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Summary
सरकार दो हजार रुपये से ज्यादा पेमेंट पर फी चार्ज करेगी, ट्रम्प के दबाव में; UPI की अट्रैक्टिवनेस कम हो जाएगी; Mastercard और Visa को फायदा होगा; सरकार का फैसला नागरिकों के हित में नहीं है; जर्नलिज्म ऑफ क्राइसिस की स्थिति है
“सरकार का फैसला नागरिकों के हित में नहीं है”From the report
दो हजार रुपए से ज्यादा अगर आप पेमेंट करते हैं तो आपको एक फी पे करने पड़ेगी फिर से डाउनल्ड ट्रम्प के आगे झुक रही है सरकार क्यों झुक रही है खुद भी जानती है अच्छे तरीके से छोटे बड़े जिस तरह के कारोबारी हैं उनके लिए लोग मान जाते हैं तो एक तरह से सरेंडर है तो क्या अब अगर मैं इनको पेश करना चाहूं अपने सब्जी वालों को 100 रुपए 200 रुपए इस पर नहीं लगेगा लेकिन अगर मैं किसी को 2000 रुपए पेश करना चाहती हूं तो मुझे पैसे देने पड़ेंगे पॉइंट पर सेंट हो या पॉइंट सेवन पर सेंट निर्मला सीतरमन ने उनका जवाब भी आए फिर अपने पेशन भी नहीं करता है किसी ना किसी तरीके से कस्टमर को पासवांड मर्चन भी वह प्राइस को प्लेट करता है वह थोड़ा प्राइस बढ़ा देगा और फिर वह अब्जॉब कर लेगा कैसे फायदा होगा मास्टर कार्ड या फिर वीजा को क्या यह कार्ड का पूरा एकॉनिमी शुरू हो जाएगी कैसे होगा यह वह चाहते हैं कि वह ऊपर वाले लेवल आए थोड़ा 2000 से ऊपर जैसे आपने बताया या 3000, 4000, 5000 वहाँ पे क्या होगा कि वहाँ पे अगर ये फी चार्ज होना शुरू होगा तो जो अट्रैक्टिवनेस जो UPI का वो चला जाएगा और Mastercard और Visa वहाँ उनसे कंप्लीट करने में सक्षम हो जाएगे भी आप फ्री में यह आपने शुरू करा था और यह आपने लॉ में उतार जाएगी इसमें मर्चन डिस्काउंट रेट नहीं होगा तो अपने विजिन को डायलूट क्यों कह जा रहा है मेरा यह मान कहना है इरान इतना बड़ा देश नहीं है, पूरी दुनिया से कटीखुई एकाउनमी है, और ये समझीए कि वहाँ उनका अपना गूगल, अपना ट्विटर, अपना फेस्बुक, अपना जीमेल, अपनी गूगल ड्राइव, पूरा उन्होंने अपना डिजिटल यूनिवर्स बनाय इसी सवाल का जवाब दूंढ रहे हैं उनको मिल लिया और कि मोदी जी की क्या कंपल्चन है कि अमेरिका के सामने इतना इनको झुकना पड़ता है नमस्कार दवायर में आपका स्वागत है् मैं हूँ आर्फा खानम शेरवाणी अब की वार सरेंडर सरकार लगतार बताते बताते मू सूग गया है अपने ही नागरिकों के हित में फैसला ना करके उनके अहित में फैसला कर रही है सरकार یہ ہیڈ لائن پڑھی ہے جی ہاں وہ کہتے ہیں جرنلزم آف کریج لیکن جس طرح کا یہ اخبار پچھلے دنوں سے چل رہا ہے اکثر سرکار کے خلاف کوئی خبر چھاپنے کو تیار نہیں ہوتا اور یہ ہیڈ لائن دیکھئے ان کی کہتے ہیں the hidden trump factor in india's proposed new upi transaction levy اب آپ سوچئے کہ یہ upi اب یہ بتایا جا رہا ہے کہ سرکار ایک نیا قانون لانے جا رہی ہے جہاں اگر آپ دو ہزار روپے سے اوپر کا transaction کرتے ہیں تو آپ کے لیے خطرناک بات یہ ہوگی کہ آپ کو ایک fee pay کرنی پڑے گی یعنی آپ کوئی کپڑا خرید رہے ہیں فون خرید رہے ہیں کوئی بھی چھوٹی موٹی چیز آج کل دو ہزار روپے میں آتا ہی کیا ہے آپ گھر پیسے بھیج رہے ہیں آپ کچھ بھی کر رہے ہیں دو ہزار روپے سے زیادہ اگر آپ پیمنٹ کرتے ہیں تو آپ کو ایک فی پے کرنی پڑے گی کیوں کرنی پڑے گی کیونکہ ڈانلڈ ٹرمپ یہ چاہتے ہیں کہ مفت خوری بند ہونی چاہیے بھارت میں بھارت کی یہ پوری جو ایکانومی یو پی آئی کے اردگیت تیار ہو گئی تھی روپے کے اردگیت تیار ہو گئی تھی