Part of a cluster — open full story hub

Summary
इतिहास मेरे साथ आज के मीडिया से ज़्यादा न्याय करेगा। साल 2014 में कहे गए शब्द सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं थे, ये उस इंसान का भरोसा था जो अपने ऊपर लगे आरोपों, आलोचनाओं और सवालों के बीज भी लेकिन शायद इतिहास ने उनके साथ नियाय करने में थोड़ी देर कर दी。
“इतिहास मेरे साथ आज के मीडिया से ज़्यादा न्याय करेगा।”From the report
History will be kinder to me than the contemporary media History will be kinder to me than the contemporary media यानि इतिहास मेरे साथ आज के मीडिया से ज़्यादा न्याय करेगा साल 2014 में कहेगए शब्द सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं थे ये उस इंसान का भरोसा था जो अपने उपर लगे आरोपों, आलोचनाओं और सवालों के बीज भी लेकिन शायद इतिहास ने उनके साथ नियाय करने में थोड़ी देर कर दी क्योंकि जिस फैसले के इंपिजार डॉक्टर मनमोहन सिंग ने अपने जिन्दगी में किया वो फैसला उनके जाने के बाद आया करीब बारा साल बाद सुप्रीम कोट ने उस कोईला ब्लॉक आवंटन मामले को बंद कर दिया जिसने उनके प्रधान मंतरी पत के आखरी वर्षों पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया था। 29 जुलाई को अदालत ने माना कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए परियाप्त आधार मौझूद नहीं था। फैसला आ गया लेकिन उससे सुनने के लिए वो इंसान मौजूद नहीं था जिसने सालों तक अपनी इमानदारी पर उठते सवालों का बोज उठाया ये कहानी सिर्फ एक अदालत के फैसले की नहीं है ये उस दौर की कहानी है जब देश के सबसे शान सभाव वाले प्रधान मंत्रियों में से एक व्यक्ति अचानक सबसे बड़े राजनीतिक विवाद के एक केंदर में आ गया था एक तरफ वो मनमोहन सिंग थे जिनोंने 1991 में भारत को आर्थिक संकट से बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभाई थी दूसरी तरफ वही मनमोहन सिंग थे जिनके दूसरे कारकाल को भ्रष्टाचार की आरोपों और नीतिकत पंगुता के सवालों से जोड़ दिया गया। उनके आलोचकों ने उन्हें मौन प्रधान मंत्री कहा। सवाल ये नहीं था कि उन्होंने खुद कोई निजी फाइदा उठाया या नहीं। सवाल ये था कि क्या उनके नेतरत वाली सरकार में ऐसे फैसले हुए जिन से देश को नुकसान पहुचा। और इनी सवालों के बीच