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Summary
कश्मीर में हाइब्रेड मिलिटेंसी का दौर लौट रहा है, जिसमें सिविलियनों को टारगेट किया जा रहा है। आईएसआई ने ऐसे लोगों का इस्तेमाल किया जिनका कोई पुलिस रिकॉर्ड नहीं है, जिससे उनकी पहचान और ढूंढना मुश्किल हो गया।
From the report
5 अगस्ट 2026 को धारा 370 हटेवे 7 साल हो जाएंगे इन 7 सालों में कश्मीर ने कई बदलाव दिखें हाइब्रेड मिलिटेंसी का दौर चला साउथ ओफ पीर पंजाल में 20 साल बाद फिर से मिलिटेंस की एक्टिविटी देखी गई पी आर पी एफ जैसे शेड़ो ऑर्गनाइजेशन बने पिछले साथ साल में जम्मू कश्मीर को लेकर हमारा सिक्यूरिटी डॉक्ट्रीन कितना कारगर रहा और आने वाले समय में जम्मू कश्मीर में क्या आमन फिर से लौट पाएगा जिस तरीके पहले था सब समझेंगे आज किस वीडियो में नमस्ते मेरा नाम है विनय सुल्थान और आपका स्वागत है सुल्थान की डायरी के इस ताज एपिसोड में तो कहानी की शुरुआत होती है 2 अगस्त 2019 को 2 अगस्त 2019 वह दिन होता है जब पहली बार हम देखते हैं कि कश्मीर में खासतौर वैली के इलाके में बड़े पैमाने पर डिप्लाइवेंट शुरू होती है सिक्यूरिटी फोर्सेस की खासतौर पर पेरामिलिटरी फोर्सेस की सीजार पीएफ की सेस बी की बीएसएफ की और उस समय हो जाता है क्योंकि अमरनाथ क्रास चल रही है और मरतात्रात एक केटर मिठ है इसके चलते निकली फॉर प्रेस कि यह बढ़ाई जा रही है और इस बीच चार अगस्त के आसपास तमाम स्कूलिटी फोर्स में जितने भी होती है उनके पास सेटलाइट फॉर्म पहुंच जाते हैं ताकि अगर कल को इंटरनेट बंद रहे तो सेटलाइट फॉर्म पर कम्युनिकेशन हो लेकिन अभी तक किसी को कोई अंदाजा नहीं था कि क्या होने वाला है हालांकि सुखबुबाहट शुरू हो जाती है चार अगस्त के की कुछ बड़ा होने वाला है जम्मू कश्मीर को लेकर कुछ बड़ा होने वाला है और 5 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह एक तरीके से बंप फोट देते हैं संसद में और कहते हैं कि आर्टिकल 370 और 35 से जो कि जम्मू जम्मू ककशमीर एक स्पेशल स्टेटर्स देता विषयव दर्जा देता था उन दोनों आर्टिकल स्कूल उन दोनों धाराओं शुनुतनों प्रावधानों को एबरगेट किया जाता है पूरी तरीके से हटाया जाता है निरस्त किया जाता और इस पर तमाम बहस होती है और कहा जाता है कि हो सकता है कि इसके बाद में जम्मू कश्मीर में खालात और बिगड़ जाएं जनता सढकों पर उत्तरे प्रदर्शन करें और इसी के चलते जो है धारा 144 लगा दी जाती है वहां जो अब बीनेस 163 है, मतलब Unlawful Assembly जो है, वो बंद कर दी जाती है, पांच लोगों से ज़्यादा लोग एक जहां पर नहीं जुट सकते हैं, ये कानूनन तोर पर जो है, पांच लोगों से ज़्यादा का जुटना जो है, वो कानूनी रूप से अपराज बना दिया जाता है, य बदला है महभूबा मुक्ती तमाम लीडरस सबको और पर यह तो यह तरीके से उस समय यह कोंठी रूसकार को लेकर तरह से एक तरीके से डिस आशीएशन महसूस करना शुरू कर