
Summary
उदैनिधी स्टालिन को तंजावुर में कावेरी नदी के पानी के अधिकार पर आयोजित जनसभा के दौरान एक टिपनी के लिए हिरासत में लिया गया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें पूछताच किया। मद्रास हाई कोर्ट ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया।
From the report
एक नए विवाद के चलते तामिलनाडू की राजनीती एक बार फिर सुर्खियों में हैं मामला डीम के नेता और तामिलनाडू असेंबली के लीडर ओफ ओपोजिशन उदैनिधी स्टालिन से जुड़ा है आरोप है कि स्टालिन ने जानी मानी अक्ट्रिस त्रिशा कृष्णन के बारे में एक जनसभा के मंच से कथित तोड़ पर आपती जनक टिपनिया की इस पर आक्शन लेते हुए 4 अगस्त की सुबह उन्हें चेनेई पुलिस ने उनके घर से हिरासत में ले लिया वीडियो रेकॉर्ड होने तक फिलहाल उन्हें रिहा नहीं किया गया है क्या है ये मामला इस वीडियो में विस्तार से समझेंगे नमस्कार मेरा नाम वरुन है और आप देख रहे हैं जिस्ट ये विवाद तंजावुर में आयोजित उस जनसभा के दौरान शुरू हुआ जिसे कावेरी नदी के पानी के अधिकार और उससे जुड़े मुद्धों को लेकर आयोजित किया गया था सोमवार को तंजावूर में कावेरी वाटर डिस्प्यूट पर आयोजित रैली में उदैनिधी मुखे मंतरी सी जोसिफ विजय पर निशाना साध रहे थे इसी दोरान भीड से त्रिशा त्रिशा के नारे लगे भीड की आवाद सुनकर उदेनीदी स्टालिन कुछ पल के लिए रुके इसके बाद उन्होंने उस नारे को दोहराते हुए एक टिपनी की उदेनीदी स्टालिन तामिलनाडू के वरिष्ट डीम के नेता है राज के पूर्व डेप्यूटी चीफ मिनिस्टर हैं और मौजूदा लीडर ओफ ओपोजिशन भी हैं वो डीम के प्रमुक और पूर्व मुख्यमंतरी एम के स्टालिन के बेटे भी हैं उन पर आरोप है कि भीड से त्रिशा का नाम सुनाई दिने के बाद उन्होंने कहा कि पानी कहीं और पहुँचे या न पहुँचे, वहां जरूर पहुचना चाही. यही लाइन इस पूरे विवाद के केंदर में है. उदैन निधी ने बाद में सफाई देते वे कहा कि उनकी टिपनी का कॉंटेक्स्ट केवल कावेरी नदी के पानी से था और उनके बयान को गलत अर्थ में पेश किया जा रहा है लेकिन विपक्षी दलों ने इस सफाई को स्वीकार नहीं किया उनका आरोप है कि जिस समय और जिस context में ये टिपनीया की गई उससे डबल मीनिंग बातें समझाती हैं उनका आरोप है कि उनकी ये टिपनी अशलील और अपत्ती जनग थी उनका कहना है कि ये टिपणी एक्टरेस तृशा को लेकर की गई थी और सार्जनिक मंच पर इस तरह की भाशा का इस्तिमाल स्विकार नहीं किया जा सकता उनका कहना है चुकी ये बयान एक्ट्रेस त्रिशा के नाम के नारे लगने के तुरंत बात दिया गया था इसलिए इसे किसी दूसरे कॉंटेक्स्ट में नहीं देखा जाना चाहिए उन्होंने इसे महिलाओं की गरीमा के खिलाफ बताते वे सार्जनिक पत पर बैठे एक नेता के लिए अनुचित भाषा करार दिया एक्ट्रिस त्रिशा से कोई सम्मंद नहीं था। डियेम के नेताओं का ये भी कहना है कि तमिल भाषा और साहित्य में नदियों का उल्लेक अकसर स्त्री के रूप में किया जाता है। और उसी कॉंटेक्स्ट में इस टिपनी को भी समझा जाना चाही। चीफ मिनिस्टर विजे की पार्टी टीवी के ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई पुलिस ने उनके खिलाफ छे धराओं में केस दर्ज किया शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी मामले की गंभीरता को देखते वे उदैनिधी स्थालिन ने किरफतारी