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Summary
दिल्ली पुलिस की सांधोनन को सफल बनाने वाले को आदेश देने वाले लगे गिरे हुए, पुलिस ने पीटा, भीड़ aggressive थी, संसद की ओर जाने की मांग, पार्टी और बीजेपी की गलती हुई, सांधोरों को समझने में दोनों को लगा लगा रहा था, अमादिनी पार्टी की बात, भारत की कमजोरी की बात, पाकिस्तान में प्रधानमंत्री बदलने की बात, लोकतंत्र स्थापित होने की बात, पार्लेमेंट में शब्द बुलाया गया, मज़ेदार बात रही कि पूरा शुरू से डेवन से कवर किया गया
From the report
हेलो गाइस फ्रेंड्स वास्ते कोने भोईया नाइस ब्रो नाइस ब्रो आया है जिनसी ब्रो मैंने मैंने कहीं पढ़ रखा था पता नहीं कहा कि बैठे आर्मी पे पुलिस ढंडा नहीं चला सकती नहीं चला सकती है कि बैठ जाइए पुलिस वाले आपको नहीं मार सकते बैठ जाइए और मेरे किन्ने पर बैठ जाए लोग पुलिस ने जो मारना सुनू किया पड़े पड़े लोग अरे बाब रहे ये देखा तुम्हे थोड़ा सा मतलब जोसमाया तुम्हे ऐसी पीछे गूमा और पुलिस वाले को कहा कि अब होई ऐसे करते उसको पकड़ा और मेरी ये बाहदरी करकच कमस कमा 20-30-50 जवानों देख ली सिंगम आ गया सिंगम उन्होंने कहा कि चलो ठीक है भीड बाद में कंट्रोल करेंगे पहले इसको कंट्रोल करो उन्होंने मेरे बनाया चारद तरफ घेरा मुझे समझ नहीं आता नकास लग रहा है ठान आधे गुड़ा फिर घूबत्स से लुट करते हैं तो मौन मोड़ाएं को नियुक्त रातूर में रुठाएं कर रहे लगते हैं . दिल्ली पुलिस की सांधोनन को किसी ने सफल बनाया तो दिल्ली पुलिस पर दिल्ली पुलिस को आदेश देने वाले लगा वहाँ कोई गिरा हुआ है, उसको देखिये गिरा हुआ है और उसको पीट रहे हैं बहुत बुरा हाल है भाई, बहुत बुरा हाल है मेरा तो, मतलब ऐसे लग रहा था कि भराण निकल देगी कोई भी अपने नॉर्मल जोन नहीं था जो protesters थे वो भी बहुत aggressive थे उनको संसत के तरफ जाना था क्योंकि उनको ऐसा लगता था कि संसत के तरफ जाएंगे तब ही हमारी मांग भूरी हो पाई आसुगैसे खोले छोले जा रहे हैं और दर्द से पत्राव भी बीच-बीच में होता जा रहा है लाड़ी को तोड़ा जा रहा है लाड़ी को गुशल दिया गया है बीच में दो विजवर्स आये संसत के अंदर गतवधिया बहुत तेज हुए है जो अंदर कमांडो थे वो आये दोड़ते हुए वहाँ बहुत गतवधिया मनी एक पार्टी और बीजेपी क्या दोनों से यह गलती हुई सांधोरों को समझने पहचानने में दोनों को लगा लगा रहा था कि यह था अमादिनी पार्टी मुझे लगता है लगता है बिल्कुल पर फिर से इस देश की जो बड़े-बड़े संपादक हैं बड़े-बड़े भारत नहीं हो सकता क्योंकि भारत बहुत लोगों के खुण-पसीने से बना हुआ है पाकिस्तान में जब कच्छे की तरह प्रधानमंत्री बदले जा रहे थे तब हमारे हाँ लोकतंत्र स्थापित हो रहा था भारत हमेशा कमजोर के साथ देता है हम लोग उस तरीके से ने आस हेलो गाइस फ्रेंड्स वास्तव नहीं हुई या यह ऐसी लाइन ऐसा शब्द जो जनतरमंतर के जनजी प्रोटेक्श का सबसे बड़ा आउटकम वर्ड निकला और अब यह पार्लेमेंट के अंदर तक चला गया पार्लेमेंट में भी यह शब्द बुला गया और कुछ पुछु यह दो जो शब्द यह जनतरमंतर के उससे इतने सीरियस प्रोटेस्ट से उसको फनी बनाते हुए निकले और मज़ेदार बात रही कि हमने इसको