दें एक तरीके से को इस रॉपनेशन महसूस करना शुरू वह यूनियन टेरिटरी जो है नहीं तोड़कर बना दी जाती है जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का प्रावधान रखा जाता है लदाख में नहीं रखा जाता है तो दो टेरिटरी बन जाती है लदाख भी लंबे समय से मांग कर रहा था कि हमें अलग तरीके का दर्जा दिया जाए क्योंकि हम पहाड़ी राज्य हमारे यहां पर पॉपुलेशन अलग तरीके की है तो आप जम्मू कश्मीर की तरह हमको नहीं ट्रीट कर सकते तो लगाख की भी मांग पूरी हो जाती है जम्मू कश्मीर को एक यूनियन अपने चारों तरफ में बाद में जम्मू कश्मीर का भारत के साथ में बहतर इंटेग्रेशन शुरू हो जाएगा तो यह दो तरीके की बातें आती है तरफ यह कहा जाता है कि हम घर विकेसठी आ जाए दिश्रॉप की फीलिंग आए तरीके से मोभंकी अस्थिति आ जाए भारतीय सरकार के प्रति दूसरी तरफ कहा जाता है कि अच्छी के बाद है तो यह दोनों इन दोनों के बीच में वह चल रही होती है दो तरीके के बाद में आ रखे जाते यह लेकिन हम काल आंतर में देखते हैं जेसे संब्त ही समय बीतता है हम देखते हैं कि कोई बड़ा इसके ऊपर जब हम पिछले हुआ हो अब हुआ था ऐसा हमको बाद में नहीं दिखाई देता है तो जो सुरुवाती एजेम्शन था कि हो सकता है कि एक मोबंग की स्थिति जम्मू-कश्मीर जमों कश्मीर में पैदा हो जाए और हालात वहां के बिगड़ जाएं क्योंकि बहुत सेंसिटिव जगह है तो ऐसा हमको होते हुए नहीं दिखाई दिया एक तरीके से केंद्र सरकार ने इस पूरे-पूरे एपिसोड को 370 हटने को 35 को हटने को हटाने को इस पूरे एपिसोड को ने अच्छे तरीके से मैनेज किया है यह हम अगर रेशनली बात करें पत्रकार के तौर पर बात करें तो इस बात को हमको मानना पड़ेगा लेकिन इस समय होता क्या है कि जम्मो-कश्मीर में बहुत बदलाव हो रहे होते हैं आपको एक थोड़ी सी इसमें एक बैकग्राउंड आपको ऐसा समझना पड़ेगा कि 2019 की फरवरी में पुलवामा अटैक होता है उसके बाद में बालाकौट बालाकौट में एयर स्ट्राइक होती है तो एक गर्मा-गर्मी नीका माहौल विश्व समय होता है फिर नई सरकार चुनकर आती है पहले ही मांसुन सेशन में ग्रहमंत्री अमिश्य काम कर देते हैं तो यह एक बैकग्राउंड इस बैकग्राउंड के पस्वंजर को समझे बिना जो है आप उस समय की स्थिति नहीं समझ वाते तो इसके बाद में होता यह है कि लगातार जम्म समरिवा जो इस तरीकी के और फिर उसके बाद यहां जाता है को यह बात में लंबे संबेतक जो है लुट द्विक मिलमेंट होती है तो हमको कोई ऐसा प्रदर्शन देखने को नहीं मिलता है धीरे-धीरे चीजें सामान होती चली जाती है और सामान होते होते इतनी सामान होती है कि 2024 के अक्टूबर में वहां पर चुना हो जाता है और वह बकायदा विधानसभा चुनी जाती है अब्दुला नए प्रदाव मुख्यमंत्री बनते हैं जम्मू कश्मीर के एक पॉलिटिकल प्रोसेस वहां पर रिटर्न होती है और 370 मुकशमीर में वहां पर क्या सीन था उसको समझाने के लिए मैं आपको कहानी सुनाता हूं उनतीस अक्टूबर 2019 को एक घटना