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Summary
आतंकवादी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां जांच कर रही हैं और दोषियों की तलाश जारी है। प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर्याप्त है और सुरक्षा एजेंसियां अपनी जांच में जुटी हैं।
From the report
जम्मू और कश्मीर के कुलगाम जिले से एक बार फिर आतंगवाद की दर्दनाक खबर सामने आई है तक्षिन कश्मीर के कुलगाम में स्थित एक इंट भट्ठे पर आतंगवादियों ने प्रवासी मजदूरों का नाम पूछकर हमला कर दिया ये ऐसे मजदूर थे जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए हजारों किलोमिटर दूर से कश्मीर आय थे पिछले दस दिनों में होने वाला ये दूसरा आतंकी हमला है इस वीडियो में इस पूरे घटनाकरम को समझने की कोशिश करेंगे नमस्कार मेरा नाम वरुन है और आप देख रहे हैं जिस्ट हर साल की तरह इस बार भी कई मजदूर बहतर मजदूरी की उमीद में कश्मीर के इट भटो पर काम करने पहुंचे थे उनकी कोशिश सिर्फ इतनी थी कि वो अपने परिवार के लिए कुछ ज्यादा पैसे कमा सके लेकिन जिस रात उनके घरवाले उनकी सलामती की उमीद कर रहे थे उसी रात आतंकियों ने उनके सपनों को गोलियों से छलनी कर दिया हमले में 24 साल के दीपक रातरे की मौके पर ही मौत हो गई जब ये 28 साल के भुपेंदर को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया उन्होंने शनिवार की सुबह शेरे कश्मीर इंस्टिटूट अफ मेडिकल साइंसेज यानी SKIMS में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया बात कही है शुरुआती जांच में इसे पहलगाम हमले जैसी टारगेटेड किलिंग के तौर पर देखा जा रहा है कहा यह भी जा रहा है कि हमले में एक एसएटालीज जैसे असॉल्ट वेपन्स का इस्तेमाल किया गया वहां किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी इसलिए मजदूरों को संभलने के लिए या बचने का कोई मौका नहीं मिला हमले के वक्त इंट भट्ठे पर कई प्रवासी मजदूर मौजूद थे लेकिन शुरुवाती जानकारी के मुताबिक आतंकियों ने केवल इन दोनों हिंदू मजदूरों को ही निशाना ब प्रसाशन ने इस हमले की कडी निंदा करते हुए दोशियों को जल से जल्द कानून के दाइरे में लाने का भरोसा दिलाया है। शुरुवाती जांच में सिक्योरिटी एजिनसीज का शक लशकरे ताइबा के प्रॉक्सी ओर्गनाइजेशन दरेजिस्टेंस फ्रंट यानी टी आरेफ पर है। आधिकारियों का मानना है कि पिछले कुछ सालों में घाटी में नॉन लोकल्स और प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाने के कई मामलों में उन्होंने कहा है कि पहले से घोशित 6 लाख रुपे के मुआवजे के अलावा चीफ मिनिस्टर रिलीफ फंड से प्रतेक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपे की अतिरिक्ट साहिता दी जाएगी जांच से जुड़े सोर्सेज के मुताबिक एजन्सियों का फोकस एक स्थानिये मुहम्मद लतीफ पर भी है बताया जा रहा है कि वो पिछले साल TRF में शामिल हुआ था और अब जांच एजन्सियां इस पूरे हमले में उसकी भूमिका की परताल कर रही है Forensic Investigation भी तेजी से आगे बढ़ रही है घटनास्थल से बरामत कार्टिजेज और दूसरे Physical Evidence की जाच अभी जारी है ताकि इस्तमाल किये गए हतियारों और हमलावरों के Network के बारे में ठोस जानकारी जुटाई जा सके Security agencies का सुर्वाती assessment ये भी है कि ये हमला आतंकियों की strategy में आए एक नए बदलाव की ओर इशारा करता है अगर पिछले कुछ सालों के हमलों