पूरा शुरू से डेवन से कवर किया हम तीनों बैठे और यह कहा लोग कहते हैं तीन तिगाड़ा तो चलो हम लोग भी कर देते हैं तीन तिगाड़ा और अपने अपने experience share किए जाए और एक तरीके से यह audiobook हो उस पूरे protest की उसका जो serious पक्ष है उसका जो वनी साइड है जो हम लोगों ने कैमरे पर देखा जो कैमरे पर नहीं कहता कर पाए आखों में देखा वह सबकुछ आपको बताने के लिए वह पूरा जो हिस्टोरिक प्रोटेस्ट है इतने दिनों का उसको क्या-क्या पर्दे के पीछे हो रहा था वह सारी चीजें भी बात करेंगे मैं इस प्रोग्राम का होस्ट नहीं हूं मैंने जबरण जो यह कहा कि ओपनिंग मैं करूंगा कि मैं इन तीनों में सबसे अच्छा कर लेता हूं वास्तगुने ओहिया की वास्तगुने को यहां को जो कॉपीराइट है आपको नहीं बोल पा रहा है वह यह थोड़ा जिनसी के साथ तो आप इसका पॉइंट भाई साथ लिखा जाए वह तो पहले बताएंगे तो फिर देखेंगे नहीं लाश थक तो कुछ पुछ वास्तव नहीं कहीं है चचा से के साथ शुरू करते हैं पॉटकास्ट आपको मैं बता दूं जी नोट हलके में बता दिया तीन तिगाड़ा वह दरअसल हमारे शो का नाम है तीन तिगाड़ा जिसमें हम बातेंगे बातचीत करेंगे और इससे अच्छा मौका क्या हो सकता तभी ताजा ताजा एक महीने का अनुभव लेकर लोटे हैं और बहुत सारी बातें ऐसी हैं जो हम लोग आपस में करते रहते हैं वह आप तक नहीं आ पाएं शायद कैमरे नहीं हुई तो इस पूरी किया था इस मिलेनियन ने भी प्रोटेस्ट किया था आज हम भी है और जो हम तीनों ने प्रतिया कि वह सबसे बड़ा सोफा है तो सुलतान जी को देंगे क्योंकि सबसे ज्यादा जो है इन्हीं का भार है बच बोलने में और यह बताएंगे कुछ बुजू ठीक प्रोटेस्ट पर आए पहले सुस्थान आपका जो एक किस्सा है वह पहले सुना दो यार जो निर्भया आंधुलन हुआ था आप लोगों प्रोटेस्ट किया था ताकि इन जनसीज को लगे क्या मिलेनियल जो पुकरे नहीं है यार वह क्या था कि मैं उस मैं दिल्ली इनवास्ट्री लिस्ट पढ़कर निकला था एंतरनी में था और दिल्ली इनवास्ट्री में मेरा जो डॉड़ो सा अधुकन के साथ ने था एक इनवास्ट्री में जो कॉलेस में कर सकते हुए Questo Theani पर इक्टिविटी यह क्लब फ्लांड हिम का ना यह सब करते रहते थे हम भी इंकलाव जिन्दाबाद और यह सब जब जब जुल्मी जुल्म करेगा यह सब नारे मैंने भी बहुत लगाए हैं तो हुआ क्या कि यह ख़बर आई कि एक बच्ची जिसके साथ में विबस्त तरीके से बलातकार पता है आपको सारा बैकग्राउंड पता है और वह इतना आउटरेस था ना उस समय लोगों के बीच में इतना आउटरेस था कि यह मूवमेंट जो बहुत सर्यल तरीके से शुरू हुआ कि मतलब एक जगह पड़ती है जी एनवू को पास में मुनिर का वहां पर एक चौराहा वहां पर छात्रों उस चौराहा को ब्लॉक कर दिया उसके बाद रायसीना हिला गए लोग चढ़ते चले गए पुलिस के पास नहीं था कि ऐसा पर लेकिन देखते ही देखते हुए बहुत बड़ा था उसके पांठी का तारीख है तारीख में को याद नहीं लेकिन दिन था रविवार का और मैंसीव टार्नौर मतलब इतने लोग आए प्रोटेस्ट में तमाम जगह पर उस समय टीवी पर भी यही खबर चल रही थी हर जगह इसी खबर के ऊपर डिस्केशन हो रहा था लोग जगह जगह से उससे पहले लोगपाल का अंदुलान हो चुका था और उसके तुरंत बाद की स्थिति तो मैं भी पहुंचा हुआ था तो