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Summary
किसानों ने 15 दिन की बारिश से खुशी जताई, खेतों में दवाई डाली जा रही है, बारिश के बाद चारा मिटाने के लिए दवाई डाली जाती है, किसानों ने बताया कि बारिश के बाद दवाई डालने से फसल अच्छी होती है, दवाई डालने के लिए टंकी में पानी भरा जाता है और मशीन से दवाई डाली जाती है
From the report
अज़कार दोस्तों मैं स्यामकली खबर लहरिया से हमारे खबर लहरिया लाइव में आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत है जैसे कि आप जान रहे हैं कि 15 दिन बारिश नहीं हुई है और किसान बहुत मयूस हो गया था लेकिन दो दिन से लगातार बारिश हो रही है जिससे किसानों की चहल पहल खेतों में दिखने लगी है मेरे पीछे किसान भी है आप देख सकते हैं कि यह किसान है और यह किसान अपने खेतों में डबा डाल रहे हैं चुकी बारिस होई है और बारिस थी अब होती है तब ही दवा डालिजाती है जब भी वह काम كरती है खेत में जो by वह चारा मिटाने के लिए तो आइए हम किसानों से कुछ मिलते हैं कि किस दवाई डाल रहे हैं और दवाई डालने का फायदा क्या है क्योंकि पहले ज्यादा तर किसान अपने हाथों से खुरपी लेकर निदाई गोड़ाई करते थे अब तो बारिश होने लगी बारिश नहीं लगता रख जाए आपका क्या नाम है आपका थोड़ी से आपकी साहन नहीं आप किसान है कितनी केती किए हैं क्या हुए हैं तो जब बारिश नहीं हो रही थी तो किस तरह से आप पानी पानी लगाने का और यह बारिस में कितना फरक होता है बार पानी अच्छा लगाव जमीन बेड़ जाता है अभी क्या कर रहें खत्म हो जाता है पहले तो हमने बहुत देखा है कि लोग खुरपी लेकर निदाई-गुड़ाई करते हैं अभी भी हो रहे हैं तो दवाई क्यों डाल रही है जल्दी चारा खत्म हुआ ठीक है भाईया मैं आगे घुजाओ तो देख सकते हैं ये भाईया तंकी कि यह देख सकते हैं कुछ बात करते जाएं क्या नाम है आपका कहां के हैं भाईया जी अच्छे यह कब से दबाई कब डाली जाती है रुक जाए थोड़ी से आपको नाल ही लीजिए फिर बात करते हैं कर दो कर दो कर दो रुख जाए भाईया थोड़ी से रुख जाए बंद कर दिया अ जी भाईया दवाई कब डाली जाती है आप कहां पर है खेतों में खेतों में तो क्या डाल रहे हैं दवाई तो यह चारा कब चारा में क्या होता है रूप फसल को खत्म होता है तो कहां से लाते हैं दावा बाजार ुझे कितनी मारी डालते हैं कितनी कितनी कितनी मारी डाले जाती है दो बार डाल सब्सक्राइब जाती तो मर सकता है तो दूबारा नहीं तो आप बारिश हो गई है किस तरह से आप लोग तो बहुत बहुत मुंखली कई नुष्कान हो गया 15 दिन लगा तरगनवत ना पूजा भी नहीं जाए था अब देखो अब अरे आल ली पकड़े है बारिस नहीं हो रही थी तो कि इस तरह से क्या लगता था आप लोगों किसानों को लगता था वरस उजाद सीधी सब्सक्राइब को अब बहुत कितने आपके गांव में किया दावाई डाल रहे हैं तभी लोग डाल रहे हैं कैसे कारण कितने से आपके यहां दवार का इस्तेमाल होता है नहीं मतलब कई साल से आप देख रहे हैं तो देख सकते हैं वह जो दीदी कह रही है कि मैं अपना चेहरा नहीं दिखाऊंगी और तू मैं पानी ला रही है अव जो इसका टंकी में भरने के लिए और टंकी में पानी भरेंगी और दवा डालेंगे और जो भया लोग हैं वह नथ में आफ मशीन बांधकर ददा लेंगे और एक भयर है तो वह एक जिनारी लगा रहे हैं तो कहां से दवा पड़ गई कहां से दवा नहीं पड़ी हुए चलो मैं उनको दिखाती थी कल दिया भाई रोको हुआ है कि यह की मातूक के लिए हमारा आरुख नहीं है कि भाईया क्या नाम है आपका शुक देव भाईया खोलीया कहा कि लिए हो रोधा रुकाना ना भूला तो इसको कहीं चाहे इससे क्षेत्र में क्षेत्र ना जाएगा चाहे कि यह एक चिनहारी बना रहा है थे आपके गांव में कितने लोग ऐसे दवा डाल रहे हैं काफी लोग सब्सक्राइब करते हैं कि यदि बारिश नहीं होती तो तो दवाई नहीं डालते बारिश का भी शब्द कर रहे थे अब बारिश हो गई है तो कैसा लग रहा है अब दवा डाल रही है तो यह यह जो भाईया है ना इसलिए यह आम कि यह देखो झाल कर दो कि आपको हर खेत-खेत किसान मिलेंगे करते हुए क्योंकि बारिश हो गई है इसलिए और अगर बारिश नहीं हुई थी तो किसान अपने खेतों में नहीं दिख रहे थे और जब मैंने इन किसानों से बात किया इन किसानों का जाना है कि बारिश नहीं हुआ अभी तक हुई है यानि 15 दिन तक नहीं हुई है जिससे फसल काफी प्रभावित हुई है उतनी बड़ी नहीं है अगर लगातार बारिश होती तो फसल थोड़ी बढ़ जाती और अच्छी होती है आप रहे हो यह देखो यह मूंफली की यह मूंफली के पैड़ है यह और यह मूंफली के चारा के ओजे से नहीं रहे हैं इसीलिए यह दवा डाल रहे हैं भाईया अ है और इनका कहना है कि हमने दो दूं बारी तीन तीन बारी दवा डाल चुके हुए हैं लेकिन बारिश अगर होती तो हमारे क्षेतौं में चारा नहीं रह जाता बारिश नहीं हुई है इसलिए ज्यादा चारा है और अब बारिश हुई है तो हमें दबाव डल रहे हैं और जितने भी गाऊं के किसान हैं वह अपने-अपने खेतों में मिलेंगे नहीं मिलेंगी लेकिन खेतों में मिलेंगी आपको मैं दिखा रहा हूं कि जहां पर पहले बारिश होई थी और वहां पर दावा पड़ गई थी तो देखो यहां पर कम चारा आ है कि देखो अब यह है 14 लेकिन कम है इतनी महंगाई होने के वजह से भी जो पहले खेती किसानी होती थी जैसे खुरपी से निदाई होती थी अब ज्यादा कह रहे हैं कि मजदूर नहीं मिलते हैं और महंगाई भी हो गई है इसलिए दावा थोड़ी सस्ती पढ़ रही तो हम लोग दावा ही डालते हैं नहीं तो जो कि यह जो फसल बोही हुई है ना यह खुरपी की निदाय पाथ अलग है जो नदाई में फसल ज्यादा होती है और इसमें तो कम होती है लेकिन कुछ होती है स्कूल चलो भाई देख रहा हूं दवा डाल रहा है दिखाते हैं यह दवा है