اس کو ختم کر دینا چاہتی ہے اور اس کے علاوہ صرف بھارتی نہیں کئی انہیں دیشوں سے بھی انہوں نے دباؤ بنا کر یہ کروانے کی کوشش کی کئی دیشوں نے انکار کر دیا ایک دو چھوٹے موٹے دیشوں نے اسے سویکار کر لیا اور دنیا کے سب سے بڑی ایکانومی جی ہاں دنیا کی سب سے بڑی ایکانومی نہیں سب سے بڑی آبادی والا دیش اور بڑی ایکانومی میں سے ایک بڑی ارت فیوستاؤں میں سے ایک چوتھی سب سے بڑی ایکانومی وہ اب اس بات کو کہہ رہے ہیں کہ اب اس پر فیس لگائی جائے گی کیا ہے پورا معاملہ امریکہ نے اس بات پر کاروپ لگایا تھا اور کئی بار ابجیکشن ظاہر کیا تھا کہ یہ جو ہمارا یو پی آئے کا پورا کارکرم ہے روپے اور سب جو ہم چھوٹی موٹی ہم جو یہ ایپس ہیں کے ذریعے چھوٹے پیمنٹ سے لے کے بڑا پیمنٹ آپ ایک روپے بھی دے سکتے ہیں اور ایک لاکھ روپے بھی دے سکتے ہیں یہ سب جو کرتے ہیں اس سے ان کی جو بڑی کمپنیاں ہیں جیسے ویزا ہے یا ماسٹر کارڈ ہے ان کے ساتھ تتھا کتھت روپ سے برابری کا سلوک نہیں ہو پا رہا ہے کوٹ ان کوٹ برابری کا سلوک تو اس لیے اگر اس پر فیس لگائی جائے گی تو لوگ کوشش کریں گے کہ پھر وہ ویزا اور ماسٹر کارڈ کے ذریعے ان کو استعمال کریں گے پھر جو امریکہ کی بڑی بڑی کمپنیاں ہیں ان کو فائدہ ہوگا ایک بار پھر سے ڈانلڈ ٹرمپ کے آگے جھک رہی ہے سرکار کیوں جھک رہی ہے خود بھی جانتی ہے اچھے طریقے سے اب آپ کو یہ بتائیے کہ یو پی آئے اور روپے پر فی ایم ڈی آر لگائی جا سکے امیر ایم ڈی آر کیا ہوتا ہے ڈیجیٹل پیمنٹ ہونے پر دکاندار سے جو چھوٹی فیس لی جاتی ہے پیمنٹ کمپنیوں کی اس سے کمائی ہوتی ہے اب پورے طریقے سے آپ یہ سمجھئے کہ چھوٹا موٹا کاروبار چلیے سو دو سو کا تو نہیں ہوگا لیکن میں نے جیسے کہا کہ دو ہزار روپے میں آتا ہی کیا ہے اگر آپ چھوٹا موٹا پیمنٹ بھی کرتے ہیں دو ہزار روپے سے اوپر کا تو سیدھے طور پر اب یہ چاہیں گے کہ اس کے بدلے جو بھارت کی کمپنیاں ہیں ان کو فائدہ ملنے کے بدلے ویزا اور ماسٹر کارڈ کو ملنا چاہیے تو پورے طریقے سے آپ سمجھئے کہ اب ہماری ارتھ وستہ کو تباہ کرنے کی ایک اور نیا کارکرم یہ ہمارے موڈی جی لے کر آ رہے ہیں ایک نیا قانون لے کر آ رہے ہیں اس پر حد تو یہ ہے کہ وہ کمپنیاں اور وہ سنستھائیں جو वह लाठियां ढंडे पेलेट गन्स एक एप्पॉटी सेवन चलाकर पिछ गया तो मैं तो यह यूपीआई का मामला भी करके बच जाऊंगा मुझे क्या लेना देना है मुझे क्या लेना देना है कहा जा रहा है कि जनादेश और ग्यानदेश जी हां जनादेश जनादेश जो आदेश देते हैं किसी की सरकार बनी उन्हें इस बात से कोई फिक्र नहीं है इसलिए हमारे गृह मंत्री दो हफ्ते से ज्यादा गुजर चुके हैं वह इतनी अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते कि संसद में आकर जवाब दें लेकिन यह जो खबर है आम आदमी को थर्रा देने वाली खबर है छोटे बड़े जिस तरह के कारोबारी हैं उनके लिए भी यह एक बुरी खबर के तौर पर यह आ रही है खबर अब इसको कैसे समझा जाए कितना इसमें अंतराश्ट्य दबाव है वायर के फाउनिंग एडिटर हमाई साथ जुड़ गए हैं वेरों बहुत ही हस्यासपत लग रहा है कि सरकार एक के बाद एक जिस तरह का ब्लंडर कर रही है अभी देख रहे हैं हम की नेशनल सिक्यॉरिटी के मुद्दे पर आप देखिए किस यहां से छात्रों पर लाठियां बरसाई उसके बाद पूरे पार्लिमेंट से अमित शाह गायब है उनको समझ में नहीं आ रहा है कि जवाब क्या दिया जाए अब दूसरी तरफ इकनॉमिक फ्रंट पर आप देखिए वह पुलिटिकल सोशल फ्रंट है तो एकनॉमिक फ्रंट पर एक ऐसा मुद्धा जिसको लगतार यह