Part of a cluster — open full story hub

Summary
उच्च शिक्षा मंत्री सुdivya सोनु ने कहा कि नौकरियों की सीमा है, उसी सीमा में नौकरियां दी जा सकती हैं।
“नौकरियों की सीमा है, उसी सीमा में नौकरियां दी जा सकती हैं।”From the report
क्या नाम है तुम्हारा आशिका मिंच आशिका रोड़ी बच्चे रो मत यह वीडियो में पहुंचाऊंगा आप कहां पढ़ते हो बताइस को पढ़ना प्रखंड महवाडाड़ हुआ प्रखंड में एक संजेविर कॉलेज वहीं से पढ़ रहा है ग्राज्योशन कर पॉलिटिकल साइंस तुम दिल्ली आ जाओ तुम दिल्ली आजा अच्छे काम कर सुनो सुधानशु का नंबर तुमको दे दूँगा तुम दिल्ली आजा तुमको पढ़वाएंगे वहाँ पर दिल्ली ठीक है खुश रहो जारखन का जो भी नोकरी है क्यों भरोसा नहीं जगता है युवाओं का ज्जारखण नौकरी जो तयारी करना चाहते हैं। मतलब, पहले मेरा दिमाग में आता है कि हम सेंट्रल का तयारी करें। ज्जारखण के प्रति इतना क्यों है कि मतलब, बच्चा-बच्चा हो गया, चाहि युवा हो गया, मेरे सब बड़े दीदी भाईया लोग आज तक जोब का तैयारी कर रहे हैं। साधी नहीं हो रहा है बहुतों का। दो चीज़ें हैं बेटा, इस बात को समझना होगा। एक तो, नौकरियों की जो सीमा है, उसी सीमा में नौकरियां दी जा सकती हैं, सारे लोगों को नहीं मिल सकती है। होता क्या है कि गड़बड़ी या विसंगती उभर कर सामने दिखती है, जो हुआ वो नहीं दिखता है। साले छे वर्षों के कारेकाल में हेमन सुरेन ने अगर कम नौकरियां दी होंगी तो लाखों में नौकरियां दी हैं, वो नहीं दिखता है। लेकिन अगर कहीं गलती, गड़बड़ी होती है, तो वो तुरथ दिखता है। मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा और बड़ी मजबूती से दोहराकर कहना चाहूंगा, एक बार इनसों पहले बोल चुका हूं, फिर बोलना चाहूंगा, कि छटी से चोड़हमी जेपीससी हेमन सुरण ने कराई। तुम पढ़ने वाली लड़की हो, तुमको मालूम होगा कि चोड़ा से उननिस के कारेकाल में एक भी जेपीससी के परीक्षा नहीं हुई थी। हम लोगों ने 2021 में सबसे पहले 6-10 जीपीसी कराई, और अभी 14 जीपीसी की तरफ हम अग्रसर थे, जहां इस 14 जीपीसी में कुछ अनिमित्ताओं की बातें आ रही हैं, जिसके जाच चल रही हैं.