से राहत पाने के लिए मदरास हाई कोट का दर्वाजा खट-खटाया यानी अगरीम जमानत की याचिका दायर की लेकिन अदालत में सुनवाई पूरी होने से पहले ही चिन्नई पुलिस उनके आवास पहुँच गई और उन्हें हिरासत में ले लिया गया पुलिस की कारवाई की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में डियम के कारेकरता और समर्थक भी वहां जमा हो गए पुलिस और समर्थकों के बीच कुछ देर तक नारे बाजी और हलकी धक्का मुकी हुई इसके बाद पुलिस स्टालिन को पूछताच के लिए हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई इसके बाद ये मामला सिर्फ एक बयान का विबाद नहीं रहा बलकि तामिलनाडू की राजनीती का बड़ा मुद्धा बन गया इसी बीच मडरास हाई कोट ने मामली की सुनवाई के दौरान पुलिस को निर्देश दिया कि पूछताच पूरी होने के बाद स्टालिन को रिहा कर दिया जाए अदालत ने साफ किया कि जांच जारी रह सकती है लेकिन पूछतात समाप्त होने के बाद उन्हें हिरासत में नहीं रखा जा सकता सुनवाई के बाद डीमके के वरिष्ट नेता राजसभा MP और पार्टी के वकील एनार एलांगो ने आरोप लगाया कि विजय की नेतरित्व वाली तमिलनाडू की सरकार उदैनिदी स्थालिन को जानबूचकर हिरासत में ले गई ताकि वो असेंबली की कारवाई में शामिल ना हो सके डियम के MP कानी मोजी ने भी पुलिस की कारवाई की कड़ी आलोचना की उन्होंने इसे खुली कायरता और राजनीतिक बदले की कारवाई बताया कानी मोजी ने कहा कि अगर सरकार को उदेने दी स्टालिन के खिलाफ मामला चलाना है तो कानून के तहट केस दर्ज करें और अदालत को फैसला करने दें लेकिन विपक्ष का सामना करने के बजाए उन्हें असेंबली सेशन में स्टामिल होने से रोकने के लिए इस तरह हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूलियों और कानून की भावना के खिलाफ है इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी DMK पर हमला बुला टीवी के MLA रेवन चरन ने कहा कि ये घटना DMK की राजनीतिक कल्चर और सोच को दिखाता है। वहीं टीवी के नेता आदवर्जुन ने स्टालिन पर निशाना साथते वे कहा कि उन्होंने राजनीतिक डाइलोग का स्तर गिरा दिया है। बताते हुए उदैनिदी स्टालिन की गिरफ्तारी की मांग की वहीं बीजेपी नेता खुश्बू सुन्दर ने कहा कि उदैनिदी को एक्ट्रिस थ्रिशा कृष्णन से बिना शर्च सार्वजनिक माफी मांगी चाहिए FIR में उदैनिदी स्टालिन पर छे अलग-अलग धाराओं के तहट मामला दर्ज किया गया है इनमें महिलाओं की गरीमा का अपमान करने, जानबूच कर अपमान कर शांती भंग करने, लोगों को भरकाने वाली टिपनी करने, अपराधिक शाजिश रचने और अपराधिक धंकी देने जैसे आरोप शामिल है इसके अलावा उनके खिलाफ तामिलनाडू प्रोहिविशन ओफ हरास्मिंट ओफ विमिन आक्ट 2002 और IT आक्ट के सेक्शन 67 के तहट भी मामला दर्ज किया गया है पुलिस का कहना है कि इन सभी धाराओं के तहट मामले की जाच जारी है ये पहली बार नहीं है जब उदैनिदी स्टालिन अपने किसी बयान को लेकर विवाद में आये हो इससे पहले भी उनके कई बयान राष्ट्रिय स्तर पर बहस का विशय बन चुके हैं दो सितंबर 2023 को एक प्रोग्राम के दोरान उदैनिदी स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया, मच्छर और कोरोना जैसी बिमारियों से की थी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का सिर्फ विरोध नहीं बलकि उसे खत्म कर देना चाहिए। इस बयान पर