मेरे दोस्त थे एमसी के कुछ जो साथ में पढ़ने वाले लड़के थे क्लासमेट वह सब थे तो हमारी पूरी क्लास लगभग पहुंची भी थी एक तो जनरलिजम के स्टूडेंट है और यह अब हुआ क्या कि 4 बजे तक तो पुलिस ऐसे खड़ी रही है तो मैं ऐसी मलो डंडा बंडा पकड़कर वहां पर खड़ी हुई है और आ देख रहा है हम मैं भी देख रहा था दूर से कई बच्चे आए पत्थर भी चला रहे हैं सब कुछ कर रहे हैं पुलिस एकदम जैसे गव मल कुछ नहीं कर रही फिर अचानक से क्या हुआ कि तो जाना कि वहीं तो मैं भी जो है उस समय आप जैसे जवानी था तो मेरे को भी यह यासा हुई कि यार टियर गैस ने आखिर होता क्या है हम लोग सुना ही थे बस कि हांसु गैस का गोला ये हो उसको ऐसे दूर से ऐसे स्मेल किया और जब मेरे को समझ आ गया कड़कमाल है कड़कमाल है तो तुरंत उसके ऊपर गमला डाल दिया उल्टा ठीक है फिर मैं वहां से भागा उतनी देर में क्या हुआ कि यह जैसे इंडिया गेट है इंडिया इंडिया गेट के आगे जिस तरह के सभी संसद मार्क के ऊपर भी लगे जो पत्तर-पत्तर चला रहे हैं वैसे लोग खड़े हुए थे इन गेट के इस साइड में रोड के तरफ दूसरी तरफ जहां भी नेताय सुभाष ने वह उसकी पृत्मा वगैरह लगी हुई वहां पर कुछ लोगों ऐसा सिविलाइज किस्म का प्रोक्टेस कर रहे थे कंडल लाइट वगैरह जला रखी थी यह टाइप में तो क्या हुआ कि पुलिस लाटी चार्ज करना शुरू किया अब मैंने मैंने कहीं पढ़ रखा था पता नहीं कहा कि बैठे आर्मी पर पुलिस घंडा नहीं चला सकती है क्या क्या क्या तीज गए बैठे आजमी भी पुलिस तंडा नहीं चला सकती है अब मैंने कहां पढ़ा ऐसे मेरे पढ़े हुए के वजह से मेरे जीवन में दो ऐसी घटनाएं एक बात नहीं कभी बताऊंगा जो मैंने पढ़ा जानकारी जो मेरी थी वह ट्रैक्टिकली टीम के तो मैंने क्या किया नेता की रही चक्कर में जो लोग खड़े थे मैं खड़ा होकर जो नेता बनकर बढ़ जाइए पुलिस वाले आपको नहीं मार सकते बैठ जाइए और मेरे के नेते पुलिस ने जो मारना शुरू किया पड़े-पड़े लोग अरे बाब रहे और हम लोग भागना शुरू किया मेरे साथ मेरे क्लासमेट थी और वह एकदम ऐसे दूली-पदली जैसा अपना प्रतियों से वैसी वह एकदम सिंगल पसली भाई उसको पुलिस वाले लाटी मारी एकदम मेरे बराबर हम भाग रही थी लाटी मारी उसको ऐसे वो मतलब उसे vomit कर दिया वहीं पे ये देखा तुम्हे थोड़ा सा मतलब जोसम आया तुम्हे ऐसे पीछे घूमा और पुलिस वाले को कहा कि अब होई ऐसे करके उसको पकड़ा और मेरी ये बाहदरी के हरकजो है कमसे कम वहाँ 20-30-50 जवानों देख ली उन्होंने कहा कि चलो ठीक है भीड़ बाह में कंट्रोल करेंगे पहले इसको कंट्रोल करो उन्होंने मेरे बनाया चारों तरफ घेरा मुझे समझ नहीं है गंडा कहां से लग रहा है लेट गया उल्टा थोड़ी देर बाद उनको भी दयागी कि यह जो इसको पर्याप्त पड़ गई अरे गिंतिश बाहर सेगंडों के साथ चल रही थी तभी अभी तक सूजन कम नहीं हुई है तो सुनाते यार तो उसमें क्या हुआ कि अब मेरे को समझ में आ गया कि थोड़ी देर में, 10 second बाद मेरे को समझ में आ गया कि अब जो है, इन्होंने मेरे को शिकार के रूप में आइडेंटिफाई नहीं कर रहे हैं, वो हमको छोड़कर आगे निकल गए। तो मैं ऐसे लेटा हुआ था नीचे, तो मैंने ऐसे देखा ऊपर, तु मेरे को कोई पुलीस वाला नहीं दिखा लेकिन बैज है