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Summary
सीजेपी ने अपने आंदोलन को एक नया रूप देने की तैयारी में है, जिसमें एक नेशनल वाइट कैम्पेन है जो पूरे देश में लोगों की राय जानने का दावा करता है।
From the report
जन्तर मंतर के छात्र आंदोलन के बाद कौकरो जन्ता पार्टी यानी CJP अब अपने आंदोलन को एक नया रूप देने की तयारी में है इस बार न कोई धर्ना है न कोई प्रदर्शन बलकि क्या बोलती पबलिक नाम का एक नेशन वाइट कैम्पेइन है जिसके दहट संगठन पूरे देश में जाकर लोगों की राय जानने का दावा कर रहा है यानि जनता आखिर चाहती क्या है, सिक्षा कैसी हो, नौकरी कैसी मिले, सरकारी संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कितना है और देश में किस चीफ को बदलनी की जरुरत है लेकिन दिल्चस्प बात यह है कि इतना बड़ा राष्ट्री अभियान शुरू करने वाली CJP खुद को राजनितिक पार्टी मानने से इंकार करती है उसका कहना है कि वो चुनाम नहीं लड़ना चाहते बलकि सरकारों पर जनता के मुद्दों को लेकर दबाव बनाना चाहते हैं क्या है पूरा मामला जानेंगे आज किस वीडियो में हाई मैं हूँ प्रगती और आप देख रहे हैं जिस्ट दरसल हाली में CJP ने अपने उफिशल सोशल मीडिया हैंडल्स पर दो पोस्ट जारी किये पहला पोस्टर क्या बोलती पब्लिक अभियान की आउटलाइन बताता है जबकि दूसरे पोस्टर में CJP ने ये बताया कि वो खुद को एक पॉलिटिकल पार्टी नहीं बलकि पब्लिक प्रेशर ग्रूप क्यों कहता है CJP का कहना है कि जंतर मंतर पर हुए हालिया आंदोलन के बाद अब समय सिर्फ प्रदर्शन करने का नहीं बलकि लोगों के बीच जाकर उनकी बात सुनने का है इसी सोच के साथ उसने 1 सितंबर 2026 से पूरे देश में एक National Listening Tour शुरू करने का एलान किया है संगटन के मताबिक उसकी टीम देश के अलग-अलग राज्यों, शहरों और कस्बों में जाकर खासकर युआव से सीधे बाचीत करेगी उनसे पूछा जाएगा कि आज उनके सामने सबसे बड़ी समस्याएं क्या है क्या सिक्षा व्यवस्ता में बदलाव की जरूरत है क्या डिग्री और नौकरी के बीच का फासला बहुत बढ़ चुका है क्या सरकारी संस्थाओं पर लोगों का भरोसा पहले जैसा नहीं रहा और अगर बदलाव चाहिए तो वो कैसा होना चाहिए CJP का दावा है कि इस बार एजिंडा वो खुद तै नहीं करेगा बलकि जनता से बाचीत के बाद तैयार करेगा संगठन का ये भी कहना है कि इस listening tour के दोरान जो भी सुझाव, शिकायते और राय सामने आएंगी उन्हें जोड़कर एक citizen driven youth reform charter तयार किया जाएगा आसान भाषा में समझे तो ये एक ऐसा दस्तवेज होगा जिसमें युवाओ और आम नागरीकों के सुझाओं के आधार पर शिक्षा, रोजगार और साशन से जुड़े सुधारों का रोडमैप तयार करने का दावा किया गया है यानि CGP का कहना है कि उपर बैट कर नीतिया बनानी की बजाए पहले नीचे जाकर लोगों की बात सुनी जानी चाहिए और फिर उसी आधार पर सुधारों की मांग रखी जानी चाहिए ये मॉडल कितना सफल होगा ये भविश्य बताएगा लेकिन फिलाल संगठन खुद को एक ऐसे मंच के तौर पर पेश कर रहा है जो लोगों की राय को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताता है लेकिन CGP का कहना है कि ये चार्टर सिर्फ सिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा इसके लिए उसने अपने अभियान को चार बड़े हिस्सों में बाटा है जिनने वो इस पूरे टूवर की नीव बता रहा है इनमें सबसे पहला है Holistic Education Reform आम तोर पर जब Education Reform की बात होती है तो चर्चा College, University या किसी नई सिक्षा नीती तक ही सीमित रह जाती है लेकिन CJP का कहना है कि अगर बदलाव करना है तो शुरुवात स्कूल से करनी होगी college syllabus basic infrastructure college इससे CJP पूरे सिक्षा तंत्र को एक साथ सुधारने की बात करता है हालांकि पोस्टर में ये विस्तार से नहीं बताया गया कि इन सुधारों के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे लेकिन उनका कहना है कि सिक्षा को टुकडों में नहीं बलकि एक complete system के तौर पर देखा जाना चाहिए Education