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Summary
दिल्ली पुलिस कर्मियों के परिवार ने प्रेस कॉन्फिरेंस की, 20 जुलाई की घटना पर चर्चा की, पुलिस कर्मियों के साथ हुई हिंसा का जिक्र किया, सरकारी वाहनों और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का दावा, परिवारों ने अपने अनुभव साझा किए, घटना को सिर्फ पुलिस बनाम प्रदर्शनकारियों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए
From the report
हर बड़े आंदोलन की एक तस्वीर होती है जो सबसे ज़ादा दिखाई देती है लेकिन कई बार उसी तस्वीर के पीछे कुछ ऐसी कहानियां भी होती हैं जिन पर उतनी चर्चा नहीं होती बीच जुलाई को दिल्ली में हुए कौकरो जंता पार्टी यानी CJP के चात्रों के संसद मार्च के बाद भी कुछ ऐसा ही हुआ पिछले काई दिनों से चर्चा इस बात पर हो रही है कि प्रदर्शन कारियों के साथ क्या हुआ कितने लोगों को हिरासत में लिया गया क्या पुलिस ने जरूरत से जादा बल प्रयोग किया और क्या शांती पून प्रदर्शन हिंसा में बदल गया लेकिन अब पहली बार कैमरे के सामने आये हैं, उन दिल्ली पुलिस कर्मियों के परिवार जो दावा करते हैं कि उस दिन उनके अपने भी हिंसा का शिकार हो थे उनका सवाल है कि अगर संसद में इस पूरे मामले पर चर्चा हो रही है तो क्या पुलिस कर्मी और उनके परिवारों की बात भी उतनी ही एहम नहीं है क्या है पूरा मामला जानेंगे आज के इस वीडियो में हाई मैं हूँ प्रगती और आप देख रहे हैं जस्ट पुलिस फालों का क्या, जिनको जो इंजर हुँन का क्या फिर मुझे पता चला कि जो एगरिसिस्ट थे उन्होंने पुलिसे खिलाफी application डाली कि उनके साथ unjust हुआ है मैंने और बहुत सारी families ने पुलिस की उन्होंने भी मिलकर clear डाली कि हमारे भी rights हैं अपने पुरिम कोड खुद कहता है कि एवरीवन इस एकल इंफेंट ऑफ लॉग एवरीवन आज डाइट टू लाइव 31 जुलाई को घायल दिल्ली पुलिस कर्मियों के चार परिवारों ने प्रेस कॉनफरेंस की बिहाइंड एवरी यूनिफॉर्म इस फामिली यानी वर्दी के पीछे भी एक परिवार होता है। उनका कहना था कि 20 जुलाई की घटना के बाद से पूरे देश में सिर्फ प्रदशन कारियों की चोट, पुलिस के कारवाई और छात्रों के साथ हुए वैवार पर चर्चा हो रही है। लेकिन उस दिन ड्यूटी पर मौजूद जिन पुलिस कर्मियों को चोट लगी उनके बारे में कोई बात ही नहीं हो रही परिवारों का कहना था कि उनका मकसद किसी के दर्द को कम करके दिखाना नहीं है बलकि वो सिर्फ इतना चाहते हैं कि अगर संसद में 20 जुलाई की घटना पर चर्चा हो रही है तो जूटी के दोरान घायल हुए पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों की भी बात उसी गंभीरता से सुनी जाए उनका आरोप था कि अब तक इस पूरे मामले में सिर्फ एक ही पक्ष सामने आया है जबकि घटना का दूसरा पहलू भी है जिसे नजर अंदाज नहीं किया जाना चाहिए अपनी बात रखने के लिए परिवार सिर्फ बयान ही लेकर नहीं आये थे प्रेस कॉनफरेंस के दौरान उन्होंने एक स्लाइट शो भी दिखाया इसमें घायल और खून से लथपत पुलिस कर्मियों की तस्पीरे दिखाये गई 20 250 110 300 350 20 10 स्कैनर को नुकसान पहुंचा इसके अलावा 25 से ज़्यादा सरकारी वाहन और नीजी संपत्ती