होती है का कत्रासु गांह है कुलगांह में वहां पर मुर्षिदाबाद बंगाल के रहने वाले छह मजदूर वहां पर रह रहे थे एक मकान किराय पर लेकर और अचानक से 7-8 बजे शाम को वहां पर कुछ मिलिटेंट आते हैं उनको एक लाइन में खड़ा करते हैं और गोलियों से उनको भून देते हैं उसमें से पांच जो मजदूर हैं मुर्षिदाबाद के वह अनस्पॉट उनकी देट हो जाती है एक घायल होता है जो कि अगले दिन 30 तारीक को जो है 30 अक्टूबर को वह दम तोड़ देता है और यह घटना होती इसमें जो मारे वाले थे मारे जाने वाले जो मजदूर थे उनका नाम है मुर्षलीम शेख जो हम अधिक नईमुदीन रफिकुल कमरुदीन और यह जो पांच लोग है यह ऑनसपॉट उनकी डेथ हो जाती है जबकि जहरुदीन जो है वह अगले दिन उनकी मौत होती है आतंगवादियों की गोली से और यहां से समझ में आता है कि क्योंकि बार-बार जैसे ही 370 और 35 जब हटाया जा रहा था उस समय भी हम लोग देख रहे थे कि जैशा मुहमद या आईएसाई की तरफ से क्या प्रोपागेंडा फैलाया जा रहा था उस समय लगातार यह कहा जा रहा था कि यह जो है कश्मीर की डेमोग्राफी चेंज कर देंगे इसत्री के से गाजा स्ट्रिप्ट में ढेमोग्राफी चेंजेट इस्त्रियलल्स उसी तरह वहीं बढ़ाता सब्सक्राइब वहां पर बाहर से आकर लोग बसेंगे और उनकी मेजॉर्टी हो जाएगी और इस तरीके की तमाम किसी की बातें लगातार कही जा रही थी लगातार इस किसी का प्रोपोगेंडा फैलाया जा रहा था और इसको काउंटर करने के लिए यह जो एक अलाहुम लाहर जो कि प्रवाशिक मजदूरों पर पहली बारी हमला होता है और यहां से हम देखते हैं कि लगातार जो है प्रवाशिक मजदूरों को टारगेट बनाया जाना शुरू होता है और इसमें 2019 में दो ऐसे बड़े अटैक होते से यह अच्छा लोग छह लोग जो है वह जानभायक होते हैं उनकी जान जाती है और एक और अटाक्स होता है जिसमें एक और प्रवासी मजदूर जो है उसकी जान चली जाती है तो कुल साथ लोग जो है इस साथ लोगों का इंताकाल जो किस आतिकवादी हमले में हो जाता है मारे जाते हैं 2020 में क्योंकि बॉबिल का साल था तो कोई बड़ा इंसीडेंट नहीं होता है 2021 में चार अटैक होते अक्टूबर वह होते हैं चारों टाइम हम उसके ऊपर विवाद 6 में जिसमें 5 लोग मारे जाते हैं 2022 में चैम होते हैं जिसमें 4 लोग मारे जाते हैं 2023 में तीन बड़े तीन होते हैं जिसमें ज्यादातर अब 2023 के आस पास देखेंगे कि आतंकवादी क्यों। टार्गेट्रीट किलिंग करने कोशिश रहते तो वह दरसल मतलब इंसिडेंट तीन हुए लेकिन उसमें एक आदमी ही जो है वह मारा गया बाकियों में लोग ज्यादा तर खायल हुए लेकिन बचा लिए गए और दो जाप चौबीस में तीन अटैक होते हैं जिसमें आठ लोग मारे जाते हैं जिसमें से बड़ा अटैक जो है वह जड़मोड टर्नल का होता है गगंगीर में जिसमें छह बिहारी जो प्रवासी मजदूर होते हैं वह और एक डॉक्टर कुलमिला के साथ लोगों की मौत होती है तो एक आप प्रेटरन देखेंगे कि एक तरफ जो आ लगातार इस तरीके सा टेक किया जा रही था टारगेटेट आटेड किया जा रहे थे