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Summary
रिजर्वेशन हटाव आंदोलन के पेज के 50 लाख फालोवर हो गए हैं जिसके बीडियो लाखों लाखों में देखे जा रहे हैं इसके समर्थक एक भावनात्मक अपील करने की कोशिस कर रहे हैं कि क्या समान वर्ग संघर्ष नहीं करता है
“जाति होने से ही आप merit की बहस हार जाते हैं”From the report
रिजर्वेशन हटाव आंदोलन के पेज के 50 लाख फालोवर हो गए हैं जिसके बीडियो लाखों लाखों में देखे जा रहे हैं इसके समर्थक एक भावनात्मक अपील करने की कोशिस कर रहे हैं कि क्या समान वर्ग संघर्ष नहीं करता है हाँ सामान वर्ग वैसे संघस नहीं करता है जैसे दलित समुदाय करते हैं इस बात को मैं साप साप कह देना चाहती हूँ क्योंकि उच्छ मानी जाने वाली जातियों के घर जैसे पंडित है ठाकूर है तिवारी अपने आपको जो बोलते हैं उनके ज्यादा तर घर सडक के किनारे होते हैं। लेकिन वही पर अगर मैं दलितों की बात करूँ, मुसल्मानों की बात करूँ, आधिवासियों की बात करूँ, तो उनके ज्यादा तर घर या तो सडक से कई किलो मीटर दूरी में होते हैं, पांच किलो मीटर के अंदर में होते हैं आप गाउं में अगर आप घुसेंगे तो उनकी बस्तियां सबसे किनारे में होती हैं सबसे पहले गाउं के घर आपको उच्छ जाती के मिलेंगे या जो बहुत अमीर लोग हैं उनके घर मिलेंगे जाति की समाजिक ताकत पहुच वर्ग, वर्चस, नेटवर्क और प्रतिनिधित्त जैसी समाजिक सचाईयों को पूरी तरहे नजर अंदाज कर दिया जाता है जबकि हमारे देश में कई बार पैसों से भी ज्यादा महत्व मिलता है आपको ये पता ही होगा मुझे बताने की जरूरत नहीं है उच्छ जातियों के पास समाज में ऐसी ताकत है जो पैसो से भी बड़ी है वो भी आप जानते हैं और ये ताकत है सिच्छा, स्वास्त, रोजगार, सामाजिक जीवन, खान पान, हर जगए ये सब दिखाई देता है ये बात हजार बार कही जा चुकी है लेकिन मुद्धा फिर वही ला करके खड़ा कर दिया जाता है reservation हटाओ जैसे आंदोलन इस बात पर बड़ा जोर देते हैं कि merit न होने के बावजूद आरच्छड दिया जाता है लेकिन जाती होने से ही आप merit की बहस हार जाते हैं