को भी नुकसान पहुंचाया है इन तस्वीर और आकडों के जरिये परिवार ने दिखाने की कोशिश की कि उस दिन सिर्फ प्रदशनकारी ही नहीं बलकि ड्यूटी पर मौजूद पुलिस कर्मी भी हिंसा का सामना कर रहे थे हालंकि यह आकड़े परिवारों और पुलिस की तरफ से रखे गए दावे हैं और इनकी पुष्टी अभी सारवजनिक रूप से नहीं हुई है परिवारों ने सिर्फ आक्डे ही नहीं रखे बलकि उस दिन के अपने personal experience को भी साजा किया उनका कहना था कि 20 जुलाई की घटना को सिर्फ पुलिस बना प्रदशन कारी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि इसके पीछे ऐसे परिवार भी हैं जिनोंने अपने घर के किसी सदस्ये को घायल हालत में लोटते हुए देखा पहले 20 जुलाई की घटना पर नजर डालते हैं दरसल कौकरो जंता पार्टी यानि CJP ने पेपर लीग भरती परिक्षाओं में गड़बड़ी और सिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग और ततकालिन सिक्षा मंतरी के स्थिपे की मांग को लेकर जंतरमंतर से संसद मार्च का एलान किया था हजारों चात्रों और यूवस में शामिल हुए थे शुरुवात में मार शांतिपून तरीके से आगे बढ़ रहा था लेकिन जैसे जैसे भीड संसत की तरफ बढ़ी पुलिस और प्रदशनकारियों के बीच टक्राव शुरू हो गया कई जग़ा बैरिगेट्स लगाये गये थे पुलिस का दावा है कि प्रदशनकारियों के एक हिस्से ने बेरिगेट्स तोड़ने की कोशिश की जिसके बाद हालात और बिगड़ गए दूसरी तरफ आंदोलन से जुड़े लोग दावा कर रहे हैं कि भीड को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रियोग किया जिसके बाद अफरत अफरी मच गई इसके बाद जो तस्वीरे सामने आई उनमें कहीं लाठी चार्ज दिखाई दिये कहीं आसु गैस छोड़ी गई और कहीं प्रदशनकारी पुलिस से भिटते नजर आए कई लोगों को हिरासत में लिया गया अगले दिन से इस पूरे घटना करम पर राजनीती भी शुरू हो गई विपक्ष ने सरकार और डिली पुलिस पर सवाल उठाए जबकि पुलिस ने दावा किया कि उसके जवानों पर हमला किया गया है और उन्हें अपनी ड्यूटी निभाने के दौरान हिंसा का सामना करना पड़ा अब इसी घटना को लेकर घायल पुलिस कर्मियों के परिवार पहली बार सारवजनिक तौर पर सामने आये हैं उन्होंने दावा किया है कि छात्रों की भीड में कुछ आसामाजिक तत्व भी शामिल हो गए थे जिन्होंने माहौल बिगाड़ा और पुलिस कर्मियों पर हमला किया परिवारों का कहना है कि पूरे आंदोलन को सिर्फ चात्रों के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए बलकि ये भी जाच होनी चाहिए कि हिंसा करने वाले लोग आखिर थे कौन प्रेस कॉन्फिरेंस में मौजूद एक घायल एस आई की पत्ती ने दावा किया कि उनका विरोज चात्रों से नहीं है उनके मुताबिक अगर किसी चात्र ने हिंसा में हिस्सा नहीं लिया है तो उसके रिकॉर्ड की जाज के बाद उसे रिहा किया जाना चाहिए जिन्नोंने पुलिस फोर्स पर गमलों से जो भी उनके हाथ में चीजे आ रही थी चपनों से, जूतों से और पत्थरों से उनने पुलिस फोर्स को घायल कर दिया था मेरे पति को भी जो डूटी के धोरान हेलमेट दिया जाता है उनका हेलमेट भी पूरी तरह से तूट गया था और यदि कोई पत्थर का टुकडा हेलमेट तूटने के बाद उनके सर पर लगता तो सायद वो आज इस दुनिया में नहीं रहते प्रेस कॉन्फरेंस में