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Summary
प्रशांत किशोर ने बिहार के अंदर भाजपा के सबसे मजबूत किले को भेदने में काम किया, भाजपा के आत्मगाती कदम ने भी परशांत किशोर के जीत सुनिश्चित की, PK की जीत के माइन हैं: PK की जीत से जादा भाजपा की हार है, PK ने ऐसी रन्नीती अपनाई जिससे वो बिहार के अंदर भाजपा के सबसे मजबूत किले को भेदने में काम आया
From the report
पौरानिक कथाओं का रेफरेंस देते हुए हम अकसर कहते हैं कि एहंकार तो रावन और हिरन कश्पू का भी तूट दिया था। मगर कल युग में बीते 10-12 सालों से हम यह मानने लगे थे कि यह पंक्तियां बीते जमाने की बात हुए। भारत कागजों पर तो लोकतांतरिक देश ही रहा लेकिन सत्ता के चरित्र ने उसकी आत्मा को कुचलना शुरू कर दिया थी। केंदर में बैठी पार्टी समयधानिक संस्थाओं और स्टेट मशिनरीज का इस्तमाल करके हर गेंद को अपने पाले में डाल ले रही थी। मगर सिर्फ 10 दिन के भीतर इस देश में दो ऐसी घटनाएं हुई जिसने लोकतांतरिक मुलियों में जनता के भरोसे को मजबूत हुई। पहली घटना 26 जुलाई को हुई जब छातर आंदोलन के दबाव में शिक्षा मंतरी धर्मेंद प्रधान को इस्तीफा दिना। स्तीफे के बाद सत्ता का हैंकार तो टूटा लेकिन उसमें भी एक स्क्यूज जोड़ दिया गया कि विदेशी ताक्तों के जरिये अराजकता न फैले इसलिए देश हित में यह फैसला लिया गया मतलब जनता के लिए यह बेहर जरूरी था कि वो इलेक्टुरली भी इस तत्य भाजपा तीन दशक में कभी नहीं आ रही थी वह शीट जहां विपक्षी दल भाजपा को क्लियर वॉकअवर देती थी वह शीट जिसके बारे में यह चर्चा तेज रही कि भाजपा यहां से कुट्टा-बिल्ली को भी लड़ा दे तो वह जीत जाएगी वो सीट जो भाजपा के राश्ट्रिय अध्यक्ष के लिए सबसे बड़ी प्रतिष्ठा का सवाल था। जहां बीते एक महीने से भाजपा के दर्जनों विधायक, सांसद, मंत्री और मुख्यमंतरी सहेद खुद नितिन नवीन कैम्प कर रहे थे। डोर टू डोर कैमपेइनिंग हुई, लगभग एक एक मौजूद वोटर से कम्युनिकेशन इस्थापित किया गया. नितिन नबीन ने हाट कोर भाजपा वोटर से यह अपील की कि वो नितिन नबीन को ही अपना उमिदवार समझ कर वोट करें. फिर भी भारतीय जंदा पार्टी एक बड़े अंतर से यह सीट दुवा गया जनसुराज के संस्थापक परशांत किशोर ने भाजपा उमिदवार नीरच कुमार सिन्हा को लगभग 20,000 वोटों से यह चुनाव घरा दिया प्रशांत किशोर की यह जीत यकेनन एक प्रचंड जीत है बिहार और देश की राजनिति के लिए लिए बहध अपनेशीद लेकिन इस जीत के माइने क्या है? क्या यह प्रशांत किशोर की जीत से जादा भाजपा की हार है? प्रशांत किशोर ने ऐसी क्या रन्नीती अपनाई जिससे वो बिहार के अंदर भाजपा के सबसे मजबूत किले को भेदने में काम आति क्या भाजपा के आत्मगाती कदम ने भी परशांत किशोर के जीत सुनिश्चित की बिहार के राजनितिक भविष्ट के केंदर में PK की जीत के क्या माइन है? इस वीडियो में एक एक कर इन सारे बिंदूं पर बात करेंगे