प्रवासियों के ऊपर दूसरी तरफ 2020 30 2020 पर जो महास्तचीव है लोगों मारा जाता है और इस को यह कहा जाता है कि अब जो है टारगेटेड किलिंग करवाकर एक तरीके से जो मिलिटेंसी का परंपरागत शुरूप है उसके बजाय कि विल्टेंट आ रहे हैं बाहर से और वह एक तरीके गुरिला फाइट कर रहे हैं या जंगल रह रहे हैं और अचानक से आकर हमला करने वैसा कुछ भी नहीं हो रहा था दरसल सिविलियन जो वहां पर रह रहते हैं उन्हें में से कुछ के पास में बंदूग पहुंचा कर टारगेटेड किलिंग करवा कि उनको आइडेंटिफाई करना जो है वह फोर्सेस के लिए बहुत मुश्किल हो गया क्योंकि ज्यादा तर केसेस में हमने यह देखा कि आईएसआई ने ऐसे लोगों को इस्तेमाल किया जिनका कोई भी पुलिस रिकॉर्ड नहीं है तो फिर पूरी भीड़ आपको एक आदमी को आइडेंटिफाई करना फिर उसको ढूंढना फिर उसको मतलब उसका इन्वेस्टिकेशन करना उसको इंट्रोगेट बहुत लंबा और मुश्किल काम हो जाता था तो ऐसी स्थिति में यह हुआ कि हाइब्रेड मिलिटेंसी ने बहुत परेशान किया 2019 से लेकर जुलाई 2022 के बीच में 118 सिविलन जो है वो मरे गए इसी टारगेटेड किलिंग में जिसको आप कह लीजिए कि इसलिए जिसको कश्मीर इसको काम कैसे कर रही थी ज़्यादातर जो ऐसे लड़के हैं जो कि जिनकी जहन शाजी हो रखी है ब्रेंडवाश हो रखा है इतनी की कह तमाम वाहत बस घ्र संघटनूत उसे जिमित रखते हैं उनके के साथ में जिनका राप्ता है तो वह ऐसे लड़कों को आइडेंटिफाइड करके 20-22 साल के उनको किसी तरीके से एक पिस्टल पकड़ा दी या एक ग्रेनेट पकड़ा दिया फिर उनको ऑनलाइन ही ट्रेनिंग देगी किस तरीके से फिर से यूज करने नहीं किस तरीके से ग्रेड यूज करना फिर उनको एक टारगेट दे दिया जाता हूं मुबांध के जाते उस टारगेट के ऊपर गोली राख देते हैं ग्रेड फेक देते वहां से गायब हो जाते और फिर उसी प्रोपुलेशन में मर्ज हो जाते तो यह बहुत अधिकत की स्थिति बन गई थी सिक्यूटी फोर्स के लिए कि इस में लेंसी को कैसे टेकल किया जाए फिर धीरे-धीरे सिक्यूटी फोर्सेस ने वहां पर इंटेलिजेंस इजेंसीज ने इस पूरे-पूरे मिल्टेंसी के ऊपर काबू पाया यह दो साल लगे उसमें और तमाम तरीके से स्कूटनिंग हुई लोगों के फेसबुक अकाउंट वगैरह देखे गए वह किस तरीके का रुझान रखते हैं तमाम किस्म की ऑनलाइन साइबर स्कूटनिंग करके लोगों को आइडेंटिफाई करके और फिर उनको जो है पकड़ा गया और इस तरीके साइब्रिट मिल्टेंसी के ऊपर एक तरीके से रोकठाम करनी शुरू की लेकिन इस बीच में आईएस आई नहीं एक बहुत जिसको मैं कहूंगा कि बहुत बेहतरीन पैंतरा जो है वह यह चला कि जो साउथ आप जम्मू को को लगी समझेंगे जम हो और कश्मीर को देख पड़ते पीरपंजाल तो पीरपंजाल जो सौंस का इलाका जिसको हम सामानी तरफ जमूव डिविज़न कह देते हैं वहां पर एक दो चार तीन चार के आसपपास बक चलाता ऑपरेशन सर्व वहां पर हमारा जो लोकल जो इंटेलिजेंस का जो नेटवर्क था वह भी धीरे-धीरे क्योंकि दो दशक का टाइम बीट गया था तो लोकल इंटेलिजेंस