मौजूद दिल्ली विश्व विद्याले की एक छात्रा जिनके पिता जड़प में घायल हुए सब इंस्पेक्टर है उन्होंने बताया कि उनके पिता पहले भारतिया नौसैना में 15 साल तक मरीन कमांड्रो रह चुके है और बाद में दिल्ली पुलिस में शामिल हुए उन्होंने दावा किया कि 20 जुलाई को उनके पिता खून से सनीवर्धी पहन कर घर लोटे लेकिन जब उन्होंने सोशल मीडिया देखा तो वहाँ कई लोग बिना पूरी जाच का इंतजार किये पुलिस कर्मियों को ही दोशी ठहरा रहे थे। पच्चिस तारीको आलाकि इस कहानी का दूसरा पक्ष भी उतना ही एहम है बीज जुलाय की घटना के बाद सिर्फ पुलिस पर हमले की बात नहीं हुई बल्कि दिल्ली पुलिस की कारवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए गए सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए जिनमें कुछ यूनिफॉर्म पुलिस कर्मी प्रदर्शन कारियों पर लाठी चार्ज करते दिखाई दिये कहीं जगह हिंसा की पुलिस के मुताबिक किसी दौरान बड़ी संख्या में उनके जवान घायल हुए और सरकारी संपत्ती को भी नुकसान पहुचा घटना के बाद कई FIR दर्ज की गई और CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर लोगों की पहचान करनी की प्रकरिया शुरू की गई बाद में दिल्ली पुलिस ने ये भी दावा किया की उसने संसद मार्च में शामिल करीब 2800 लोगों की पहचान कर लिया है पुलिस का कहना था कि इन में से करीब 1000 लोगों के खिलाफ पहले से अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज थे हालांकि इस दावे को लेकर भी सवाल उठे आलोचकों का कहना था कि किसी व्यक्ति के खिलाफ पहले कोई मामला दर्ज होना और अदालत द्वारा दोशी ठहराय जाना दोनालग बाते हैं इसलिए इन आकडों को अंतिम निशकर्ष नहीं माना जा सकता दूसरी तरफ CJP और आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि उनका मार्च शांती पूर्ण था और छात्रों का मकसद सिर्फ पेपर लीक और सिक्षा वैवस्था में सुधार की मांग उठाना था संगठन का आरोप है कि हालात तब बिगडे जब पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए बलप्रयोग किया सीजेपी के संस्थापक अभिजीद दिपके ने भी आरोप लगाया कि कुछ बहारी तत्वों ने जान बूचकर माहौल बिगारने की कोशिश की हालंकि उन्होंने घायल पुलिस कर्मियों के प्रती सहानू बूती जताते हुए कहा कि अगर किसी पुलिस कर्मियों को चोट लगी है तो उसकी भी निश्पक्ष जाच होनी चाहिए इसे बीच एक और विवाद सामने आया सोशल मीडिया पर एक पत्थरों से भरे ट्रक की तस्वीरे और वीडियोज वाइरल हुई विपक्ष की कुछ नेताओं ने सवाल उठाया कि प्रदर्शन वाली जग़ा के पास ये ट्रक कैसे पहुँचा और इसका अस्तमाल किस ने किया यानि इस पूरे मामले में कई दावे और कई सवाल एक साथ मौजूद है एक तरफ घायल पुलिस कर्मियों के परिवार हैं जो कहते हैं कि उनकी बात नहीं सुनी गई दूसरी तरफ प्रदर्शन कारी हैं जो पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोक का आरोप लगा रही हैं जाच नहीं होती तब तक 20 जुलाई की घटना को लेकर सामने आए दावों और आरोपों को अंतिम सच नहीं माना जा सकता इस मुद्दे को लेकर आप अपनी राय हमें कॉमेंट करके जरूर बताए तेज़ दुनियोराप से जुड़ी हर खबर के लिए देखते रहे जस्ट