नमस्कार मेरा नाम है रिसिकेश और आप देख रहे हैं स्ट्राइट प्रशांत की शोर की यह जीत कितनी अपरत्याशित है उसे समझने के लिए पहले यह जानना होगा कि भाजपा की तैयारी कितनी बढ़ी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा के 50 से भी ऊपर विधायकों और MLCs को डोर टू डोर कैमपेइन करने की जिम्मेदारी दी गई थी मतलब 50 से भी ऊपर विधायक एक विधानसभाव में द्वार को जिताने के लिए दिन रात एक पैर पर खड़े गई 422 422 MLC वरिष्ट पतरकार इमरान खान की एक रिपोर्ट के नुसार सभी 16 वाड की जिम्मेदारी 16 मंतरियों के बीच बाढ़ दी गई थी। इन सब के अलावा 40 स्टार प्रचारकों की भील लगातार मुझूद गी थी। जो वोटिंग से पहले दिन रात बांकीपूर में ही अपना पैर जमाई हुए थे। खुद राष्टिय अध्यक्ष निति नवीन ने राष्टिय राजनिती से दूरी बना कर पूरा फोकस बांकीपूर पर ही किया हुआ था। उनके लावा मुख्यमंतरी समराट चौधरी, वरिष्ट भाजपा नेता रविशंकर परसाद, नित्यानंदराई, गिरिराज सिंग, मंगल पांडे, मनोस तिवारी, पवन सिंग और मैथली ठाकूर जैसे चर्चित नामों ने भी बांकीपुर में दिन रात एक कर दिया था। पेहार भी आए मगर भाजपा की माइक्रो मेनेजमेंट अपने मजबूत गढ़ में ही ध्वस्थ हो गया मतलब ना तो भाजपा को अपना परंपरिक वोट मिला और ना ही भाजपा को कायस्थ जाति का समुचित वोट मिला वही जाति जिससे नवीन रविशंकर प्रसाद और भाजपा के उमिदवार नीरत सिन्हाते हैं। ये तमाम आकड़े बताते हैं कि जो कुछ भी बांकीपुर में घटित हुआ वो बेहद आसाधारन था। अब एक एक कर कारणों पर आते हैं कि परशांत किशोर ने ऐसी क्या रणनीतियां अपन भाजपारी कार्यालय इसी छेत्र के अंतरगत आते हैं भाजपा बीते तीन दशकों से यहां कभी चुनाव नहीं हारी थी कायस्त यहां सबसे मजबूत वोट बैंक है यह नितिन नवीन का पारिवारिक सीट भी माना जाता है उनके पिता नवीन प्रशांत किशोर सिन्हा के बाद नितिन नवीन यहां पांच बार से लगातार विधायक थे 2015 के सबसे कठिन विधानसभा चुनाव में भी नितिन नवीन का वोड शेयर सिक्सटी परसेंट से ऊपर था मतलब ऐसा किला जो राजद और जद्यू साथ पिलकर भी नहीं भेज सकी थी नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद जब वह राज्यसभाग है तब यह सीट खाली हुई लगभग तभी से पृशांत की शोर इस सीट पर काम कर रहे अंदर खाने में लगातार मीटिंग हो रही थी कयास तो लगाए जा रहे थे लेकिन लोगों को यह लगा कि प्रशांत किशोर इतना बड़ा रिस्क अवोइड करेंगे लेकिन जन्सुराज को यह सीट तो लड़ने ही थी चाहे वो लड़ते या कोई और उमिदवार खड़ा करते मगर 5 जुलाई को आधिकारिक रूप से यह बात सामने आई कि प्रशांत किशोर खुद बांकीपूर से विधाईकी का चुनाव लडेंगे प्रशांत किशोर के लिए यह सबसे बड़ा मौका था जब वो सारा मैन पावर एक जगह लगा सकते थे जाती से आने वाले लोगों की भूमिका निर्णायक होती है लेकिन उन्होंने इसलिए बांकीपुर को चुना क्योंकि यह बिहार का सबसे समरिध सीट