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Summary
کشمیر ایک مرتبہ پھر دہل اٹھا ہے ایک بار پھر پہلگام کے طرح نام پوچھ کر لوگوں کو مارا گیا ہے میڈیا رپورٹس میں ایسے دعوے سامنے آ رہے ہیں
“کشمیر ایک مرتبہ پھر دہل اٹھا ہے”From the report
کشمیر ایک مرتبہ پھر دہل اٹھا ہے ایک بار پھر پہلگام کے طرح نام پوچھ کر لوگوں کو مارا گیا ہے میڈیا رپورٹس میں ایسے دعوے سامنے آ رہے ہیں مارا کے نے گیا ہے انہیں جن کا واسطہ کشمیر کی راجنیت سے نہیں تھا وہ تو بیچارے پروازتی مزدور تھے جو اپنا گزار آ کر نے پریوار کا پیٹ پال لے دور در آج اتر پردیش 36 گرل سے کشمیر آ کر کام کر رہے ہیں لیکن کل کی رات نے دو پریواروں سے ان کا کندھا چھین لیا اور دیش سے اس کے دو نوجوان کیا ہوا کل کشمیر میں کیسے آتنکیوں نے حملے کو انجام دیا پہلگام کی ہی ترج پر ایک بار پھر کیسے انہوں کو مارا گیا اور سرکار اور دیش کی خفیہ ایجنسی سے بار بار چوک کیوں ہو رہی ہے سب پر بات کریں گے نمازتے میرا نام سورب ترپاتھی ہے آپ نیوز پنچ دیکھ رہے ہیں کشمیر گھاٹی میں شام اترتے ہی پہاڑوں کی چوٹیوں پر آخری دھوپ کی لالیما فیکی پڑھنے لگتی ہے اور گھاٹی کے بیٹر بسے چھوٹے چھوٹے گاؤں اپنے روز مرہ کے کام سمیٹنے لگتے ہیں دکشن کشمیر کے کلگام زلے کا کیلم گاؤں بھی 31 جولائی 2026 کے شام اپنے عام روٹین میں ہی تھا یہاں ایک ایڈ بھٹے پر دن بھر کی محنت کے بعد مزدور سستانی کے تیاری میں تھے مٹی سے سنے ہاتھ تھکے ہوئے چہرے انہی مزدوروں میں شامل تھے چھتیس کڑ سے آئے چوبیس سال کی دیپک راترے اور اٹھائیس سال کے بھوپیندر کمار ان کا کشمیر سے کوئی سیاسی یا دھارمک جھکڑا نہیں تھا نہ ہی انہیں گھاٹی کی راجنی سے کوئی سروکار تھا بس ایک چہاد رہی ہوگی کہ محنت کر کے اپنے پریوار کو دو وقت کی روٹی دے سکیں رات قریب ساڑھے آٹھ بجے کا وقت تھا وہاں موجود مزدوروں کے پاس جاکر سب سے پہلے ان کا نام پوچھا اور یہی سوال ان کی زندگی اور موت کے بیچ کی آخری لکیل ثابت ہوا۔ पीछे रह गई सिर्फ गोलियों की गुंज बारूत की गंध और दो बेकुसूर जिंदगियां जो मौत से जूज रही थी डर के बावजूद पिछानियत ने आतंक के आगे हार नहीं मानी, साथी मज़ूरों और स्थानी ग्रामीनों ने बिना पल गवाएं, घायलों को उठाया और बेहतर इलाज के लिए अनंतनाक के सरकारी मेडिकल कॉरेज जी एमसी अनंतनाक ले गए। रातो रात ये खबर जंगल की आग के तरह पूरे देश में फैल गए। सैकडो क्रिमेटर दूर 36 गड के छोटे गाओ में दो घरों की दुनिया उजड जुकी थी। ले ली थी इस घटना के बाद ऐसा लगा जैसे इतिहास ने खुद को दुहराया हो सुरक्षा विशेषक्यों का मानना है कि यह कोई इत्तिफाक नहीं बल्कि बकायदा प्लैंड हमला है आतंगी संघठन अब सुरक्षक घेरे वाले ठीकारों की और मौका मिलते ही हमला कर गायब हो जाते हैं जिससे उनकी पहचान करना सुरक्षा बलों के लिए बहत मुश्किल हो जाता है अब इस हमले को भी अकेली घटना समझना भूल होगी दरसल यह घाटी में हाल के दिनों में लगातार बढ़ती हिंसा की एक कड़ी भरे इससे ठीक एक हफ़ते पहले 29 जुलाई को अनंतनाक के लाल चौक पर आतंकियों ने जम्मू कश्मीर पुलिस के हेड कॉंस्टेबल आशिक हुसैन कुरेशी की गोली मार कर हत्या कर दी थी जो अमरनाद जूटी परतैनात थे यानि सिफ 10 दिनों की भीतर घाटी में दूसरी बड़ी टारगेटेट हत्या