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Summary
देश भर से करोडों लोग अयोध्या जाकर राम जन्मभूमी मंदिर में अपनी मेहनत की कमाई से चढ़ावा देते हैं। हाल ही में राम मंदिर से चंदा चोरी होने की खबरों ने लोगों की भावनाओं को बेहत ठेस पहुँचाई हैं और मंदिर को कितनी इमानदारी से चलाया जा रहा है, उस पर बड़े सवाल खड़े कर दिये हैं।
“corruption thrives in secrecy, जहां पारदर्शिता नहीं होती, वहां भ्रष्टाचार पनपता है।”From the report
देश भर से करोडों लोग अयोध्या जाकर राम जन्मभूमी मंदिर में अपनी मेहनत की कमाई से चढ़ावा देते हैं। हाल ही में राम मंदिर से चंदा चोरी होने की खबरों ने लोगों की भावनाओं को बेहत ठेस पहुँचाई हैं और मंदिर को कितनी इमानदारी से चलाया जा रहा है, उस पर बड़े सवाल खड़े कर दिये हैं। ये तो सभी मानते हैं कि corruption thrives in secrecy, जहां पारदर्शिता नहीं होती, वहां भ्रष्टाचार पनपता है। है राम मंदे ट्रस्ट के कामकाज में गोपनियता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं अगर देखा जाए तो जगनाथ मंदिर वैशनो मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर सभी dedicated कानूनों के तहत बनाए गए हैं जिससे उनके काम काज पर legislative oversight यानि विधायका की निगरानी बनी रहती है और सभी सूचना के अधिकार कानून के दायरे में आते हैं। लेकिन सुप्रीम कोट की अयोध्या जज्मेंट के बाद केंद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमी मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना कानून बनाकर नहीं की, RTI CCTV कैमरा की फूटेज की कॉपी लेना चाहे या चढ़ावे की गिंती के लिए जो SOP, Standard Operating Procedure, State Bank of India और Ram Janmabhoomi Trust के बीच साइन हुआ है, उसकी कॉपी लेना चाहे तो वो सूचना के अधिकार कानून के तहट नहीं ले सकता. मतलब बिलकुल PM CARES फंड की तरह गोपनियता बनाई गई है तो ये तो एक ट्रेंड नजरा रहा है मोधी सरकार में बड़े बड़े फंड, संस्थाएं जिनमें लाखों करोडों रुपे पबलिक से एकठे किये जाते हैं और जिनके बोर्ड पर प्रधानमंत्री खुद बैठते हैं या उनके चुने हुए लोग बैठते हैं, उन्हें ट्रस्ट के रूप में सेटब किया जा रहा है और लोगों को कहा जा रहा है कि वे RTI एक्ट के तहट उनसे कोई सूचना नहीं ले सकते हैं।