पर नजर डालें तो एक pattern साफ दिखाई देता है पहले जहां आतंकियों का मुख्य निशाना सेना, पुलिस और सुरक्षा बल हुआ करते थे, वहीं अब गैर स्थानिय नागरिक, प्रवासी मजदूर, टूरिस्ट और माइनोरिटी कम्यूनिटीज के लोग लगातार निशाने पर दिखाई दे रहे हैं Security experts का मानना है कि इसके पीछे एक strategic approach है सुरक्षा बलो पर हमला करने के बाद आतंकियों को तुरंत बड़े military operation का सामना करना पड़ता है जबकि आम नागरीकों को निशाना बना कर वो कम resources में ज्यादा डर और असुरक्षा का माहोल पैदा कर सकते हैं यही वजह है कि प्रवासी मजदूर आतंकियों के लिए सबसे आसान निशाना बन जाते हैं यह मजदूर अकसर इट भटो, बगानो और कंस्ट्रक्शन साइट्स जैसी सुनसान जगहों पर काम करते हैं उनके पास सिक्योरिटी का विशेश इंतिजाम नहीं होता और वे स्थानिय नेटवर्क का भी हिस्सा नहीं होते। ऐसे में उन पर हमला कर आतंकवादी न सिर्फ दहशत फैलाने की कोशिश करते हैं, बलकि घाटी में काम करने आने वाले दूसरे मजदूरों के मन में भी डर पैदा करना चाहते हैं। Security agencies इस बात की भी जाच कर रही है कि क्या इस हमले में स्थानिय स्थार पर किसी तरह की मदद मिली थी. पिछले कुछ सालों में कई मामलों में over ground workers यानि OGW network का इस्तमाल आतंकियों की मदद के लिए किया जाता रहा है. हाला कि कुलगाम हमले में अभी तक इस तरह की किसी भूमिका की आधिकारिक पुष्टी नहीं हुई है और जांच जारी है। Ministry of Home Affairs MHA 2014 2022 224 2017 40 2018 49 2020 37 2022 में भी ये आकडा 31 था Home Ministry ने 2023, 2024, 2025 और 2026 के नागरिक की मौतों का डेटा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है लेकिन 2025 में पहलगाम और अब कुलगाम जैसे हमली ये संकेत देते हैं कि आतंकवादी एक बार फिर आम नागरिकों को खासकर गैर स्थानिय लोगों को सौफ्ट टारगेट बनाने की कोशिश कर रहे हैं जाच का एक एहम हिस्सा इंट भटे पर लगे CCTV कैमरा की फुटेजेस से भी आता है। दरसल पिछले दो तीन सालों में कश्मीर के इंट भटो पर ऐसे ही आतंकी हमले हो चुके हैं। इनी घटनाओं के बाद पुलिस ने इट भटो पर CCTV कैमराज लगाने के निर्देश दिये थे। कुलगाम के इस इट भटे पर भी कैमरे लगे हुए थे और अब जाच एजन्सियां उनके फुटेजेस को खंगाल रही है। अधिकारियों की उम्मीद है कि इससे हमलावरों की पहचान और उनके भागने के रास्ते के बारे में एहम क्लूस मिल सकते हैं। इस पूरे इलाके में 20 से ज़्यादा इंट भट्टे मौजूद हैं इसलिए सुरक्षा वेवस्था भी नए सीरे से रिव्यू की जा रही है। अगर हाल के दिनों की घटनाओं पर नजर डालें तो ये साफ दिखाई दिता है कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा एजिन्सीयों के सामने चुनौती अभी पूरी तरह खत नहीं हुई है। इस हमले से ठीक 10 दिन पहले 22 जुलाई को अननतना के लाल चौक में भी आतंकियों ने पुलिस पर हमला किया था। उस हमले में अमरनात यात्रा की ड्यूटी पर तैनात हेड कॉंस्टेबल आशिक हुसेन शहीद हो गए थे। इसके बाद जाच एजिन्सियों ने घाटी में सर्च ओपरेशन चलाया और करीब 3000 लोगों को पूछताच के लिए डिटेन कर लिया। बाद में इन में से ज्यादा तर लोगों को छोड़ दिया गया। लेकिन जाच एजन्सियां लगातार आतंकी नेटवर्क की कडियों को जोड़ने में जोड़ी हुई है। इससे पहले 18 जुलाई को रजौरी जिले में लाइन ओफ कंट्रोल यानी एलोसी पर भारतीय सेना ने सस्पीशियस