
Summary
छत्तीसगढ़ में युवाओं के अपराध की बढ़ती समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें नशा, बेरोजगारी और बदलता सामाजिक माहौल शामिल हैं।
“नशा अब सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था का भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।”From the report
दो साल में 2960 हत्याएं हर दिन चार मड़र राइपूर में सबसे जादा 160 वारदातें राइगर और जश्पूर में 114-114 केस क्या बढ़ते अपराद के पीछे सिर्फ नसा जिम्मेदार है क्या बेरोजगारी और बदलता सामाजिक महौल इसकी बड़ी वज़ा है जै जोहार संगवारी हो मैं हूँ आपमन के कंचन सेंद्रे और मेरे शो काहे का हक के इस नए एपिसोड में आप सभी का स्वागत करती हूँ साल 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर बने 36 गड उसकी आदिवासी संस्कृति जंगल शांत महौल के लिए जाना जाता था यहां गोड, हलबा समेत कई आदिवासी समुदाय बड़ी संख्या में रहते हैं लेकिन अब धीरे धीरे राज्य की पहचान के साथ साथ एक नई चिंता भी जुड़ती जा रही है बढ़ता अपराद और नशा राजधानी राइपूर से लेकर दुर्ग, विलासपूर और राजनांद गाउं जैसे शहर आये दिन चाकू बाजी, हत्या, लूट पाट और मारपीट की घटनाएं सामने आती है चिंता की बात ये है कि इन मामलों में युवाओं और नाबालीकों के नाम लगातार सामने आ रहे हैं इस्थानी लोगों का मानना है कि इसकी बड़ी वज़ा है शराब चोटी सी बातों पर गुस्सा आसानी से अब दिखाई देता है चत्तिसगड में सराब और नशे को लेकर पहले भी कई सवाल उठते रहे हैं सराब घोटाले, नई सराब दुकानों के विरोध और युवाओं में बढ़ते नशे को लेकर लगतार रिपोर्ट सामने आती रही है समाजिक कारेकरताओं का मानना है कि नसा अब सिर्फ स्वास्त का नहीं बलकि कानून विवस्था का भी बड़ा मुद्धा बनते जा रहा है सराब घोटाले में करीब 3200 करोड की घोटाले की बास सामने आयी थी जांच में कारोबारी अनबर धेवर का नाम भी सामने आया इसमें कई अधिकारियों की गिरफतारी भी की गई इस पूरे मामले में सराब व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किये कई घटनाओं में देखा गया कि नशे के लिए पैसे मांगने पर राह चलते लोगों पर हमला तक कर दिया जाता है छोटी छोटी बातों पर हिंसा तक अब आम होती जा रही है पुलीस समय समय पर जागरुकता अभ्यान चलाती है सरवजनिक जगों पर बैठे युवाओं को चेतावनी देती है और जरूरत पढ़ने पर कारवाही भी करती है दुर्ग जिले के खुरसी पार इलाके की एक घटना ने पूरे प्रदेश को जंगजोर के रख दिया जिन बच्चों की उमर 16 साल से लेकर 14 साल से लेकर लगबग 18-19 साल तक है नशे का भी दुस्परभाव है उसमें एक जिसके चलते इस प्रदार की भैठाओं की और आतरशित होता है साथ ही सोचल मीडिया के जमाने में उसको ऐसा लगता है कि यदि हम ऐसी घटनाई करेंगे तो हमें थोड़ा सा सोचल अट्रेक्शन मिलेगा वो भी एक इसका मुख्यकारांप है पुलीस समय समय पर आरोपियों के खिलाब कारबाही भी करती है जुलूस निकालती है छेतावनी भी दी जाती है और गिरफतारी भी होती है लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ जुलूस निकालने से अपराद रुक जाएगा कुछ लोगों का आरोप है कि कई अपराधियों को राजनीतिक सर्रक्षन भी मिला हुआ है जिसकी वज़ा से कई बार पुलीस के हाथ बंधे दिखाई देते हैं वहीं विशेशग्य मानते हैं कि बेरोजगारी भी अपराध को बढ़ाने में सबसे बड़ी वज़ा है आज छत्तिसगड के कई युवा रोजगार की तलास में दूसरे राज्जियों तक पलायन करते हैं जब युवाओं के पास काम नहीं होता, जब खेल के मैदान खाली होने लगते हैं जब बातचीत की जगः गुस्सा सामने आता है तब कई युवा गलत संगत और अपराद की दुनिया की उर बढ़ जाते हैं। अब सवाल सिर्फ अपराद रोखने का नहीं, सवाल युवाओं को सही दिशा देने का भी है। अगर गाउं और शहरों में खेल के मैदान, लाइब्रेरी, स्किल ट्रेनिंग और रोजगार के मौके बढ़े तो, शायद कई युवा अपराद और नशे की दुनिया से दूर रह सकते हैं। नशे के खिलाब सिर्फ पुलीस कारवाय ही नहीं बलकि समाजी इस तरपर जागरुकता की भी जरुवत है। माता पिता, सिक्षक, समाज और सरकार सभी को मिलकर काम करना होगा। क्योंकि अगर आज युवाओं को सही दिशा नहीं मिली तो आने वाला समय और भी जादा खतरनाक हो सकता है छतिसगड आज एक ऐसे मोड पर खड़ा है जहां एक तरब विकास की बात तो हो रही है तो दूसरी तरब बढ़ता अपराद और नशा युवाओं का भविष्ट प्रभावित कर रहा है जरूरत सिफ कारवाही का नहीं बलकि ऐसी सोच और व्यवस्था की है जो युवाओं को अपराद नहीं अवसर की रह प्रदान करें क्योंकि अगर युवा मैदान में नहीं दिखेंगे तो क्या गैंग में दिखेंगे और अब सवाल आप से क्या बढ़ते अपराद के पीछे सिर्फ नसा जिम्मेदार है क्या बेरोजगारी और बदलता सामाजिक महौल इसकी बड़ी वज़ा है और क्या हमारा समाज युवाओं को सही दिशा दिखाने में कहीं पीछे तो नहीं रहे गया तो दोस्तों छतिसगड में बढ़ते अपरात के बारे में आप क्या सोचते हैं आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं खबर लहरिया आपकी खबर आपकी भासा