हुई है पहले एक वर्दी धारी पुलिस कर्मे को निशाना बनायेगे और अपनी हत्ये प्रवास्ती मज़दूरों को ये क्रम साफ इशारा करता है कि आतंकी नेटवर्क एक बार फिर सक्रिय कश्मीर में हो चुका है और घाटी में अपनी मौजूद की दर्श कराने की कोशिश कर रहा है। गए और उन्हें स्थानी रस्ता पर किसी की मदद मिली थी या नहीं जम्मू कश्मीर की उपराजपाल मनो सिंहान ने हमला की कड़ी निन्दा करते हुए डीजीपी और वरिष सुरक्षा अधिकारियों से घटना की विस्तर जानकारी ली है और जब यह उस वक्त उपराजपाल मद्धप्रदेश में थे वहाँ वो महु के आर्मी वार कॉलेज में सीनियर सैन अधिकारियों को संबोधत कर रहे थे और कह रहे थे कि जम्मो कश्मीर में आतंगवाद की नेटवर्क को जड़ से उखाड फेकने के लिए पूरी सरकार एक रणनीती पर काम कर रही है। आतंगवाद को जिंदा रखने की कोशिश करने वाले टेरर एकोसिस्टम के खिलाफ कोई नर्मी बनही बरती जाएगी। दिखाता है यह सभी घटनाओं पर घाटी की राजीत में भी एक स्वर्ग में आकोश और चिंता है चाहे विचारधारा कोई भी हो निर्दोष मजदूरों के हत्या को कोई सही नहीं ठहरा सकता रमो कुष्मेर के मुख्यमंत्री उमर अब्दूला ने भी मृतकों के लिए 10-10 लाग की मुआवजे की घोशना की है साती इस हमले की निंदा पर किया दूर 36 गल में मुख्यमंतरी विश्णुदेव साय की आवाज भी भरा की जब उन्होंने इस हमले को काइराना करार दिया और अपने राजजी के सपूत और उसके परिवार के साथ खड़े होने का वाजा किया और उन्हें आजपशन दिया कि राजसरकार पीड़ित परिवार को हर सबह मदद पहुचाएगी दो नौजवान जो सिर्फ महनत करके अपनी रोजी कमाने आये थे अब कभी वापस अपने गाउं नहीं लोटेंगे उनकी वापसी अब सिफ तिरंगे में लिप्टे ताबूत के रूप में होगी कश्मीर घाटी एक बार फिर उसी दर्दनाक सवाल के साथ जाग उठी है कि क्या पहलगाम के जख्म अभी भरे भी नहीं थे केलम ने उन्हें फिर से हरा कर दिया आखिर कब तक निर्दोश, निहत्ते और बेकुसूर मजदोरों की जान इसी खुदी खेल की भेड चड़ती रहेगी जिसकी ना कोई सरहध है, ना कोई सोच सिवाए नफरत और दहशत फैलाने के पिराल पूरे इलाके में सर्च ओपरेशन जारी है सुरक्षबल हमलावरों को जल से जल पकड़ने का दावा कर रहे हैं लेकिन घाटी के लोगों के दिलों में एक बार फिर से डर घर कर गया है कि ये कहानी शायद यही खत्म हो भी या नहीं हमारा सवाल भी सरकार से है, खुपी एजेंसी से भी है कि जब आप ये कहते हैं कि देश की सरहत को दुश्मन लांग नहीं सकता तो खुले आम वो कैसे कश्मीर में हत्या करके चला जाता है. आज सक पहलगाम के हमलावर नहीं पकले गए, एक साल से जाधा हो गए. आपने ओपरेशन संदूर जरूर कर दिया जो अच्छी बात है लेकिन जिन आतमगादियों ने 20 से ज़दा मासूम लोगों को मार रहा आप उन्हें क्यों नहीं पकर सके ठीक इसी तरह कैसे कोई हमारे देश में घुस कर हमारे लोगों को मार देता है और हम देखते रह जाते हैं बाद में कारिबाई की कोशिश करते देखते हैं पहले क्यों नहीं होता इसले क्यों नहीं रोका जा सकता यह सवाल पूछा जाता रहा है और पूछा जाएगा जब तक सुरक्षा में चूक होती रहेगा और इसका खामियाजा मासूम लोगों को भुगतना पड़ेगा आपका इस पूरी घटना के बारे में क्या सोचना है कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताईएगा इसे लिखा था हमारे साथ सूरज दे मेरा नाम सौरप तरपाठी है कैमरिक पेचान राग शुक्रिया