इन्फिल्ट्रेशन की एक कोशिश को नाकाम किया था। सेना के मताबिक तारकुंडी सेक्टर में रात के समय कुछ सस्पीशियस अक्टिविटीज देखी गई थी। जिसके बाद दोनों तरफ से करीब देर घंटे तक रुक रुक कर फाइरिंग हुई। हलाकि इस घटना में किसी की जान नहीं गई लेकिन शुरुवाती असेस्मेंट यही था कि आतंकवादी सीमा पर से इंफिल्ट्रेट करने की कोशिश कर रहे थे। और इससे कुछ दिन पहले 8 जुलाई को सोफिया में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी मिली थी। सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस और CRPF के एक जॉइंट ओपरेशन में लशकरे ताइबा के टॉप कमांडर जाकिर एहमद को मार गिराया गया। वो पहलगाम आतंकी हमले के बाद जारी 14 Most Wanted Terrorist की सूची में शामिल था। बलकि घाटी में जारी कांटर टेरिरिजम कैमपेइन और आतंकियों की बदलती स्ट्राटेजी के बीच चल रही लगातार लड़ाई का हिस्सा माना जा रहा है ये पहली बार नहीं है कि जब ये आशंका जताई जा रही हो कि लोगों को धर्न पूछ कर मार दिया गया है भारत के इतिहास में ऐसे कई आतंकी हमले हुए हैं जहां लोगों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर चुन कर निशाना बनाया गया है 6 जुलाई 1987 को जम्मू कश्मीर के लाल्रू बस मैसेकर में आतंकी ओंने बस रोक कर हिंदू यात्रियों को अलग किया और उन पर गोलियां चला दी अगले ही दिन 7 जुलाई 1987 को पतھे बाद बस मैसेकर में भी इसी तरह यात्रियों की पहचान करके उनको मार दिया गया करीब चार दशक बाद भी 22 अपरेल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले में जाच एजन्सियों के मताबग आतंकियों ने 26 टूरिस्ट से उनका नाम और धर्म पूछा और कुछ मामलों में कल्मा पढ़ने के लिए भी कहा इसके बाद गैर मुस्लिम टूरिस्ट को चुन कर गोली मार दी गई कुलगाम मामले में नाम पूछकर निशाना बनाने के दावे की आधिकारिक पुष्टी अभी तक नहीं हुई है और पुलिस की जाच चारी है इसलिए इस एंगल पर अंतिम निशकर्ष जाच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा इस हमले ने एक बार फिर घाटी में काम करने वाले लाखो प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं हर साल करीब 3-5 लाग प्रवासी मजदूर मौसमी और अस्थाई काम के लिए जम्मु कश्मीर पहुँचते हैं इन में सबसे जादा मजदूर बिहार, उत्तरपदेश, ज्जारकन, विस्ट बिंगॉल, उडिसा और छतीजगड से आते हैं ये लोग इंट भटो में, सडग बनाने में, बागवानी, कृषी, होटल और टूरिजम जैसे कई सेक्टर्स में काम करते हैं और घाटी की स्थानिय एकॉनमी का एक महत्पून हिस्सा है ऐसे में कुछ बड़े सवाल भी खड़े होते हैं जब पिछले कुछ सालों में प्रवासी मजदूरों पर कई हमले दर्ज किये जा चुके हैं, तो उनकी सुरक्षा को लेकर क्या नई विवस्था बनाई गई थी? क्या इंट भटो, कंस्ट्रक्शन साइट्स और दूसरे संवेदनशील इलाकों में काम करने वाले हजारों मजदूरों की सुरक्षा परियाप्त है और अगर नहीं तो ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से कैसे रोका जाएगा सुरक्षा इजिन्सियां अपनी जांच में जुटी है और दोशियों की तलास जारी है लेकिन इस हमले की असली चुनौती सिर्फ आतंकियों को पकड़ना नहीं बलकि उन लाखो प्रवासी मजदूरों के मन में भरोसा कायम गरखना है जो हर साल रूजी रोटी की तलाश में घाटी का रुख करते हैं अब आप इस पूरे घटना करम पर क्या सोचते हैं अपनी राय कॉमेंट्स में जरूर बताएं देश और दुनिया की बड़ी ख़वरों के लिए देखते रहे जिस्ट शुक्रिया