कहते रहे कि हमारे पास कुछ नहीं है कम से कम यूपी आए तो है मुझे याद आ रही है एक बड़ी मशूर एंकर जो अपने धीमे-धीमे लहजे में बात करती हालांकि वही दक्षण गांधी फाशीवादी वही विचार उनका है वह कहीं आई किन्हों उक्सफॉर्ड में के हमारे पास भरेध पर सबसे बड़ी स्क्सेसी है कि हमारे पास यू पर आए है हमारा मजदूर हमारा किसान हमारा ठेकले वाला लुट पर पैसे पर कर सकता है तो ऐसे में क्या ऐसे बन पाए बनाई है सरकार पर कि मजबूर हो रही है वह अजय को बहुत है यह बात है क्योंकि जो आत्मनिर्भरता का यह जितना दावा करते हैं यह सरकार कर रही है पिछले कई सालों सब्सक्राइब करते हैं अगर उन्हें पोषण है और इन्होंने दुनिया में पढ़ेगी पढ़ेगी में सरकारी एक public sector project है national payment corporation उनके द्वारा यह implement किया गया और दुनिया में अर्फाग जो number of transactions आप देखें पूरे दुनिया में उसका कम से कम 50% share UPI का है और 23000 transaction 23000 transaction UPI 50 share लिया रहा है क्योंकि सीधी सी बात है ट्रम साहब से पूरा प्रेशर है ट्रेड डिल अभी बातचीत चल रही हुई भी नहीं है और ट्रेड डिल में कई अडचनें आ रही है और अभी पीछे आपको याद होगा यूएस कांग्रेस में लॉ पास दिया कि अगर रशिया से तेल खरीदें तो उस पर सौ परसेंट तक टारिफ लगाने की पावर ट्रम को दी जा रही है तो उसमें चाइना इंडिया और अजरबयजान और एक दो देश का नाम है आप सोचिए यह समसे जाकर यह गले मिलते और हमें चाइना साथ और अजरबयजान के साथ उन्होंने उनके खेमे में डाल दिया है कि सौ परसेंट अब उसमें अब यह और चीज आई है प्रेशर आ रहा है इंडिया पर कि आप मास्टर कार्ड और जो वीजा बड़े-बड़े पेमेंट सर्विस है वह इंडिया पर टॉप पर उनपर एक सीचर होती है वर्ष दिसकाउंट ही बहुत आता है वह यूपीआई पर चार्ज हो राक्कि यूपीआई का जो जो जो सर्विस जो है जो एक तरह से आज फ्री में जो मर्चेंट हो और सब्सक्राइब नाएं तो आप यह सोचिए और यह सरकार जो आत्मनिर्भरता का दावा करते हुए 2019 में इन्होंने अर्फल लॉल आया था इन्होंने यह यूपीआई का जो को इंप्लीमेंट करने के लॉग में इन्होंने खास एमेंडमेंट यह था कि मर्च डिस्काउंट रेट जीरो होगा वह चार्ज नहीं होगा अब उसको उसको उल्टा कर रहे हैं या तो उस वक़त मोदी मोदी जी और यह फानांच मिनिस्ट्री और इनके जो पॉलिटिकल जो एडवेजर्स है उस वक़त जब उन्होंने लॉग पास किया कि जीरो होगा तब एक लॉजिक रहा होगा कि इसको बढ़ावा देना इंडिया का एक बड़ा सिक्सस हो रही है आज उसको रिवर्स कर रहे हैं तो या तो तब तब सही थे या आज सही है तब गलत है आज गलत है तो ऐसा नहीं सकता कि आपने तब वह कराओ और आज और यह अर्पा कि बिल्कुल कि अमेरिका का पूरा प्रेशर आ रहा है और मैं आपको यह बता दूं कि ब्राजिल के ऊपर भी प्रेशर आ या विद्यू पेमेंट कंपनी है वह भी नंबर दो पर इंडिया के बाद उनके भी बड़े ट्रांजेक्शन होती है तो पर प्रेशर आ रहा है तो यह बहुत ही मतलब मैं कह रहा हूं मैं कहूंगा इस परेंडर का मामला है अगर यह लोग मान जाते हैं तो एक तरह से सरेंडर है और इस इनके जो आरेसेस स्वदेशी जागर एंड मंच यह भी कई स्टेटमेंट बड़े-बड़े अमेरिकी कंपनी है उनके तुल्ला में इंडिया को अपने एक आत्मनिर्भर और इंडिपेंडेंट पेवेंट सिस्टम खड़ा करना अब वह भी चुप बैठे हुए वह सारे स्वदेशी जागण मंच में यह जितने लोग हैं गुरुमूर्ती ऐसे लोग जो बड़ा दावा करते हैं कि आत्मनिर्भरता का प्रोजेक्ट हुआ है अब इनसे सवाल कोई पूछे कर क्या रहे हैं