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Summary
केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड में शाम 5 बजे लाइब्रेरी बंद करने का तर्क सुनिए।
“बच्चे तो यूनिवर्क क्लास के बाद ही पढ़ेंगे आठ बजे उनका गेट बंद हो जाता है तो सर लैबरेट खोलेंगे तो गेट ने हम खुलवा लेंगे ना पहले लैबरेट तो खुलेंगे तो कम सकम आठ बजे खोल ली”From the report
अच्छा जब जिस बच्चे मुझसे भोल रहे थे कि शाम को 5 बजे की बाद बंद हो जाती है, लाइब्रेडी की जुरत तो रात तक रहती है ना? यहाँ पर सेकरूटी का इशु है ना? CCTV लगवाईए, गार्ड रखवाईए? बच्चे को बच्ची को चेड़ देगा तो अब तीन साल हो गए तो तीन साल यह पर याद नहीं है इसलिए ऐसा है कि बीच में जो लैंड एक्वेजिशन का प्रॉब्लम है वह स्टेट गवर्नमेंट पूरा लाइन करके हमको देना था इंवेसिटी तब इन्वेसिटी की बॉंडरी बनेगी बॉंडरी बनी नहीं है प्रभुला के स्टेट और सेंटर या इन्वेसिटी के जो आपस का विवाद बच्चे ना आप समझे कि पढ़ना होगा राज बच्चों को डिमांड होती है सटेड़े को निस्टी बंद रहती है लाइब्री खुलती है नहीं खुलती है अब देखिए वाली बात दूसरी पर यह 5 बजे बंद हो जाना थोड़ा बजे अटपटा क्योंकि बच्चे तो यूनिवर्क क्लास के बाद ही पढ़ेंगे आठ बजे उनका गेट बंद हो जाता है तो सर लैबरेट खोलेंगे तो गेट ने हम खुलवा लेंगे ना पहले लैबरेट तो खुलेंगे तो कम सकम आठ बजे खोल ली देखिए एक case मेरे साथ हो चुका है इसलिए मैं उसको किसी भी सूरत में साढ़े पांच के बाद नहीं खोलूँगा