यहां बिहार के सबसे प्रबुद्ध वोटर्स हैं कि जब वह जातिकत राजनीति से ऊपर उठने की बात करते हैं तो इसका पहला टेस्ट उस सीट पर होना चाहिए जहां सबसे पढ़े लिखे लोग हैं उम्मीद यह जताई जा रही थी कि अगर सामने प्रशांत किशोर है तो भाजपा उन्हें हलके मिना लेते हुए एक मजबूत कैंडिडेट उतारेगी अजय आलोक, रितुरास सिन्हा और अन्वीर नन्दन जैसे जाने पहचाने और अनुभवी नामों के कयास लगाए जा रहे थे। मगर ऐसा नहीं हुआ। निति नभीन का चुनावी काम संभालने वाले अभिशेक बंटी को टिकट दिया गया। निती नबीन ने सीट पर अपना मन मुताबिक और वफ़ादार उमिदवार चुना ताकि बाकी पूर हमेशा उनके कंट्रोल में रहे किसी ऐसे उमिदवार से परहेज किया जो जीत के बाद उस सीट पर कुंडली मार कर बैठ जाए मगर अभिशेक बंटी ने अपना व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए नॉमिनेशन विड्रॉ कर लिया मगर जो कारण सामने आये वो ये कि उनके पिता चारा घुटाले में सजायाफता रह चुके विपक्षी दलों को इस बात की जानकारी भी थी ऐसे में प्रशांत की शोर और तिजस्वी आदब उन पर लगातार हमलावर रहते मगर उमिदवार के बदले जाने पर पीके और उनके समर्थकों को एक मनोवैज्ञानिक बढ़हत मिली नए उमिदवार थे नीरज कुमार सिन्हा ये भी कायस्त जाती से भाजपा ने इसे एक आम कारेकरता का सम्मान बताते हुए भुनाने की कोशिश की लेकिन नीरज को मिदवारी हर बढ़ते दिन के साथ भाजपा पर भारी परती चली गई मीडिया के सामने वो बेहद असहज रहते थे उनके पास किसी भी सवाल का जवाब नहीं होता था साधारन से सवाल पर वो बगले जाखने लगते थे वो ये तक नहीं बता पा रहे थे कि चुनाव में उनका मुकाबला किन से है नीरस सिन्हा के इस असहस्ता ने उन्हें डम्मी घुशित कर दिया वहीं प्रशांद किशोर अपने कैम्पेइन में अकेले ही पूरी भाजपा पर भारी पड़ रहे थे वो नीरसिन्हा को नहीं बलकि मुख्यमंतरी समराट चौधरी को टारगेट करते रहे हर बार वो यही कहते कि नितीश कुमार के नाम पर वोट लेकर भाजपा ने एक अपराधी को सीम बना दिया पीके हर मुद्दे पर इतने बलंड थे कि भाजपा के किसी नेता के पास उनका कोई जवाब नहीं होता था उनके टारगेट पर सिर्फ और सिर्फ बिहार के मुख्यमंतरी थे परशांत किशोर ने बांकीपुर के लोगों से अपील की कि अगर वो सम्राट चौधरी को मुख्यमंतरी के रूप में नहीं देखना चाहते हैं तो वो जन् सुराज को बोड देखें जन सुराज की जीत परधान मंतरी नरेंदर मोधी को यह क्लियर मैसेज होगा कि बिहार की जनता समराट चौधरी को मुख्य मंतरी की कुरसी पर नहीं देखना चाहती परशांत किशोर ओनलाइन कैमपेइन में भी भाजपा से मीलों आगे रहे जन सुराज की प्रोफेशनल टीम ने सोशल मीडिया पर भाजपा को लगातार बैकफुट पर रखा नतीजा कि बांकीपूर की अर्बन पॉपुलेशन के बीच परशांत किशोर की स्विकारिता बढ़ने लगी बस जरूरत थी उसे वोट में बदलने प्रशांत किशोर के जीत में एक नेरेटिव का भी बहुत बड़ा रोल रहा भाजपा यकीनन बांकीपुर को फॉर