैं नहीं तो वह धान नहीं बच पाएगा यदि एक बार धान चर जाती तो फिर उस तरह से उपजाव नहीं होती है इस कारण से इस समय इतना ज़्यादा बरसाथ है किसानों को चाहे साप खाये चाहे बिछ्चू खाये लेकिन रात दिन रखवाली करते हैं आप हमारे पीछे देख सकते हैं कितना जानवर खेत में आए अभी मोरी तैयार सेलिशत है। अभी लकवार पर इंच सलकाता है, लेकिन घवसालाला होने से अंन ज़ानवार इसी तरह परेशान करते रहते हैं। वहाँ ने हम दबिया ताकत रहे। गोरू में हंका थाय। घवार टाये में हंके थायार स्थाया आता रही है। बारी सुहंदे बाद खसल तैयार होने लगे कि गोरु बर्तारम किसाने लोग आकेंगे और इधर भटकेंगे गोरु मारमर पहार भेजते हैं साथ यहां की कोई सुनने वाला नहीं है हीरा बहारा साल में गौरुवा डिनबर हम रात बर आते हैं। इमार हो जाएं, डॉक्टरीम जाएं, दवा कराएं, बच्चे जो भी जाएं, उनको दवा कराएं। गवसाला नहीं है, गोरु वैरा चर रहे हैं। खेती किसानी के लिए फिर क्या? बड़ा परेसानी है, जब जब चाहता जब जब फिर आ जाता। विजान ठेती बोड़ गई है परसानी है आ तक है लुटा के पर इतना मेहनत करेंगे हैं अरे बहुत मेहनत है अब देखा तारों घेरे है मैंने अपना व्यक्ति करता है उधर तब गेरा यह जो बीच बोइ है और बेड़ बोइ है इसको रात-दिन नहीं लाखेंगे फिर खा जाएगा सभी की यह मतफ़न हजार रूपए लाखे सब खा जाएंगे विशेष विशेष एक दिन ना याद राज में गोरू तो यहां तो प्रेसान तब हां तब कुछ नहीं होगा होगा खा जाएगा खड़की सब खतम हो जाएगा सब्सक्राइब अपना अपना ताकत आते हैं खेती करते हैं अरे बहुत सभी सब्सक्राइब तब परसान है पर कराब होती कि यदि गवसाला बना होता तो गवसाला पर नहीं है तब सब्सक्राइब कर देता है तब सब्सक्राइब कर देता है Here, farmers run for 500 rupees. पैसा खुद अगले यहां वाला है कोई-कोई कीजिए देश कोई चालिस प्रचास भी हावाले हैं किशान लोग तक कोई है कि रो रहे हैं खेती से पूरा साधी-भीवा नोन-तेल सब लकड़ी लेकर यह फर्थे चला रहे हैं खेती नहीं हो तो फिर खेती इसके अलावा कोई रोजगार नहीं है कि हमारे यहां विकासखण में पांच गौसालाएं हैं इसमें जहां गौवंस होते हैं उनको जो है उनकी गौवंसालाओं शिफ्ट किया जाता है एक अभी रेरा में नई गौसाला लगभगबंध कंप्लीट हो गई है ब्रिहत गौसाला उसी में जो भी यहां के जब वहां की व्यक्ति चालू संचालिट हो जाएगी जो भी यहां की गौवन्स है अभी तो उनको वहीं ले जाकर संबस्थित करवा जाएगा और वैसे सर जिन गांव में नहीं तो अलग जानवरों के लिए किस तरह से विवस्था किया जाता है दिखिए जो जहां गांव के सानों के लिए जी गवंस होते हैं उनका उपयोग करते हैं उसके बाद उसको उसे नुर्द को चलै देते हैं कोई सौंद का उपयोग करने वर्ड खोल घूबा चौब नहीं और उनका खुद खुद खिले बार चौड़ देते हैं तो यहां जो भी सिकायते आते हैं जो हां जो सम्भव होता सजिश्वल है उसी गौवसाला ने प्रमिक करना सलिए जाता है और अरसाति ए-द tyro कि और मैं चीज होना मुझे ऐसा कुछ नहीं हुआ है कर दो सब्सक्राइब बहुत जल्द तैयार होकर चलम संचालित होने वाली है तो जो भी गावबान से जो है फॉर लोग नुकसान कर रहे हैं उसको वहीं सबस्क्राइब कर आए जाए आपके ग्राम पंचायत में गौसाला नहीं है इसका रशिक कीसान खेती नहीं कर पा रहे हैं तो दबी क्यूं मेक्सटर में सब्सक्राइब कर सकते हैं कि फाफ परधानी के पूरे हो गए इस गफ्सद आप कहां कहां प्लाई अपने तरफ से किए हैं और क्या कोशिश कहां पाएंगे करवा देंगे करवा दिया हम बल्कि हर गौसालाव में घर भेजते हैं जानवरों को के साथ में अभी अवश्यत फसल भी तैयार लग रही है लग जाएगा इसके बाद देखता है कि जानवर जाए जानवर निकल रहे हैं सब पचास जो है उसी ले जाते हैं कि वहां भी भेजवा देते हैं जब कि खर्चा में गौसाला के लिए रेराम देता वह जब कहते हैं जगह नहीं है खबर लहरिया आपकी खबर आपकी भाषा