reforms एक सबसे बड़ी हमारी top priority रहेगा क्योंकि आज हमारी देश की जो भी हालत है वो इसी के वज़े से क्योंकि education priority नहीं है ना वो किसी भी political party की है ना वो सरकार में जो लोग बेटे हुए ना उसकी priority है तो इसलिए education reforms हम चाहते हैं आज की date में हमारे देश में education unaffordable बन चुका है अगर किसी को अपने बच्चे को school में भेजना है admission दिलवाना है private school में सरकारी स्कूलों की हमने दिखा है पिछले 10 साल में 94,000 सरकारी स्कूल बंद कर दिये गये इन स्कूलों को सुधारा जा सकता था रेनोवेट किया जा सकता था लेकिन सरकार ने गेहतर सिर्फ प्रकंट भी सदादा से ज़गीतीयी वास्तव कि हम बदलना चाहते है हम चाहते हैं कि ये जो शिक्षा को इतना expensive बनाया है, schooling को इतना expensive बनाया हुआ है, वो एक तो पहले कम हो जाए इसके बाद आता है दूसरा pillar, जिसे CJP अपने अभियान का सबसे एहम इससा मानता है, इसका नाम है Education to Employment Integration अगर आसान भाषा में समझे तो इसका मतलब है कि पढ़ाई और नौकरी के बीट जो लंबा ग्याब बन चुका है उसे कम किया जाए आज लाखों शात्र डिग्री लेकर कॉलेज से निकलते हैं लेकिन नौकरी के समय उनसे कहा जाता है कि उनके पास इंडॉस्ट्री के हिसाब से स्किल्स नहीं है दूसरी तरफ companies कहती है कि उन्हें eligible candidates नहीं मिल रहे यानि एक तरफ विरोजगारी है दूसरी तरफ skill gap भी है CJP का कहना है कि यही सबसे बड़ी समस्या है और इसी वज़ासे सिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह रोजगार से जोड़ने की जरुवत है इसी सोच के तहट पोस्टर में अकाडमिक करीकुलम को री इंजिनियर करने की बात कही गई है यानि जो पढ़ाया जा रहा है उसे इस तरह बदला जाए कि चात्र सिव परिक्षा पास करने के लिए नहीं बलकि असली दुनिया की जरूरतों के हिसाब से तयार हो इसके साथ साथ vocational training पर भी खास जोर दिया गया है यानि किताबों की पढ़ाई के साथ ऐसी practical skills भी सिखाई जाएंगी जिनकी job market में असल में जरुरत हो हालांकि इसे हिस्से में poster की एक line ये भी लिखी है कि सिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो guaranteed market aligned job opportunities की तरफ ले जाए degree से ज़ादा employability पर है सिक्षा और रोजगार की बात करने के बाद CJP का अगला focus उन संस्थाओं पर जाता है जो सीधे देश के लोकतांत्रिक धाचे से जुड़ी है क्या बोलती public अभियान सिर्फ education reform तक सीमित नहीं है बलकि institutional accountability यानि संस्थाओं की जवाब देही के लिए भी है अगर CJP के दूसरे पोस्टर को देखे तो यहां सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जब संगठन देश बर में अभ्यान चला रहा है लोगों को जोड रहा है बड़े राश्ट्रे मुद्धों पर अपनी राय रख रहा है और दूसरे संगठनों के साथ मिलकर काम करने की बात कर रहा है तो फिर वो खुद को राजनीतिक पार्टी क्यों नहीं मानता इसका जवाब में CJP का कहना है कि उसके बहुत से समर्थकों ने उसे चुनाव लड़ने की सलहा दी उनका मानना था कि अगर CJP वास्तव में बदलाव चाहता है तो उसे सीधे चुनावी राजनीती में आना चाहिए लेकिन CGP का कहना है कि उसने फिलाल जान बूज कर चुनावना लड़ने का फैसला किया है अब सवाल है कि ऐसा क्यों? CGP का तरक है कि अगर वो चुनावी राजनीती में उतरता है तो उसका पूरा फोकस बदल जाएगा अब इतक जो समय और उर्जा, सिक्षा, रोजगार और जन आंदोलनों में लग रही है उसका बड़ा हिस्सा टिकेट बाटने, उमीदबार चुनने, चुनाव प्रचार करने और सीटे जीतने की कोशिश में खर्च होने लगेगा यानि संगठन का कहना है कि उसकी प्रात्मिकता सत्ता हासिल करना नहीं बलकि सत्ता पर जनता के मुद्धों के लिए दबाव बनाना है जैसे वो खुद को political party नहीं बलकि public pressure group कह रहा है pressure group का मतलब होता है कि कोई संगठन खुद सरकार बनाने की कोशिश नहीं करता लेकिन