ग्रांटेड लेती रही है बीते दो दशकों में यह देखा गया कि महा गटबंदन भी इस सीट पर अपना एनरजी वेस्ट नहीं करती थी PK की जीत में सबसे बड़ा रोल रविशंकर परसाद के उस कथित बयान कमाना जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बाकी पर उनका सबसे मजबूत गड़ है, वो यहां से कुट्टा बिल्ली को भी खड़ा कर देंगे तो वो जीत जाएंगे. मगर प्रशांत किशूर ने यह बात हजारों बार दोहराई और वोटरों के दिमाग में यह इंजेक्ट करने में सफल रहे कि भाजपा उन्हें फॉर ग्रांटेड ले रही है रविशंकर परसाद और जद्यू के MLC नीरस सिन्हा ने एक प्रेस कॉंफरेंस में जवाब दिया कि उन्होंने कभी ऐसा बयान नहीं दिया है रविशंकर प्रसाद कई बार इस पर सफाई देते नजर आये मगर उनके बयान के स्पेसिफिक पोर्शन को काट कर इस तरह से चलाया गया कि चुनाव के बाद तक और अभी तक लोगों के लिए यह सच ही है पृशांत किशोर ने इसे voting के बाद भी दोहराया voting के बाद एक press conference में उन्होंने कहा कि भाजपा इतने vote उसे हारेगी कि वो कभी ये कहने का दुसाहस नहीं करेगी कि हम कुटा बिली को भी खड़ा कर देंगे तो जीच जाएंगे इतने बहुत से भाजपा हारेगी कि जीवन में कभी ये कहने का तुझास नहीं कर पाएंगे कि हम लोग चुट्टा बिल्ली को भी खड़ा करेंगे तो चुनाव जीख जाएगा कुल मिलाकर इस बात को इतनी बार कहा गया कि लोग इसे सच मानने लगे चुकि इसका कोई प्रमान नहीं है तो यह जूट भी हो सकता है और सच भी हो सकता है भले इस अरजनिक तोर पर रविशंकर परसाद ने ऐसा कभी न कहा हो लेकिन भाजपा के कोर वोटरों को तोड़ने में इस कथित बयान की बहुत बड़ी भूमिका रही मगर ये तो सच है कि भाजपा कारेकरताओं में इस बात का कॉंफिडेंस तो था कि भाजपा किसी को भी खड़ा कर देगी तो सिर्फ पार्टी सिंबल के दम पर वो उमिदवार चुनाव जीच जाएगा वर्ड टू वर्ड अगर कुट्टा बिल्ली वाली बात नहीं भी कही गई हो तो भी इस ओवर कॉंफिडेंस से भाजपा के वोटरों में यही मैसेज गया जो प्रशांत किशोर देना चाह रहे थे चुनाव से ठीक पहले 20 जुलाई को जंतर मंतर पर छात्रों के खिलाव जब पुलिसिया बरबरता हुई उस घटना ने प्रशांत किशोर के लिए खाद की तरह काम किया 22 जुलाई को इस बरबरता के विरोध में बिहार के छात्र भी सडकों पर उतरे पुलिस ने उन पर वाटर कैनन, टियर गैस और लाठी चार जैसे भारी बल प्रयोग किये सिवान में पुलिस के द्वारा 2147 से फाइरिंग भी की गई इसमें तीन छात्रों को गोली लगी पर लीच से नाराज चात्रों और अभिवावतों का गुस्सा भाजपा पर खुल कर उतरा. बाकी पुरविधान सभा में जनजी वोटर्स की संख्या 53,000 से भी अधिक है. वैसे तो ये कूल वोट के सिर्फ 14 पर्तिशत थे, लेकिन मददान करने के लिए युवा वर्ग बड़ी संख्या में निकले। इस एज ग्रूप का वोट परसेंटेज 34 प्रतिशत से भी जादा रहा। प्रशान्त किशोर जिस तरह से छात्रों के समर्थन में उतरे, तो वोटरों के लिए वो एक स्वता विकल्प बन कर सामने आ गए