देश भर में तीखी राजनितिक प्रतिक्रिया हुई और उनके खिलाफ कई राजों में शिकायते भी दर्ज की गई। इसके बाद 12 मई 2026 को तामिलनाडू असेंबली में भी उन्होंने अपने पुराने रुख को दोहराया। उदेनिधी ने कहा कि सनातन लोगों को बाटता है इसलिए इसे खत्म होना चाहिए विपक्षी दलों ने इस बयान को हिंदू धर्म के खिलाफ बताते वे कड़ा विरोध किया जबकि DMK ने कहा कि उनकी टिपनी सामाजिक विवस्था और जाती आधारित भेदभाव के कॉंटिक्स्ट में थी ना कि किसी धर्म विशेश के खिलाफ राजनीती में आने से पहले उदेनी धी तमिल फिल्म इंडॉस्ट्री से जुड़े रहे हैं वह एक्टर फिल्म प्रोड्यूसर और डिस्ट्रिब्यूटर के रूप में काम कर चुके हैं इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और डीएम के के यूथ विंग की कमांड संभाली साल 2021 में वह पहली बार एमिलेज चुने गए बाद में उन्हें कारण दोनों की जोड़ी को दर्शकों के बीच काफी पॉपिलारिटी मिली है। पिछले कुछ सालों में दोनों के रिष्टे को लेकर कई बार कई बातें सोशल मीडिया और इंटरटेन्वेंट इंडस्ट्री में लगातार सामने आती रही हैं। दोनों को कुछ सार्वजनिक इवेंट्स में साथ देखा गया है वहीं तिरुमाला टेंपल में उनकी मौजूदगी को लेकर भी कई तरह के दावे किये गए हैं हाला कि इन सभी बातों के बावजूद न तो विजय और ना ही तृशा ने कभी अपने रिष्टे की पुष्टी की है दोनों ने इस विशय पे न तो कोई उफिशियल स्टेटमेंट दिया है ना ही कभी इसका खंडन किया है ये मामला सिर्फ उदैनिदी स्टालिन या तामिलनाडू की राजनीते तक सीमित नहीं है असली सवाल ये है कि किसी राजनीतिक भाषन और अपराद के बीच सीमा आखिर कौन तै करता है भारत में महिलाओं की गरीमा, अशलीलता और पब्लिक डीसेंसी से जुड़े कानून मौजूद हैं लेकिन कई बार इन कानूनों को अलग-अलग तरीके से इंटेप्रेट किया जाता है ऐसे में अगर किसी बयान का कॉंटेक्स्ट उसका मतलब और उसकी इंटेंट विवादित हो तो क्या उसे तुरंट अपराद मान लेना चाहिए या फिर पहले अदालत को ये तै करने देना चाहिए कि उस बयान का वास्तविक अर्थ क्या था दूसरा सवाल पुलिस की कारवाई के समय को लेकर उठ रहा है उदैनेदी स्टालिन ने गिरफतारी से राहत के लिए पहले ही एंटीसिपेटरी बेल की याचिका दाखिल कर दी थी लेकिन उसी दोरान पुलिस उनके घर पहुँची और उन्हें हिरासत में ले लिया D.M.K. इसे राजणीतिक बदले की कारवाई बता रही है जबकी सरकार का कहना है कि पुलिस ने सिर्फ कानून के मुताबिक कारवाई की है अब ये देखना होगा कि अदालत इस पूरी प्रक्रिया को किस नजरिय से देखती है फिलहाल मडरास हाई कोट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि पूछताच पूरी होने के बाद उदैनिदी स्टालिन को रिहा कर दिया जाए वहीं उनके खिलावदर जापरादिक मामले की कानूनी प्रोसेस आगे जारी रहेगी आने वाले दिनों में अदालत ये भी तै करेगी कि इस मामले में आगे क्या कारवाई होगी राजनीतिक नजरिये से देखें तो ये मामला DMK और विजय की पार्टी TVK के बीच पहला पॉलिटिकल क्लैश है एक तरफ सत्ता में TVK है दूसरी तरफ विपक्ष में DMK ऐसे में आने वाले वर्षों में दोनों दलों के बीच इस तरह के राजनीतिक और कानूनी टकराव और तेज हो सकते हैं अब आप इस पूरे विवाद पर क्या सोचते हैं अपनी राय कॉमेंट्स में जरूर बताएं देश और दुनिया की बड़ी खबरों के लिए देखते रहें जिस्ट शुक्रिया