सरकारों और नीती बनाने वाली संस्थाओं पर किसी खास मुद्दे को लेकर लगातार दबाव बनाता है दुनिया के कई देशों में ऐसे समूख काम करते हैं भारत में भी किसान संगठन, व्यापारिक संगठन, चात्र संगठन, परियावरण समू और कई नागरिक संगठन अलग-अलग मुद्धों पर सरकारों से बदलाव की मांग करते रहे हैं इसी सोच के तहट CJP ने नागरी को चात्र संगठनों, सिविल सुसाइटी ग्रुप्स और दूसरे सामाजिक आंदोलनों से साथ आने की अपील की है संगठन का कहना है कि अगर अलग-अलग लोग अपने अलग-अलग मुद्धों पर अलग-अलग लड़ते रहेंगे तो उनका असर सीमित रहेगा लेकिन अगर सिक्षा, रोजगार, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे साज़ा मुद्धों पर एक बड़ा मंच तयार हो जाए तो सरकारों पर जादा प्रभावी तरीके से दबाव बनाया जा सकता है से सीजेपी अपने अभिहान को सिर्फ अपनी संगठनात्मक यात्रा नहीं बलकि एक बड़े राष्ट्रे नेटवर्क बनाने की शुरुवात के तौर पर पेश कर रहा है हालंकि इस पूरे अभिहान को लेकर कई सवाल भी मने हुए हैं CJP पर बढ़ सकती है फिलाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि 1 सितंबर 2026 से शुरू होने वाला क्या बोलती पब्लिक नैशनल लिस्टनिंग टूअर्ड सीजेपी के लिए सिर्फ एक अभियान नहीं बलकि उसकी अगली राजनीतिक और सामाजिक देशा तैय करने वाला सबसे बड कि चात्रों को जहां बड़ी संख्या में चात्रों युवाओ और कई सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन मिला, वहीं दूसरी तरफ लोगों ने संगठन की विचारधारा, उसकी रणनीती और उसकी राजनीतिक रुख पर भी सवाल उठाए, यानि आंदोलन के साथ साथ सोशल मीडिया पर भी CJP को लेकर अलग अलग राय सामने आती रही इसी भी ज्जारकंड में भरती परिक्षाओं और कथित अनियमितताओं को लेकर चात्रों का आंदोलन तेज हुआ इसके बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हुई कई लोगों ने सवाल उठाये कि अगर CJP खुद को देश बर के चात्रों के आवाज बताता है तो जारकंड के आंदोलन पर उसकी तरफ से वैसी सक्रियता क्यों नहीं दिखाई दी जैसी चंतरमंतर आंदोलन के दौरान देखने को मिले थी कुछ लोगों ने भी कहा कि जिन लोगों ने दिल्ली के आंदोलन का खुलकर समर्थन किया था वो ज्जारखंड के मुद्दे पर उतने मुखर क्यों नहीं दिख रहे इन सवालों के बीच CJP के संस्थापक अबिजी दिपके ने भी अपना पक्ष रखा उन्होंने कहा कि वो जारखंड के छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हैं और किसी आंदोलन के समर्थन का मतलब हमेशा उसका नेतृत करना या हर जगा व्यक्तिगत रूप से मौजूद होना नहीं होता। उनका कहना था कि संगठन के सदस्य स्थानिय स्थर पर छात्रों के संपर्क में है और हर राज्य के आंदोलन को दिल्ली से संचालित नहीं किया जा सकता. यानि अब CJP को लेकर दो तरह की तस्वीर दिखाई देती है एक तरफ संगठन अपनी क्या बोलती पबलिक अभियान के जरिये खुद को एक राष्ट्रे पबलिक प्रेशर ग्रूप के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर उसके समर्थक और आलोचक दोनों उसके हर कदम और हर बयान पर अपनी तरह तरह के प्रतिक्रिया दे रहे हैं ऐसे में 1 सितंबर से शुरू होने वाला ये National Listening Tour सिर्फ CJP के लिए ही नहीं बलकि इस बात के भी एक परिक्षा माना जाएगा कि क्या वो जंतर मंतर के बाद बने अपने समर्थन आधार को देश भर में विस्तार दे पाता है या नहीं फिलाल इतना जरूर कहा जा सकते है कि क्या बोलती पबलिक CJP का अब तक का सबसे बड़ा Outreach कैमपेइन है इसके जरिये संगठन सिक्षा, रोजगार, संस्थागत जवाब देखी और युवाव से जुड़े मुद्दों पर राश्ट्रे इस तर पर समवार शुरू करने का दावा कर रहा है लेकिन यह अभियान जमीन पर कितना सर छोड़ पाएगा, यूथ रिफॉर्म चार्टर कितना प्रभावी साबित होगा और क्या CJP भविश्य में भी खुद को सिर्फ एक पब्लिक प्रेशर ग्रूप तक सीमित रखेगा या उसकी रणनीती बदलेगी इन सवालों के जवाब आने वाले समय में मिलेंगे इस मुद्दे को लेकर आप क्या सोचते हैं हमें कॉमेंट करके जरूर बताए तेज़ दुनिया और आप से जुड़ी हर खबर के लिए देखते रहे जिस्ट