
Summary
चीन और दक्षिण कोरिया में परीक्षा पेपर की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। चीन में परीक्षा के दिन शहरों में कंस्ट्रक्शन और ट्रैफिक पर रोक लगाई जाती है, जबकि दक्षिण कोरिया में परीक्षा के दिन पूरा देश ही रुक जाता है।
From the report
क्या दुनिया में ऐसे देश हैं जो लाखों करोणों स्टूडेंट्स की परीक्षा लीक प्रूफ करा लेते हैं? पहले बात चीन की कर लेते हैं. चीन में हर साल जून महीने में गाउ-काउ एक्जाम होता है. इससे दुनिया की सबसे बड़ी स्टेंडरडाइज परीक्षा माना जाता है इसमें हर साल करीब सवा करोड स्टूजन्स बैठते हैं NEET और JEE दोनों को मिला दे तो भी उतने कैंडिडेट्स नहीं होते साथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मताबए गाउकाउ के क्वेश्चन पेपर्स को स्टेट सीकरेट माना जाता है मतलब ये के पेपर को राज्य का गोपनीय दस्तावेश समझते हैं ऐसे में पेपर की प्रिंटिंग, स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट पर मिलिटरी ग्रेट सिक्योरिटी होती है। परिक्षा के दिन शहरों में कंस्ट्रक्षन और ट्रैफिक तक रोग दिया जाता है। एक तरह से बच्चों की परीक्षा के लिए पूरा देश अपने छात्रों के लिए एक जुट हो जाता है। साउथ कोरिया में हर साल नवंबर महीने में एक गुरुवार को सुनूंग यानी College Scholastic Ability टेस्ट होता है। इसमें करीब 5 लाग students बैठते हैं, यहां paper की security चीन से भी सक्त रहती है. Question paper बनाने वाले examiners और reviewers को exam से करीब 35 से 40 दिन पहले ही एक confidential facility में isolate कर दिया जाता है. Exam day पर तो पूरा देश ही रुक जाता है. listening section के दोरान करीब 30-35 मिनिट के लिए देश भर में civilian और military flights तक रोक दी जाती हैं ताकि plane की आवास से students को disturbance ना हो